जॉयस्टिक

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जॉयस्टिक तत्व: #1 स्टिक, #2 बेस; #3 उत्प्रेरक; #4 अतिरिक्त बटन, #5 ऑटोफायर स्विच, #6 थ्रौटल; #7 हैट स्विच (पीओवी (POV) हैट); #8 सक्शन कप

जॉयस्टिक एक इनपुट उपकरण होता है जो किसी धुरी पर घूमने वाली एक छड़ी से बना होता है, जो अपने कोण या दिशा की सूचना उस उपकरण को देती है, जो उसके नियंत्रण में होता है। जॉयस्टिकों का प्रयोग अक्सर वीडियो गेमों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है और आम तौर पर उसमें एक या अधिक दबाए जाने वाले बटन होते हैं, जिनकी स्थिति को कम्प्यूटर द्वारा भी पढ़ा जा सकता है। आधुनिक वीडियो गेम कन्सोलों पर इस्तेमाल किए जाने वाले जॉयस्टिक का एक लोकप्रिय प्रकार एनालॉग छड़ी है।

जॉयस्टिक कई विमानों की कॉकपिट में प्रमुख उड़ान नियंत्रक रहा है, विशेष रूप से तेजी से उड़ने वाले लड़ाकू विमानों में केंद्रीय छड़ी या बगल की छड़ी के रूप में.

जॉयस्टिकों का इस्तेमाल मशीनों, जैसे क्रेनों, ट्रकों, पानी के भीतर मानव - रहित वाहनों, पहियेदार कुर्सियों, निगरानी कैमरों और शून्य मोड़क त्रिज्या बगीचे की घास काटने की मशीनों के नियंत्रण के लिए किया जाता है। उंगली-संचालित लघु जॉयस्टिकों को छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे मोबाइल फोनों के लिए इनपुट उपकरणों के रूप में अपनाया गया है।

इतिहास[संपादित करें]

एक परियोजना मिथुन जॉयस्टिक की तरह हाथ नियंत्रक, 1962
अटारी मानक संबंधक के कंप्यूटर पोर्ट व्यू: #1 ऊपर, #2 नीचे, #3 बाएं; #4 दायें, #5 (पॉट वाई); #6 फायर बटन, #7 +5वी डीसी; #8 जमीन, #9 (पॉट एक्स)

जॉयस्टिकों की उत्पत्ति विमानों के एलिरॉनों और एलीवेटरों के नियंत्रकों के रूप में हुई और पहले ऐसे उपकरण का प्रयोग लुइस ब्लेरियॉट के 1908 के ब्लेरियॉट अष्टम विमान की पूंछ पर या नियंत्रण सतह के लिए पैर से चलाए जाने वाले रूडर बार के संयोजन में किया गया था।

जॉयस्टिक नाम की उत्पत्ति प्रारंभिक 20 वीं सदी के फ्रांसीसी पायलट रॉबर्ट एस्नाल्ट-पेल्टेरी से हुई समझी जाती है।[1] उसके साथी पायलटों, रॉबर्ट लोरेन, जेम्स हेनरी जॉयस तथा ए. ई. जॉर्ज भी इसका दावा करने की स्पर्धा में हैं। लोरेन को "जॉयस्टिक" शब्द की प्रविष्टि 1909 में अपनी डायरी में करने का श्रेय दिया जाता है, जब ब्लेरियॉट के विद्यालय में उड़ना सीखने के लिए वह पऊ गया था। जॉर्ज एक अग्रणी उड़ाका था जिसने 1910 में इंगलैंड के न्यूकैसल में अपने सहयोगी जॉबलिंग के साथ मिलकर एक बाईप्लेन बनाकर उसमें उड़ान भरी थी। उसने कथित रूप से "जॉर्ज स्टिक" का आविष्कार किया था जो जॉयस्टिक के नाम से अधिक लोकप्रिय हुआ। जॉर्ज और जॉबलिंग विमान नियंत्रण स्तंभ न्यूकैसल ऑन टाइन, इंग्लैंड में डिस्कवरी संग्रहालय के संग्रह में मौजूद है। जॉयस्टिक प्रारंभिक विमानों में मौजूद थे, हालांकि उनके यांत्रिक मूल अनिश्चित हैं।[2] वास्तव में "जॉयस्टिक" नाम देने का श्रेय लोरेन को दिया जा सकता है, क्यौंकि उसने ही सबसे पहली बार इस शब्द का प्रयोग किया था, हालांकि यह सुनिश्चित है कि उसने इस उपकरण का आविष्कार नहीं किया था।

