योनि

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स्त्री योनि का पास से लिया गया दृश्य

स्त्रियों के जननांग को योनि कहा जाता है। इसके पर्यायवाची शब्द भग, चूत आदि हैं। मारवाडी भाषा मेँ भोसिया, सिसिया, भोल, वारसा, अतार एवं भोसरा कहते है| सामान्य तौर पर "योनि" शब्द का प्रयोग अक्सर भग के लिये किया जाता है, लेकिन जहाँ भग बाहर से दिखाई देने वाली संरचना है वहीं योनि एक विशिष्ट आंतरिक संरचना है।

अनुक्रम

योनि की कामोत्तेजना [संपादित करें]

स्त्रियों को कामोत्तेजना की अनुभूति होते ही उनके शरीर में रक्‍त का बहाव तेजी से होने लगता है। हृदय की धड़कन बढ़ जाती है। चेहरा तमतमा उठता है ।कान, नाक, आंख, स्‍तन, कुचाग्र(स्‍तन की घुडियां),भगोष्‍ठ व योनि की आंतरिक दीवारें फूल जाती हैं। भगांकुर का मुंः भीतर की ओर धंस जाता है । योनि द्वार के अगलबगल स्थित 'बारथोलिन' ग्रंथियों से तरल पदार्थ निकलकर योनि पथ को चिकना कर देता है, जिससे समागम के समय पुरुष लिंग के प्रवेश में आसानी होती है। इस चिकनाई की वजह से ही लिंग का योनि से आसानी से घर्षण होता है और दर्द का अहसास नही होता। योनि पथ का स्राव क्षारीय होता है, जिस कारण पुरुष के स्‍खलन से निकले वीर्य में मौजूद शुक्राणु जीवित, सक्रिय व तैरते रहते हैं। उत्तेजना के कारण गर्भाशय ग्रीवा से कफ जैसा दूधिया व गाढ़ा स्राव भी निकलता है, जो गर्भाशय मुख को चिकना कर देता है। इस चिकनाई के कारण गर्भाशय में शुक्राणु आसानी से प्रवेश कर जाता है। यौन उत्तेजना के समय स्त्रियों के भीतर व गुदाद्वार के पास की पेशियां भी सिकुड़ जाती हैं। ये रुक-रुक कर फैलती-सिकुड़ती रहती हैं। इस संकुचन से स्त्री को असीम आनंद मिलता है। संभोग के समय पुरुष स्त्री के इस संकुचन को आराम से महसूस कर सकता है और वह अपनी स्त्री को इसे और सिकोड़ने को कह सकता है, जिससे दोनों का आनंद दोगुना हो जाता है।

उत्तेजना [संपादित करें]

उत्तेजना पहली अवस्था है जो स्पर्श, दर्शन, श्रवण, आलिंगन, चुंबन, शारीरिक संकेत या अन्य अनुभूति से शुरू होती है। इस अवस्था में कई भावनात्मक और शारीरिक परिवर्तन जैसे योनि स्नेहन या (योनि का बर्थोलिन तथा अन्य ग्रंथियों के स्राव से नहा जाना), जननेन्द्रियों में रक्त-संचार बड़ी तेजी से बढ़ता है। संभोग भी शरीर पर एक प्रकार का भौतिक और भावनात्मक आघात ही है और इसके प्रत्युत्तर में रक्तचाप व हृदयगति बढ़ जाती है और सांस तेजी से चलने लगती है। साथ ही भगशिश्न या Clitoris (यह स्त्रियों में शिश्न का प्रतिरूप माना जाता है ) में रक्त का संचय बढ़ जाने से यह बड़ा दिखाई देने लगता है, योनि सूजन तथा फैलाव के कारण बड़ी और फैल हो जाती है। स्तन बड़े हो जाते हैं और स्तनाग्र तन कर कड़े हो जाते हैं। उपरोक्त में से कई परिवर्तन अतिशीघ्रता से होते हैं जैसे यौन उत्तेजना के 15 सेकण्ड बाद ही रक्त संचय बढ़ने से योनि में पर्याप्त गीलापन आ जाता है और गर्भाशय थोड़ा बड़ा हो कर अपनी स्थिति बदल लेता है। रक्त के संचय से भगोष्ठ, भगशिश्न, योनिमुख आदि की त्वचा में लालिमा आ जाती है। कभी कभी योनि चरम आन्ऩद तक पहुँच जाती है|

