प्राकृतिक चिकित्सा

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

प्राकृतिक चिकित्सा (नेचुरोपैथी / naturopathy) एक चिकित्सा-दर्शन है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] इसके अन्तर्गत रोगों का उपचार व स्वास्थ्य-लाभ का आधार है - 'रोगाणुओं से लडने की शरीर की स्वाभाविक शक्ति' ।[कृपया उद्धरण जोड़ें] प्राकृतिक चिकित्सा के अन्तर्गत अनेक पद्धतियां हैं जैसे - जल चिकित्सा, होमियोपैथी, सूर्य चिकित्सा, अक्यूपंचर, एक्यूप्रेसर, मृदा चिकित्सा आदि। प्राकृतिक चिकित्सा के प्रचलन में विश्व की कई चिकित्सा पद्धतियों का योगदान है; जैसे भारत का आयुर्वेद तथा यूरोप का 'नेचर क्योर' ।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली चिकित्सा की एक रचनात्मक विधि है, जिसका लक्ष्य प्रकृति में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध तत्त्वों के उचित इस्तेमाल द्वारा रोग का मूल कारण समाप्त करना है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] यह न केवल एक चिकित्सा पद्धति है बल्कि मानव शरीर में उपस्थित आंतरिक महत्त्वपूर्ण शक्तियों या प्राकृतिक तत्त्वों के अनुरूप एक जीवन-शैली है। यह जीवन कला तथा विज्ञान में एक संपूर्ण क्रांति है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

इस प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति में प्राकृतिक भोजन, विशेषकर ताजे फल तथा कच्ची व हलकी पकी सब्जियाँ विभिन्न बीमारियों के इलाज में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

प्राकृतिक चिकित्सा अपने आप में प्राकृतिक चिकित्सा प्रकृति की सहायता स्वाभाविक रूप से ठीक किया जा करने के लिए इसका मतलब है. प्रकृति जो अपने आप में एक डॉक्टर है और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र में बीमारियों और अन्य गड़बड़ी के सभी प्रकार के होते हैं इलाज कर सकते हैं कि इसका मतलब है. हमारे वातावरण में परिवर्तन जीव प्रकृति too.So पर असर करते रहने से परिवर्तन के रूप में ही सभी जीवित जीव को प्रभावित करता है, इन परिवर्तनों को इसके लिए समस्याओं और समाधान पैदा कर सकते हैं. यह इस सनातन को बढ़ावा देने के साथ पदोन्नत किया गया था Prakritik चिकित्सा (नेचुरोपैथी), योग, आयुर्वेद, ज्योतिष आदि जैसे प्राचीन भारतीय विज्ञान का समूह है हिंदू Dhrama (हिंदू बुद्ध जैन परंपराओं में प्रयुक्त) समय बीतने के द्वारा भूल, अब पहल स्थापना फिर से शुरू कर दिया है संरक्षण एवं Prakritik चिकित्सा (नेचुरोपैथी) के अनुसंधान में एक प्रसिद्ध नाम डॉ है Viney पुष्करणा 'प्राकृतिक चिकित्सा के लिए पुष्करणा रिसर्च एसोसिएशन' के बैनर तले

प्राकृतिक चिकित्सा निर्धन व्यक्तियों एवं गरीब देशों के लिये विशेष रूप से वरदान है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

प्राकृतिक चिकित्सा के मूलभूत सिद्धान्त[संपादित करें]

प्राकृतिक चिकित्सक निम्नलिखित छः मूलभूत सिद्धान्तों का अनुसरण करते हैं-

  • (१) कोई हानि नहीं करना
  • (२) रोग के कारण का इलाज करना (न कि लक्षण का)
  • (३) स्वस्थ जीवन जीने तथा रोग से बचने की शिक्षा देना (रोगी-शिक्षा का महत्व)
  • (४) व्यक्तिगत इलाज के द्वारा सम्पूर्ण शरीर को रोगमुक्त करना (हर व्यक्ति अलग है)
  • (५) चिकित्सा के बजाय रोग की रोकथाम करने पर विशेष बल देना
  • (६) शरीर की जीवनी शक्ति (रोगों से लड़ने की क्षमता) को मजबूत बनाना (शरीर ही रोगों को दूर करता है, दवा नहीं)