बिजली से चलने वाले सर्वप्रथम 2-अक्षीय जॉयस्टिक का आविष्कार शायद जर्मनी में 1944 के आसपास किया गया। इस उपकरण का विकास 'जर्मनों की केह्ल रेडियो नियंत्रण ट्रांसमीटर प्रणाली के एक भाग के रूप में किया गया था, जिसका प्रयोग कतिपय जर्मन बमवर्षक विमानों में समुद्री और अन्य लक्ष्यों के विरूद्ध रॉकेट से लैस जहाज-विरोधी मिसाइल हैनशेल एचएस 293 और बिजली के बिना चलने वाली अग्रणी परिशुद्धता-निर्देशित युद्ध-सामग्री, फ्रिट्ज़-एक्स, दोनों को निर्देशित करने के लिए किया जाता था। यहां, केह्ल ट्रांसमीटर के जॉयस्टिक का प्रयोग एक संचालक द्वारा मिसाइल को अपने लक्ष्य की ओर बढ़ाने के लिए किया गया था। इस जॉयस्टिक में एनालॉग ग्राहकों की जगह चालू-बंद करने के स्विच लगे थे। एचएस 293 और फ्रिट्ज-एक्स दोनों ही स्ट्राबर्ग रेडियो रिसीवरों का इस्तेमाल केह्ल के नियंत्रण-संकेतों को हथियार सामग्री के नियंत्रक सतहों पर भेजने के लिए करते थे।

इस आविष्कार का चयन पीनेमुंडे में हीरेस्वरसचसैनस्टाल्ट पर इकट्ठे हुए वैज्ञानिकों की टीम में किया गया था। यहां जर्मन रॉकेट कार्यक्रम पर टीम का एक हिस्सा वासरफाल मिसाइल का विकास कर रहा था, जो पहली जमीन से हवा में मार करने वाले वी-2 रॉकेट का एक प्रकार था। वासरफाल स्टीयरिंग उपकरण विद्युत संकेतों को रेडियो संकेतों में बदल देता था और उन्हें मिसाइल की ओर संचरित करता था।

1960 के दशक में जॉयस्टिक का उपयोग व्यापक रूप से फिल क्राफ्ट (1964) द्वारा बनाई गई रेडियो-नियंत्रित मॉडल विमान प्रणालियों जैसे, क्विक फ्लाई में होने लगा. अब बंद हो चुकी क्राफ्ट सिस्टम्स फर्म अंततः कंप्यूटर उद्योग और अन्य उपयोगकर्ताओं के लिए जॉयस्टिकों की एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता थी। रेडियो-नियंत्रित विमान उद्योग के बाहर जॉयस्टिक का इस्तेमाल पहली बार परमोबिल (1963) जैसी विद्युत-संचालित पहियेदार कुर्सी के नियंत्रण के लिए हुआ। उस अवधि के दौरान नासा ने अपोलो मिशन के भाग के रूप में नियंत्रण उपकरणों के रूप में जॉयस्टिकों का प्रयोग किया। उदाहरण के लिए, चंद्र लैंडर परीक्षण मॉडलों को एक जॉयस्टिक के द्वारा नियंत्रित किया गया था।

कई आधुनिक विमानसेवाओं के विमानों में, उदाहरण के लिए,1980 के दशक से विकसित सभी एयरबस विमानों में, उड़ान नियंत्रण के लिए जॉयस्टिक को एक "साइडस्टिक" के रूप में एक नया जीवन प्राप्त हुआ ---- एक गेमों के जॉयस्टिक जैसे ही नियंत्रक, लेकिन जिसका प्रयोग उड़ान को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है, ने परम्परागत योक का स्थान ले लिया है। साइडस्टिक वजन कम करता है, कॉकपिट में सक्रियता और दर्शनीयता में सुधार लाता है और किसी दुर्घटना में पारंपरिक "नियंत्रक योक" की अपेक्षा अधिक सुरक्षित हो सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक खेल[संपादित करें]