उत्तेजना की पराकाष्ठा [संपादित करें]

दूसरी अवस्था उत्तेजना की पराकाष्ठा है । यह उत्तेजना की ही अगली स्थिति है जिसमें योनि, भगशिश्न , भगोष्ठ आदि में रक्त का संचय अधिकतम सीमा पर पहुँच जाता है, जैसे जैसे उत्तेजना बढ़ती जाती है योनि की सूजन तथा फैलाव, हृदयगति, पेशियों का तनाव बढ़ता जाता है। स्तन और बड़े हो जाते हैं, स्तनाग्रों का कड़ापन तनिक और बढ़ जाता है और गर्भाशय ज्यादा अंदर धंस जाता है। लेकिन ये परिवर्तन अपेक्षाकृत धीमी गति से होते हैं।

चरम-आनंद [संपादित करें]

तीसरी अवस्था चरम-आनंद की है जिसमें योनि, उदर और गुदा की पेशियों का क्रमबद्ध लहर की लय में संकुचन होता है और प्रचंड आनंद की अनुभूति होती है। यह अवस्था अतितीव्र पर क्षणिक होती है। कई बार स्त्री को चरम-आनंद की अनुभूति भगशिश्न के उकसाव से होती है। कई स्त्रियों को बिना भगशिश्न को सहलाये चरम-आनंद की अनुभूति होती ही नहीं है। कुछ स्त्रियों को संभोग में गर्भाशय की ग्रीवा पर आघात होने पर गहरे चरम-आनंद की अनुभूति होती है। दूसरी ओर कुछ स्त्रियों को गर्भाशय की ग्रीवा पर आघात अप्रिय लगता है और संभोग के बाद भी एंठन रहती है। पुरुषों की भांति स्त्रियां चरम-आनंद के बाद भी पूर्णतः शिथिल नहीं पड़ती, और यदि उत्तेजना या संभोग जारी रहे तो स्त्रियां एक के बाद दूसरा फिर तीसरा इस तरह कई बार चरम-आनंद प्राप्त करती हैं। पहले चरम-आनंद के बाद अक्सर भगशिश्न की संवेदना और बढ़ जाती है और दबाव या घर्षण से दर्द भी होता है। अधिकाँश स्त्रियाँ चरम आनन्द की स्थिति मेँ अपने ऊपर चढ़े पुरुष की कमर को कसकर पकड़ लेती हैँ चरम आनन्द के पश्चात ही छोड़ती हैँ। पुरूष को चाहिए की वह मजा निकालने के बाद लण्ड को चूत से झटके के साथ बाहर न निकाले।

चरम-आनंद के पश्चात उत्तेजना का समापन [संपादित करें]

चरम-आनंद के पश्चात अंतिम अवस्था समापन है जिसमें योनि, भगशिश्न, भगोष्ट आदि में एकत्रित रक्त वापस लौट जाता है, स्तन व स्तनाग्र सामान्य अवस्था में आ जाते हैं और हृदयगति, रक्तचाप और श्वसन सामान्य हो जाता है। यानी सब कुछ पूर्व अवस्था में आ जाता है।

सभी स्त्रियों में उत्तेजना चक्र का अनुभव अलग-अलग तरीके से होता है, जैसे कुछ स्त्रियां उत्तेजना की अवस्था से बहुत जल्दी चरम-आनंद प्राप्त कर लेती हैं। दूसरी ओर कई स्त्रियां सामान्य अवस्था में आने के पहले कई बार उत्तेजना की पराकाष्ठा और चरम-आनंद की अवस्था में आगे-पीछे होती रहती हैं और कई बार चरम-आनंद प्राप्त करती हैं।

स्त्री-योनि और चरमानंद [संपादित करें]

