तापमापी
तापमापी या थर्मामीटर वह युक्ति है जो ताप या ताप की प्रवणता को मापने के काम आती है। तापमापी अनेक सिद्धान्तों के आधार पर निर्मित किये जा सकते हैं। द्रवों का आयतन ताप ग्रहण कर बढ़ जाता है तथा आयतन में होने वाली यह वृद्धि तापक्रम के समानुपाती होता है। साधारण थर्मामीटर इसी सिद्धान्त पर काम करते हैं।
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[संपादित करें] प्राथमिक और द्वितीयक तापमापी
अन्तर्निहित थर्मोडाइनेमिक नियमों और राशियों के भौतिक आधार की जानकारी के स्तर के अनुसार तापमापी या थर्मामीटर को दो अलग समूहों में वर्गीकृत किया जा सकता है। प्राथमिक तापमापी के लिए, पदार्थ की मापित विशेषता इतनी भली प्रकार ज्ञात होती है कि तापमान को बिना किसी अज्ञात परिमाण के परिकलित किया जा सकता है। इसके उदाहरण वे तापमापी हैं जो एक गैस की अवस्था के समीकरण पर, एक गैस में ध्वनि के वेग पर, थर्मल शोर (जॉनसन-न्यिकिस्ट शोर को देखें) वोल्टेज या एक विद्युत प्रतिरोधक के प्रवाह (धारा) पर और एक चुंबकीय क्षेत्र में कुछ रेडियोधर्मी नाभिक के गामा किरण उत्सर्जन की कोणीय असमदिग्वर्ती होने की दशा पर आधारित होते हैं। प्राथमिक तापमापी अपेक्षाकृत जटिल होते हैं।
[संपादित करें] तापमान
[संपादित करें] विकास
[संपादित करें] मापांकन (कैलीब्रेशन)
[संपादित करें] यथार्थता, विशुद्धता, और पुनरुत्पादकता
[संपादित करें] प्रयोग
[संपादित करें] तापमापी के अन्य प्रकार
[संपादित करें] इसे भी देखें
[संपादित करें] संदर्भ
[संपादित करें] अधिक जानकारी हेतु
[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ
- History of Temperature and Thermometry
- The Chemical Educator, Vol. 5, No. 2 (2000) The Thermometer—From The Feeling To The Instrument
--दिवाकर मणि [Diwakar Mani] १२:२१, २ फ़रवरी २०११ (UTC)