राल्फ एफ. बेअर, टीवी वीडियो गेमों और 1972 में निर्गमित मैगनावॉक्स ओडिसी कनसोल के आविष्कारक ने 1967 में पहला विडियो गेम जॉयस्टिक बनाया. वे एक पर्दे पर प्रदर्शित स्थान की क्षैतिज और अनुलंब स्थिति पर नियंत्रण कर सकते थे। सबसे प्रथम ज्ञात गोली दागने वाले बटन के साथ इलेक्ट्रॉनिक खेल जॉयस्टिक सेगा द्वारा जारी.उनके 1969 के आर्केड खेल, मिसाइल का हिस्सा था, जो एक शूटर सिमुलेशन खेल था जिसने उसका प्रयोग एक प्रारंभिक द्विक-नियंत्रण योजना के हिस्से के रूप में किया था, जहां दो दिशात्मक बटनों का प्रयोग एक मोटरीकृत टैंक को खिसकाने के लिए किया जाता है और एक दो तरफा जॉयस्टिक का प्रयोग शूट करने के लिए और स्क्रीन पर प्रदर्शित विमानों पर मिसाइल छोड़ने के लिए किया जाता है। जब किसी हवाई जहाज को मिसाइल लगता है, तो स्क्रीन पर एक विस्फोट की ध्वनि की नकल उत्पन्न होती है।[3] 1970 में,[4] यह खेल उत्तरी अमेरिका में मिडवे खेलों द्वारा सामी के रूप में जारी किया गया था।[3]

ताइतो ने 1973 में उनके आर्केड रेसिंग वीडियो खेल, ऐस्ट्रो रेस के एक भाग के रूप में एक चार-मार्ग वाली जॉयस्टिक जारी की,[5] जबकि उनके 1975 के रन एंड गन बहुदिशात्मक शूटर खेल “वेस्टर्न गन ” में एक आठ-मार्ग वाली जॉयस्टिक से दोहरी-छड़ी के नियंत्रण की प्रस्तुति की, जिसमें से एक गतिविधि के लिए और दूसरा गोली दागने की दिशा को बदलने के लिए था। उत्तरी अमेरिका में, इसे मिडवे द्वारा “गन फाइट ” के नाम से जारी किया गया था।[6] 1976 में, ताइतो ने “इंटरसेप्टर ” जारी किया, जो एक प्रारंभिक प्रथम-व्यक्ति युद्ध उड़ान सिम्युलेटर था जिसमें एक लड़ाकू जेट विमान का संचालन करते हुए, एक आठ-मार्ग वाली जॉयस्टिक का प्रयोग करके एक क्रासहेयर से निशाना साध कर दुश्मन के विमान पर गोली दागी जाती थी।[7]

1977 में जारी, अटारी 2600 के लिए विकसित, अटारी मानक जॉयस्टिक, एक डिजिटल जॉयस्टिक था, जिसमें गोली दागने के लिए एक ही बटन था और जो एक डीई-9 कनेक्टर के जरिये जुड़ा था- ऐसी डी-फैक्टो विद्युत निर्दिष्टताएं जो कई वर्षों तक मानक जॉयस्टिक निर्दिष्टताएं बनी रहीं. जॉयस्टिकों का प्रयोग सामान्यतः पहली और दूसरी पीढ़ी के खेलों के कनसोलों में नियंत्रकों के रूप में किया जाता था, लेकिन बाद में 1980 के दशक के मध्य के दौरान निन्टेंडो मनोरंजन प्रणाली और सेगा मास्टर प्रणाली के साथ जानेमाने खेल पैड ने उसका स्थान ले लिया, हालांकि जॉयस्टिक - खासकर आर्केड शैली वाले - हर कन्सोल के लिए खरीदी के बाद का एक लोकप्रिय अतिरिक्त उपकरण हैं।

1985 में, सेगा के तीसरे-व्यक्ति वाले आर्केड रेल शूटर खेल स्पेस हैरियर में एक वास्तविक एनालॉग उड़ान छड़ी, जिसका प्रयोग गतिशीलता के लिए किया जाता था, प्रस्तुत की गई। इसका एनलॉग जॉयस्टिक किसी भी दिशा में चल सकता था और धक्के की डिग्री को माप सकता था, जिससे खेले जाने वाले कैरेक्टर को विभिन्न गतियों वाले जॉयस्टिक के किसी एक दिशा में धकेले जाने की दूरी के अनुसार चलाया जा सकता था।[8]