यौन उत्तेजना का पहला अनुभव मस्तिष्‍क में होता है। इसके बाद सभी तंत्रिकाओं (नर्व्‍स) में खून तेजी से दौड़ने लगता है। इस कारण संभोगरत स्त्री का चेहरा तमतमा उठता है। कान, नाक, आंख, स्‍तन, भगोष्‍ठ व योनि की आंतरिक दीवारें फूल जाती हैं। भगांकुर का मुंड भीतर की ओर धंस जाता है, ह़दय की धड़कने बढ़ जाती हैं। योनि द्वार के अगलबगल स्थित बारथोलिन ग्रंथियों से तरल पदार्थ निकल कर योनि पथ को चिकना बना देता है, जिससे पुरुष लिंग और गहरे प्रवेश कर जाती है। डाक्‍टर किंसे के अनुसार, जब तक पुरुष का लिंग स्‍त्री योनि की गहराई तक प्रवेश नहीं करता, तब तक स्‍त्री को पूर्ण आनंद नहीं मिलता है। उत्‍तेजना के कारण स्‍त्री के गर्भाशय ग्रीवा से कफ जैसा दूधिया गाढ़ा स्राव निकल आता है। गर्भाशय ग्रीवा के स्राव के कारण गर्भाशय मुख चिकना हो जाता है, जिससे पुरुष वीर्य और उसमें मौजूद शुक्राणु आसानी से तैरते हुए उसमें चले जाते हैं।

योनि में संतुष्टि का अनुभव [संपादित करें]

यौन उत्‍तेजना के समय स्‍त्री की योनि के भीतर व गुदाद्वार के पास की पेशियां सिकुड़ जाती हैं। ये रुक-रुक कर फैलती और सिकुड़ती रहती है। यह इस बात का प्रमाण है कि स्‍त्री संभोग में पूरी तरह से संतुष्‍ट हो गई हैं। पुरुष अपने लिंग के ऊपर पेशियों के फैलने सिकुड़ने का अनुभव कर सकता है।

स्त्री योनि में चरमोत्कर्ष की कई अवस्था [संपादित करें]

  • संभोग काल में हर स्त्री की चरम तृप्ति एक समान नहीं होती है। हर स्त्री के चरमोत्कर्ष अनुभव अलग होता है। डॉ विलि, वैंडर व फिशर के अनुसार, चरमतृप्ति या चरमोत्कर्ष प्राप्ति काल में स्त्री की योनि द्वार, भगांकुर, गुदापेशी व गर्भाशय मुख के पास की पेशियाँ तालबद्ध रूप में फैलने व सिकुड़ने लगती है। कभी-कभी ये पांचों एक साथ गतिशील हो जाती है।
  • कोई स्त्री अनुभव करती है कि उसका गर्भाशय एक बार खुलता फिर बंद हो जाता है। इसमें कई स्त्रियों के मुंह से सिसकारी निकलने लगती है।
  • कुछ स्त्रियों में संपूर्ण योनि प्रदेश, गुदा से लेकर नाभि तक में सुरसुराहट की तरंग उठने लगती है। कई बार यह तरंग जांघों तक चली जाती है।

आर्गेज्‍म काल में स्‍त्री की दशा [संपादित करें]

डॉ विलि, वैंडर व फिशर के अनुसार, जिस वक्‍त संभोग में स्‍त्री को आर्गेज्‍म की प्राप्ति होती रहती है उस वक्‍त उसकी आंखें मूंद जाती है, स्‍तन के कुचाग्र फड़कने लगते हैं, कानों के अंदर झनझनाहट उठने लगती है, शरीर में हल्‍कापन महसूस होता है, मन सुख की लहर दौड़ पड़ती है, प्रियतम के प्रति प्रेम से मन भर उठता है और कई बार हल्‍की भूख का भी अहसास होता है। कई स्त्रियों को पेशाब लग जाता है।

कीगल व्यायाम विधि [संपादित करें]

विधि सरल है, स्त्री योनि में अपनी अंगुली डाल कर मूलाधार (Perineum) की मांसपेशियों को उसी तरह धीरे धीरे दस तक गिनते हुए सिकोड़ें मानो मूत्र-त्याग की क्रिया को रोकना हो, फिर तीन गिनने तक मांसपेशियों को सिकोड़ें रहें और उसी तरह धीरे धीरे दस तक गिनते हुए मांसपेशियों को ढीला छोड़ें। इसे दस से पंद्रह बार रोज करें। बाद में इसे किसी भी समय, कहीं भी, किसी भी मुद्रा में किया जा सकता है।

योनि सूखापन के कारण और निवारण [संपादित करें]

लगभग हर औरत योनि उसे मासिक धर्म चक्र और रजोनिवृत्ति के बीच कभी भी सूखापन से ग्रस्त है. योनि सूखापन सामान्य नमी और कोमलता है कि योनि के आसपास के क्षेत्र में मौजूद है की हानि का प्रतीक है.

