बशोली

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बशोली
—  नगर  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य जम्मू और कश्मीर
ज़िला कठुआ
जनसंख्या 5,865 (2001 के अनुसार )
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)

• 460 मीटर (1,509 फी॰)

Erioll world.svgनिर्देशांक: 32°30′N 75°49′E / 32.50°N 75.82°E / 32.50; 75.82 बशोली या बसोहली भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर के जिले कठुआ में स्थित एक नगर या कस्बा है। यह स्थान अपनी एक विशेष प्रकार की चित्रकला जिसे बशोली चित्रकला कहते हैं, के लिए प्रसिद्ध है।

भूगोल[संपादित करें]

बशोली 32°30′N 75°49′E / 32.50°N 75.82°E / 32.50; 75.82[1]निर्देशांकों पर स्थित है। इसकी औसत ऊँचाई 460 मीटर (1509 फुट) है।

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

भारत की 2001 की जनगणना के अनुसार[2] बशोली की जनसंख्या 5865 है, जिसमें पुरुषों का प्रतिशत 53 और महिलाओं का प्रतिशत 47 है। बशोली की साक्षरता दर 77% है, जो कि राष्ट्रीय औसत 59.5% से अधिक है। कस्बे की 12% जनसंख्या, 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की है।

बशोली चित्रकला[संपादित करें]

गणेश (ई. 1730).[3]

बशोली अपनी विशेष प्रकार की चित्रकारी, बशोली चित्रकला के लिए प्रसिद्ध है। इसे पहाड़ी चित्रकला के प्रथम रूप के रूप में स्वीकार किया जाता है जो अंतत: अठारहवीं सदी के मध्य में कांगड़ा चित्रकला के रूप में विकसित हुई।[4]

इतिहास[संपादित करें]

अपनी कलात्मक श्रेष्ठता और राजसी संरक्षण द्वारा पोषित बशोली चित्रकला को आज चित्रकला की एक जोरदार, साहसिक, कल्पनाशील, अपरंपरागत और कलात्मक रूप से धनी शैली में शुमार किया जाता है। सत्रहवीं और अठाहरवीं सदी की शुरुआत में प्राथमिक रंगों का अधिक प्रयोग और विशेष प्रकार के चेहरे इस शैली की चित्रकला का प्रमुख गुण था, जो पश्चिमी हिमालय की तलहटी में यानि जम्मू और पंजाब में अधिक प्रचलित था। इस शैली के शुरुआती चित्र राजा किरपाल पाल (1678-1693) के समय के हैं। [5].

बशोली से शुरु होकर चित्रकला की यह शैली मनकोट, नूरपुर, कुल्लू, मंडी, सुकेत, बिलासपुर, नालागढ़, चंबा, कांगड़ा और गुलेर के पहाड़ी राज्यों तक फैल गयी। बशोली चित्रकला का पहला उल्लेख 1921 में प्रकाशित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की वार्षिक रिपोर्ट में है।

चित्रदीर्घा[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. Falling Rain Genomics, Inc - Bashohli
  2. "भारत की जनगणना २००१: २००१ की जनगणना के आँकड़े, महानगर, नगर और ग्राम सहित (अनंतिम)". भारतीय जनगणना आयोग. http://web.archive.org/web/20040616075334/www.censusindia.net/results/town.php?stad=A&state5=999. अभिगमन तिथि: 2007-09-03. 
  3. राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली। कार्य के विवरण हेतु देखें: मार्टिन-डुबोस्ट (1997), पृ. 73, जिसके अनुसार: "गणेश अपना कमल फेंकने वाले हैं। बशोली लघुचित्र, ईसवी 1730। राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली। पूरे लाल रंग के शरीर पर नारंगी धोती पहने हैं। उनके छोटे से मुकुट के तीन कोनों पर कमल की कली सुशोभित हैं। गणेश ने अपने दोनो दाएं हाथों में से एक में माला और दूसरे में तीन मोदकों का पात्र उठा रखा है, जबकि एक चौथा मोदक उन्होनें अपनी सूंड से उठाया हुआ है और जिसे वो चखने ही वाले हैं। अपने बाएं दोनो हाथों मे से एक में एक कमल पुष्प और दूसरे में एक परशु उठा रखा है और इस परशु का हत्था उनके स्कंध पर झुका है। मुदगलपुराण (सप्तम,70), के अनुसार अहंकार के राक्षस ममासुर जिसने उन पर आक्रमण किया था, के वध के लिए, गणेश विघ्नराज ने उस पर कमल फेंका था। उस दैविक पुष्प की गंध से विचलित होकर ममासुर ने गणेश के समक्ष समर्पण किया।"
  4. Pahari centres Arts of India: Architecture, Sculpture, Painting, Music, Dance and Handicraft, by Krishna Chaitanya. Published by Abhinav Publications, 1987. ISBN 81-7017-209-8. Page 62.
  5. A Review of Basohli Style in Indian Painting, Chandramani Singh, Kailash - Journal of Himalayan Studies vol 2, Number 1&2, 1974 [1]