1990 के दशक के उत्तरार्ध से, एनालॉग स्टिकें (या थम्बस्टिकें, उनका नियंत्रण अंगूठे से किये जाने के कारण) वीडियो खेल कन्सोलों पर मानक बन चुकी हैं और उनमें छड़ी की सामान्य अवस्था से विस्थापन को सूचित करने की क्षमता है। इसका मतलब है कि सॉफ्टवेयर द्वारा नियंत्रणों की गतिशीलता की गति का अनुमान लगाने या स्थिति का ट्रैक रखने की जरूरत नहीं है। ये उपकरण आमतौर पर एक चुंबकीय प्रवाह डिटेक्टर का प्रयोग छड़ी की स्थिति का निर्धारण करने के लिए करते हैं।

एक एनालॉग जॉयस्टिक का एक अपने में अलग प्रकार एक स्थितीय बंदूक है, जो एक हल्की बंदूक के लिए अलग तरह से काम करती है। प्रकाश ग्राहकों के प्रयोग के बजाय, एक स्थितीय बंदूक अनिवार्य रूप से एक एनालॉग जॉयस्टिक होती है, जो एक निश्चित स्थान पर लगी होती है जहां बंदूक की स्थिति को दर्ज करके यह जाना जाता है कि खिलाड़ी पर्दे पर किस ओर निशाना साध रहा है।[9][10] इसका प्रयोग अक्सर आर्केड बंदूक खेलों के लिए किया जाता है, जिसके प्रारंभिक उदाहरणों में 1972[11] में सेगा का सी डेविल[12]1976[13] में ताइतो का “अटैक[14] और 1977[15] में “क्रॉस फायर ” तथा 1978 में निन्टेंडो का “बैटलशार्क[16] शामिल है।[17]

आर्केड छड़ियां[संपादित करें]

आर्केड छड़ी घरेलू कन्सोलों या कम्प्यूटरों के साथ इस्तेमाल के लिए एक बड़े प्रारूप वाला नियंत्रक होता है। वे विशेष रूप से बहु - बटन की व्यवस्था वाले कुछ आर्केड कैबिनेटों के छड़ी-और-बटन विन्यास का प्रयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, आर्केड खेलों “स्ट्रीट फाइटर द्वितीय या मॉर्टल काम्बैट ” की छह बटनों वाली व्यवस्था को सुविधाजनक रूप से किसी कन्सोल जॉयपैड पर नहीं लगाया जा सकता है, इसलिए घरेलू कन्सोलों और निजी कम्प्युटरों के लिए इन खेलों के लिए लाइसेंसशुदा घरेलू आर्केड छड़ियां बनाई गई हैं।[18]

तकनीकी विवरण[संपादित करें]

1980 दशक का एक बटन वाला गेम जॉयस्टिक

अधिकांश जॉयस्टिक द्वि-आयामी होते हैं, जो (एक माउस के समान) दो अक्षों पर कार्य करते हैं, लेकिन आजकल त्रि-आयामी जॉयस्टिक भी उपलब्ध हैं। जॉयस्टिक को आम तौर पर इस तरह से कॉन्फ़िगर किया जाता है कि छड़ी को बांए या दांए चलाने पर ‘एक्स’ अक्ष पर चलने का संकेत होता है और उसे आगे (ऊपर) या पीछे (नीचे) चलाने से ‘वाई’ अक्ष पर चलने का संकेत होता है। त्रि-आयामी कार्य के लिए कॉन्फ़िगर किये गए जॉयस्टिकों में, छड़ी को बांई ओर (वामावर्त) या दांई ओर (दक्षिणावर्त) मोड़ने पर ‘ज़ेड’ अक्ष पर चलने का संकेत होता है। ये तीन अक्ष – ‘एक्स’, ‘वाई’ और ‘जेड’ - एक विमान के संदर्भ में, रोल, पिच और या होते हैं।