इस स्थिति में महिलाओं में हार्मोन संबंधी असंतुलन की वजह से कारण हो सकते हैं, और यह एक बड़े पैमाने पर शर्त यह है कि कई महिलाओं को कम से कम उनके जीवन में एक बार चेहरा है. कोई दहशत है, हालांकि, के रूप में वहाँ कई उपाय है कि महिलाओं को इस समस्या को सुधारने ले जा सकते हैं कारण है.

योनि सूखापन पर एक संक्षिप्त अवलोकन

एक महिला के शरीर में श्लेष्म झिल्ली उसकी योनि नम रहती है. यह झिल्ली गर्भाशय के मुंह पर स्थित है. हार्मोन एस्ट्रोजन उचित स्नेहन में मदद करता है और योनि नम और स्वस्थ, यह भी योनि सूखापन को रोकने रहता है. के रूप में एस्ट्रोजेन के स्तर में गिरावट शुरू हो, प्रभाव काफी स्पष्ट रूप से देखा के रूप में योनि सूख जाता है, संभोग के एक दर्दनाक चक्कर बना रही हो सकता है.

योनि सूखापन महिला यौन रोग के अंतर्गत वर्गीकृत किया जा सकता है और यह यौन योनि में स्नेहन के निम्न स्तर के कारण दर्दनाक संभोग करता है. यह महिलाओं में संभोग के एक डर के बारे में लाने के लिए और वे सेक्स से परहेज शुरू करने के लिए दर्द से दूर चले जाओ, इसलिए कम लीबीदो के लिए अग्रणी कर सकते हैं.

इसी तरह, अगर आप या कोई भी दबाव में उदास हैं, तो आप अपनी योनि में सूखापन अनुभव के रूप में यह एक और प्रमुख कारण है सकते हैं. आप मदद के रूप में यह आपकी मदद करेगा आप अपनी समस्याओं के लिए एक समाधान पाने के लिए अपने परामर्शदाता से संपर्क करना चाहिए. यह किसी भी अनसुलझी समस्याओं या परिवार के विवादों के कारण हो सकता है. इस तरह के मामलों में, उचित संचार मदद, क्योंकि संचार की एक सामान्य कमी है लेकिन केवल अपने मौजूदा चिंता करने के लिए पर जोड़ सकते हैं. सूखापन योनि के लक्षण

वहाँ कई योनि सूखापन के साथ शामिल है और इन में शामिल हैं लक्षण हैं:


योनि में खुजली एक सनसनी
जननांग क्षेत्र में जलन उत्तेजना
दर्द या संभोग के दौरान खून बह रहा
पेशाब करने के लिए एक लगातार आवश्यकता
पेट के निचले हिस्से में दबाव की भावना 

सूखापन योनि के कारण

ऊपर उल्लेख किया, योनि सूखापन के रूप में तब होती है जब महिलाओं बूंदों में एस्ट्रोजन का स्तर. बच्चे के जन्म और लगातार सेक्स, एक महिला की योनि loosens के कारण. के रूप में एक महिला पुराना बढ़ता है, उसके हार्मोन का स्तर नीचे जाना है, उसकी योनि पतली दीवारें बनाने और उन्हें और भी अधिक लोचदार बना रही है. योनि सुखाने की मशीन बन जाता है और स्नेहन की प्रक्रिया में काफी समय भी लगता है.

हालांकि हार्मोनल असंतुलन योनि सूखापन के लिए सबसे आम कारक है, कैंसर दवा नियमित रूप से लेने की तरह अन्य कारकों है, Sjogren सिंड्रोम और खमीर संक्रमण (एक autoimmune मुंह और आंख का सूखापन की विशेषता बीमारी) भी योनि सूखापन बढ़ सकता है.

