भूर्ज

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रजत भूर्ज

भूर्ज को अंग्रेजी में बर्च (Birch) कहते हैं। यह बेटुलेसिई (Betulaceae) कुल का पेड़ है। इसके अधिकाश पेड़ मध्यम विस्तार के होते हैं। कुछ तो क्षुप (Shrub) किस्म के भी होते हैं। उत्तर अमरीका, यूरोप, उत्तर एशिया और हिमालय में 1,400 फुट से अधिक ऊँचाई पर ये साधारणतया पाए जाते हैं। इनकी पत्तियॉँ क्रचक्री (serrat) तथा पर्णपाती (deciduous) होती हैं। एक ही पेड़ पर नर और मादा के कैटकिन (catkins) होते हैं। नर कैटकिन शरत्‌ (पतझड़) ऋतु में और मादा कैटकिन वसंत ऋतु में प्रकट होते हैं। इनके फल छोटे छोटे और पंखदार होते हैं। वृक्ष की छाल कागज के सदृश उखड़ती है, जिसे 'भोजपत्र' कहते हैं। एक समय भारत में भोजपत्र पर ही पुस्तकें लिखी जाती थी। भोजपत्र सामान्य कागज से अधिक टिकाऊ समझा जाता है। आज भी भोजपत्र पर तांत्रिक मंत्र और कवचादि लिखे जाते हैं। ऐसे मंत्र और कवच जल्द फलदेनेवाले समझे जाते हैं। पेड़ की भीतरी छाल से जो भोजपत्र प्राप्त होता है। वह लिखने के लिये अच्छा समझा जाता है। कुछ विशिष्ट धार्मिक अवसरों पर लोग इसका वस्त्र भी धारण करते हैं। भूर्ज के पेड़ कई प्रकार के होते हैं। इनकी निम्नलिखित किस्में अधिक महत्व की है:

कानू भूर्ज[संपादित करें]

इसका वैज्ञानिक नाम बेटुला पापायरिफेरा (Betula papyrifera) है। इसको कभी कभी श्वेत भूर्ज भी कहते हैं, क्योंकि इसकी छाल मलाई सी सफेद रंग की होती है। इसको मंत्रभूर्ज भी कहते हैं, क्योकि इसकी छाल इतनी पतली होती है कि उसपर सुभीते से लिखा जा सकता है। इस भूर्ज की छाल से प्याले, तश्तरियाँ, आभूषण, छोटी छोटी टोकरियाँश् आदि बनाई जाती हैं। इसकी लकड़ी से लुगदी और जूते के साँचे या फरमें भी बनते हैं। लकड़ी जलावन के काम में भी आती है। हिमालय क्षेत्रों के अतिरिक्त यह कैनाडा, उत्तरी अमरीका और उत्तरी यूरोप में उपजता है।

पीत भूर्ज[संपादित करें]

इसको कभी रजत भूर्ज भी कहते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम बी0 ल्यूटिया (B. Lutea) है। पेड़ के वयस्क होने पर इसकी छाल का रंग पीलापन लिए हुए धुँधले धूसर रंग का होता है। यह मासाचुसेट्स, फ्लोरिडा और टेक्सस में अधिक पाया जाता है। इसकी लकड़ी मजबूत होती है और फर्निचर, खेती के औजारों तथा अन्य घरेलू कामों के लिये अच्छी समझी जाती है।

रक्त भूर्ज[संपादित करें]

इसे कहीं कहीं नदी भूर्ज भी कहते हैं, क्योकि यह नदी, पोखरों तथा दलदली भूमि के तटों पर बहुधा उगता हुआ पाया जाता है। इसके छोटे पेड़ों की छाल का रंग गुलाबी होता है। पीछे वह काला हो जाता है। इसके पेड़ 50 से 60 फुट तक ऊंचे होते हें। यह दक्षिण अमरीका में विशेष रूप से पाया जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम ब0 निग्रा (B. nigra) हैं।

कृष्ण भूर्ज[संपादित करें]

इसका वैज्ञानिक नाम बी0 लेंटा (B. Lenta) है। इसे चेरी या मीठा भूर्ज भी कहते हैं। यह 60 से 80 फुट तक ऊँचा होता है। इसके शीर्ष सुंदर होते हैं। इसकी शाखाएँ पतली और टहनियाँ कोमल होती हैं। इसकी लकड़ी श्याम रंग की तथा कठोर होती है और दाने गठे हुए होते हैं। फर्निचर और घर के अंदर की सजावट के सामानों के निर्माण के लिये इसकी लकड़ी बहुमूल्य समझी जाती है।

धूसर भूर्ज[संपादित करें]

इसका वैज्ञानिक नाम बी0 पोपुलिफोलिया (B. populifolia) है। इसका पेड़ छोटा, 40 फुट से अधिक ऊँचा नहीं होता है। अमरीका के अनेक राज्यों में यह पाया जाता है। इसकी छाल घूसर सफेद रंग की होती है। छाल कड़ी होती है और उसके स्तर अधिक दृढ़ता से चिपके रहते हें। इससे अनेक सांचे, फिरकी और अन्य सामान बनते हैं। यह ईधंन में भी काम आता है। इसकी लुगदी भी बनती हे। (फूलदेव सहाय वर्मा)

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

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