व्यवहार में प्राकृतिक चिकित्सा[संपादित करें]

प्राकृतिक चिकित्सा न केवल उपचार की पद्धति है, अपितु यह एक जीवन पद्धति है ।[कृपया उद्धरण जोड़ें] इसे बहुधा 'औषधिविहीन उपचार पद्धति' कहा जाता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] यह मुख्य रूप से प्रकृति के सामान्य नियमों के पालन पर आधारित है। जहॉ तक मौलिक सिद्धांतो का प्रश्‍न है इस पद्धति का आयुर्वेद से निकटतम सम्बन्ध है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

प्राकृतिक चिकित्सा के समर्थक खान-पान एवं रहन सहन की आदतों, शुद्धि कर्म, जल चिकित्सा, ठण्डी पट्टी, मिटटी की पट्टी, विविध प्रकार के स्नान, मालिश्‍ा तथा अनेक नई प्रकार की चिकित्सा विधाओं पर विश्‍ोष बल देते है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] प्राकृतिक चिकित्सक पोषण चिकित्सा, भौतिक चिकित्सा, वानस्पतिक चिकित्सा, आयुर्वेद आदि पौर्वात्य चिकित्सा, होमियोपैथी, छोटी-मोटी शल्यक्रिया, मनोचिकित्सा आदि को प्राथमिकता देते हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

प्राकृतिक चिकित्सा के व्यवहार में आने वाले कुछ कर्म नीचे वर्णित हैं[कृपया उद्धरण जोड़ें]-

मिट्टी चिकित्सा[संपादित करें]

मिट्टी जिसमें पृथ्वी तत्व की प्रधानता है जो कि शरीर के विकारों विजातीय पदार्थो को निकाल बाहर करती है। यह कीटाणु नाश्‍ाक है जिसे हम एक महानतम औषधि कह सकते है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

मिट्टी की पट्टी का प्रयोगः[संपादित करें]

उदर विकार, विबंध, मधुमेह, शि‍र दर्द, उच्च रक्त चाप ज्वर, चर्मविकार आदि रोगों में किया जाता है। पीडित अंगों के अनुसार अलग अलग मिट्टी की पट्टी बनायी जाती है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

वस्ति (एनिमा)[संपादित करें]

उपचार के पूर्व इसका प्रयोग किया जाता जिससे कोष्ट शुद्धि हो। रोगानुसार शुद्ध जल नीबू जल, तक्त, निम्ब क्वाथ का प्रयोग किया जाता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] वस्ति(enima) वह क्रिया है, जिसमें गुदामार्ग, मूत्रमार्ग, अपत्यमार्ग, व्रण मुख आदि से औषधि युक्त विभिन्न द्रव पदार्थों को शरीर में प्रवेश कराया जाता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

जल चिकित्साः[संपादित करें]

इसके अन्तर्गत उष्ण टावल से स्वेदन, कटि स्नान, टब स्नान, फुट बाथ, परिषेक, वाष्प स्नान, कुन्जल, नेति आदि का प्रयोग वात जन्य रोग पक्षाद्घात राधृसी, शोध, उदर रोग, प्रतिश्‍याय, अम्लपित आदि रोगो में किया जाता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

सूर्य रश्मि चिकित्सा[संपादित करें]

सूर्य के प्रकाश के सात रंगो के द्वारा चिकित्सा की जाती है।यह चिककित्‍सा शरीर मे उष्‍णता बढाता है स्‍नायुओं को उत्‍तेजित करना वात रोग, कफज, ज्‍वर, श्‍वास, कास, आमवात पक्षाधात, ह्रदयरोग, उदरमूल, मेढोरोग वात जन्‍यरोग, शोध चर्मविकार, पित्‍तजन्‍य रोगों में प्रभावी हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

उपवास[संपादित करें]

सभी पेट के रोग, श्वास, आमवात, सन्धिवात, त्वक विकार, मेदो वृद्धि आदि में विश्‍ोष उपयोग होता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

प्राकृतिक चिकित्सा का इतिहास[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

वाह्य सूत्र[संपादित करें]