कम एस्ट्रोजन भी गर्भावस्था के कारण कारण हो सकता है, लगातार धूम्रपान, अंडाशय, विकिरण चिकित्सा, रसायन चिकित्सा और हार्मोन थेरेपी के सर्जिकल हटाने. सूखापन योनि निवारण

वहाँ विभिन्न सुरक्षित और सुरक्षित योनि सूखापन के लिए घरेलू उपचार कर रहे हैं. उपचार के कुछ ही हफ्तों के काम करने के लिए ले, लेकिन आप तरीकों कि प्रदान की जा रही है में विश्वास करना चाहिए सकता है और काफी मरीज के लिए अपने खोज पर जारी जब तक आप परिणामों को देखने जाना चाहिए.

1. पानी का खूब सेवन करें

जलयोजन बहुत महत्वपूर्ण है. एक औरत प्रति दिन पानी की कम से कम 8-10 गिलास का उपभोग करना चाहिए.यह कदम बहुत सरल ध्वनि लेकिन परिणाम बहुत प्रभावी हो जाएगा सकता है. रखो अपने आप को हर समय हाइड्रेटेड, और कुछ ग्लूकोज में अपने नियमित रूप से पानी ऊपर मसाला करने के लिए फेंक देते हैं.

2. आपके परिवेश में रसायनों की जाँच के लिए

अपने साबुन, कपड़े धोने, उत्पादों और शैंपू में रासायनिक घटक की जाँच करें. कुछ इत्र और अन्य सौंदर्य प्रसाधनों में पाया रसायन बलगम ऊतकों कि आपकी योनि अस्तर में मौजूद हैं के लिए हानिकारक हो सकता है. यह उत्पाद है कि आप हानिकारक परेशानी से बचाने के लिए लेने के लिए सुरक्षित है.

3. आहार का पालन करें एक संतुलित

आपके शरीर के सभी का समर्थन है कि यह ठीक से काम करने के लिए और अपने हार्मोन के स्तर में एक संतुलन बनाए रखने की जरूरत मिलनी चाहिए. कम वसा वाले आहार है कि कई महिलाओं के शरीर को भूखा पालन करें, और ऐसे आहार आवश्यक पोषक तत्वों है कि करने के लिए सेक्स हार्मोन बनाने के लिए आवश्यक हैं प्राप्त करने से शरीर रुक जाती है. उदाहरण के लिए, कोलेस्ट्रॉल योनि स्नेहन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. महिलाओं को कोलेस्ट्रॉल अमीर उत्पादों से बचने के लिए जाते हैं और शरीर स्नेहन की कमी से ग्रस्त है.

4. चिकनाई का प्रयोग करें एक व्यक्तिगत

कुछ महिलाओं को व्यक्ति स्नेहक का प्रयोग कर अपने अपेक्षित परिणाम प्राप्त. इन स्नेहक उसकी योनि नमी बहाल करने में एक महिला की मदद और भी जलयोजन, endocrine समर्थन और पोषण में सुधार होगा. जैसे स्नेहक व्यापक रूप से बाजार में और दाएँ (एक है कि विटामिन ई है के लिए जाना) चिकनाई तुम वापस अपने सेक्स जीवन में आनन्द का तत्व ला सकता है चुनने के द्वारा उपलब्ध हैं.

5. खनिज की आपूर्ति करता है के लिए ऑप्ट

एक अच्छा आहार बनाए रखने के लिए आवश्यक है, लेकिन वहाँ कुछ पोषक तत्वों है कि यह भी एक अच्छा आहार आप के साथ प्रदान नहीं कर सकते हैं. इसके अलावा, अगर आप एक शाकाहारी, आपके शरीर हो सकता है कमी कुछ आवश्यक विटामिन और खनिज कि अपने खाद्य पदार्थों में निम्न स्तर में मौजूद हैं. खनिज की आपूर्ति करता है के लिए चयन आप इस संबंध में मदद कर सकता है.

इन्हें भी देखें [संपादित करें]

वाह्य सूत्र [संपादित करें]

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