मूत्र मार्ग संक्रमण
मूत्र मार्ग संक्रमण (urinary tract infection / UTI) जीवाणुजन्य संक्रमण है जिससे मूत्र मार्ग का कोई भी भाग प्रभावित हो सकता है। यद्यपि मूत्र में तरह-तरह के द्रव, लवण एवं वर्ज्य पदार्थ होते हैं किन्तु इसमें जीवाणु (बैक्टिरिया) नहीं होते। किन्तु यूटीआई से ग्रसित होने पर मूत्र में जीवाणु भी मिलते हैं। जब मूत्राशय (Urinary bladder) या वृक्क (किडनी) में जीवाणु प्रवेश कर जाते हैं और बहुगुणित होने लगते हैं तो यह स्थिति आती है।
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[संपादित करें] परिचय
मूत्र मार्ग, छह प्रमुख अंगों-दो वृक्क (गुर्दे), दो मूत्रवाहिनी (यूरेटर), मूत्राशय और यूरिथ्रा से मिलकर बना होता है। गुर्दे हमारे शरीर के रक्त को साफ करके उसमें मौजूद अवांछित तत्वों को हटाकर मूत्र के जरिये शरीर से बाहर निकालने का काम करता है। सबसे पहले गुर्दा रक्त की सफाई करता है और सफाई के बाद जो गंदा तरल पदार्थ निकलता है, वह मूत्रवाहिनी के रास्ते मूत्राशय में जमा हो जाता है। जब मूत्राशय पूरी तरह भर जाता है तब यूरिथ्रा पर दबाव पडता है। इसी वजह से मूत्र-त्याग की जरूरत महसूस होती है। कभी-कभी बच्चों को इसी यूरिनरी ट्रैक में इनफेक्शन हो जाता है, जिसकी वजह से उन्हें काफी तकलीफ होती है।
[संपादित करें] प्रमुख लक्षण
यूटीआई के प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं :
1.मूत्र में जलन
2.गुप्तांगों (प्राइवेट पार्ट्स) में खुजली
3.बार-बार मूत्र त्यागना
4.थोडा-थोडा यूरिन डिस्चार्ज होना और इस दौरान दर्द महसूस होना
5.मूत्र का रंग पीला होना और ज्यादा दुर्गध आना
6.ज्यादा इनफेक्शन की स्थिति में मूत्र के साथ ब्लड आना
7.कंपकपाहट के साथ बुखार
8.भूख न लगना
9.कमजोरी और थकान महसूस होना
10.बच्चे का कद और वजन न बढना
11.एक वर्ष से कम उम्र का बच्चा अगर यूरिन डिस्चार्ज के समय रोए तो उसे यूटीआई इनफेक्शन की आशंका हो सकती है।
[संपादित करें] कारण
1.किसी भी बच्चे को यूटीआई हो सकता है लेकिन लडकों की तुलना में लडकियों में यह समस्या ज्यादा होती है।
2.खानपान में गडबडी की वजह से अगर बच्चे के खून में इनफेक्शन हो तो उसकी वजह से भी उसे यूटीआई हो जाता है।
3.यूरिनरी ट्रैक में स्टोन की वजह से भी यह समस्या हो सकती है
4.यूरिनरी ट्रैक की संरचना में जन्मजात गडबडी की वजह से भी बच्चों को यूटीआई हो सकता है।
5.गर्मियों के मौसम में शरीर में पानी की कमी की वजह से यह समस्या ज्यादा होती है।
[संपादित करें] बचाव के उपाय
1.बच्चों की, खास तौर से लडकियों की सफाई का पूरा ध्यान रखें।
2.टॉयलेट हमेशा साफ-सुथरा रखें।
3.बच्चों के खानपान की स्वच्छता का भी खयाल रखें क्योंकि खुले में बिकने वाली चीजें खाने से अगर बच्चे के खून में इनफेक्शन हो तो इससे उसके यूरिन में भी इनफेक्शन आ जाता है।
4.जब कभी बच्चे को ऐसी समस्या हो तो आप उसे पानी और तरल पदार्थो का सेवन ज्यादा से ज्यादा मात्रा में करने को कहें।
5.बच्चों को हमेशा कॉटन फैब्रिक से बने इनरवेयर पहनने को दें।
6. अगर ऊपर बताए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण बच्चे में दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें क्योंकि इनफेक्शन ज्यादा बढ जाने पर यह किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकता है।