प्रमस्तिष्क अंगघात

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सेरेब्रल पाल्सी (प्रमस्तिष्क पक्षाघात)
वर्गीकरण व बाहरी संसाधन
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मोटर ट्रैक्ट.
आईसीडी-१० G80.
आईसीडी- 343
ओ.एम.आई.एम 603513 605388
रोग डाटाबेस 2232
ई-मेडिसिन neuro/533  pmr/24
एमईएसएच D002547

प्रमस्तिष्क अंगघात या प्रमस्तिष्क पक्षाघात या सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy) एक प्रमस्तिष्क संबंधी विकार है। यह विकार विकसित होते मस्तिष्क के मोटर कंट्रोल सेंटर (संचलन नियंत्रण केन्द्र) मे हुई किसी क्षति के कारण होता है। यह बीमारी मुख्यत: गर्भधारण (७५ प्रतिशत), बच्चे के जन्म के समय (लगभग ५ प्रतिशत) और तीन वर्ष तक की आयु के बच्चों को होती है। सेरेब्रल पाल्सी पर अभी शोध चल रहा है, क्योंकि वर्तमान उपलब्ध शोध सिर्फ बाल्य (पीडियाट्रिक) रोगियों पर केन्द्रित है। इस बीमारी की वजह से संचार में समस्या, संवेदना, पूर्व धारणा, वस्तुओं को पहचानना और अन्य व्यवहारिक समस्याएं आती है।

संभावित कारण[संपादित करें]

इस बीमारी के बारे में पहली बार अंग्रेजी सर्जन विलियम लिटिल ने १८६० में पता लगाया था। इस रोग के मुख्य कारणो में बच्चे के मस्तिष्क के विकास में व्यवधान आने या मस्तिष्क में चोट होते हैं। कुछ अन्य कारण इस प्रकार से हैं:[1]

ये रोग कई प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है:[2]

  • विकार मे जुड़े अंगो कि संख्या से वर्गीकरण:-
    • क्वाड्रीप्लेगीक
    • डायप्लेगीक
    • हेमीप्लेगीक
    • मोनोप्लेगीक
  • हलचल कि विकृती से वर्गीकरण:-
    • संस्तंभता से पीड़ित
    • मिश्र प्रकार

विभिन्न प्रकार और उपचार[संपादित करें]

वर्तमान में इस बीमारी की कोई कारगर दवा बनी नहीं है। वर्तमान चिकित्सा एवं उपचार अभी इस रोग और इसके दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट) के बारे में कोई ठोस परिणाम नहीं दे पाए हैं। सेरेब्रल पाल्सी को तीन भागों में बांटकर देखा जा सकता है।

  • पहला स्पास्टिक,
  • दूसरा एटॉक्सिक और
  • तीसरा एथिऑइड।

स्पास्टिक सेरेब्रल पाल्सी सबसे आम है। लगभग ७० से ८० प्रतिशत मामलों में यही होती है। फिर भी इलाहाबाद के एक डॉ. जितेन्द्र कुमार जैन एवं उनकी टीम ने ओएसएससीएस नामक एक थेरैपी से पूर्वोत्तर भारत के एक बच्चे पर प्रयोग पहली बार किया। उनके अनुसार इससे बच्चे न सिर्फ अपने पैरों पर खड़े हो पायेंगे, बल्कि दौड़ भी पायेंगे।[3]

एटॉक्सिक सेरेब्रल पाल्सी की समस्या लगभग दस प्रतिशत लोगों में देखने में आती है। भारत में लगभग २५ लाख बच्चे इस समस्या के शिकार हैं।[4] इस स्थिति में व्यक्ति को लिखने, टंकण (टाइप करने) में समस्या होती है। इसके अलावा इस बीमारी में चलते समय व्यक्ति को संतुलन बनाने में काफी दिक्कत आती है। साथ ही किसी व्यक्ति की दृश्य और श्रवण शक्ति पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। एथिऑइड की समस्या में व्यक्ति को सीधा खड़ा होने, बैठने में परेशानी होती है। साथ ही रोगी किसी चीज को सही तरीके से पकड़ नहीं पाता। उदाहरण के तौर पर वह टूथब्रश, पेंसिल को भी ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाता है।

संदर्भ[संपादित करें]

  1. सेरेब्रल पाल्सी काबू में आएगा यह मर्ज
  2. सेरेबरल पाल्सी का विस्तृत ब्यौरेवार लेख
  3. सेरेब्रल पाल्सी : अधिक उम्र के बच्चे खड़े हो सकेंगे पैरों पर
  4. संभव है पोलियों का जड़ से इलाज

बाहरी सूत्र[संपादित करें]