एनालॉग जॉयस्टिक एक ऐसा जॉयस्टिक होता है जिसमें निरंतर अवस्थाएं होती हैं, यानी वह समतल या शून्य में (आम तौर पर पोटेन्शियोमीटर का प्रयोग करके) किसी भी दिशा में गति का एक कोणीय माप लौटाता है और एक डिजिटल जॉयस्टिक चार विभिन्न दिशाओं में केवल चालू या बंद के संकेत और यांत्रिक रूप से संभव संयोजन (जैसे ऊपर-दाएं, नीचे-बाएं आदि) देता है। (डिजिटल जॉयस्टिक 1980 के दशक के विडियो खेल कन्सोलों, आर्केड मशीनों और घरेलू कम्प्यूटरों के लिए खेल नियंत्रकों के रूप में बहुत आम तौर पर काम में लाए जाते थे।

इसके अतिरिक्त जॉयस्टिकों में अक्सर एक या अधिक गोली दागने के बटन होते हैं, जिनका प्रयोग किसी प्रकार के कार्य को शुरू करने के लिए किया जाता है। ये चालू या बंद करने के सरल स्विच होते हैं।

कुछ जॉयस्टिकों में हैप्टिक प्रतिक्रिया की क्षमता होती है। इस प्रकार ये केवल इनपुट उपकरण ही नहीं, बल्कि सक्रिय उपकरण भी हैं। कंप्यूटर जॉयस्टिक की ओर एक संकेत भेज सकता है जिससे वह उस क्रिया को एक वापसी बल द्वारा रोकता है या जॉयस्टिक में कंपन उत्पन्न कर देता है।

निजी कम्प्यूटरों के अधिकांश आई/ओ अंतरफलक कार्डों में एक जॉयस्टिक (खेल नियंत्रक) पोर्ट होता है। आधुनिक जॉयस्टिक निजी क्म्यूटरों से जुड़ने के लिए अधिकतर एक यूएसबी (USB) अंतर्फलक का प्रयोग करते हैं।

औद्योगिक प्रयोग[संपादित करें]

हाल के समय में, जॉयस्टिकों का प्रयोग कई औद्योगिक और उत्पादन उद्देश्यों के लिए आम हो गया है, जैसे, क्रेनों, एसेंबली लाइनों, वन्य-उद्योग उपकरणों, खनन ट्रकों और उत्खनकों में. वास्तव में, इस तरह के जॉयस्टिकों के प्रयोग की इतनी अधिक मांग है कि, इसने लगभग सभी आधुनिक हाइड्रोलिक नियंत्रण प्रणालियों में पारम्परिक यांत्रिक नियंत्रण लीवर का स्थान ले लिया है। इसके अतिरिक्त, अधिकांश मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) और डूब सकने वाले दूर से संचालित वाहनों (ROVs) को या तो वाहन, या उस पर लगे कैमरों, ग्राहकों और मैनिपुलेटरों को नियंत्रित करने के लिए कम से कम एक जॉयस्टिक की आवश्यकता होती है।

अत्यधिक प्रयोग, तथा ऐसे अनुप्रयोगों की अपरिष्कृत प्रकृति के कारण, औद्योगिक जॉयस्टिक वीडियो खेल नियंत्रक से अधिक मजबूत होता है और एक बड़े जीवन-चक्र की अवधि तक कार्य करने में सक्षम होता है। इससे 1980 के दशक में संपर्करहित संवेदन के लिए ऐसे अनुप्रयोगों में हाल प्रभाव संवेदन का विकास और उपयोग शुरू हुआ। कई कंपनियां औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए हाल प्रभाव प्रौद्योगिकी का उपयोग करके जॉयस्टिकों का उत्पादन करती हैं। जॉयस्टिक की डिजाइन में प्रयोग की जाने वाली एक और तकनीक में फोर्स ट्रांसड्यसरों को बनाने के लिए स्ट्रेन गेजों का इस्तेमाल किया जात है, जिनसे प्राप्त आउटपुट भौतिक विक्षेपण के बजाय लगाए गए बल के अनुपात में होती है। लघु बल ट्रांसड्यूसरों का प्रयोग जॉयस्टिकों द्वारा मेनू चयन कार्यों के लिए अतिरिक्त नियंत्रणों के रूप में किया जाता है।

वैश्विक निर्माताओं में, जो बड़े मूल उपकरण निर्माताओं, जैसे कैटरपिलर, जॉन डीयरे, एजीसीओ, जोएलजी, जीनी और अन्यों की सेवा करते हैं, में डेल्टाटेक कंट्रोल्स और पेनी ऐंड गाइल्स कंट्रोल्स हैं। पेनी ऐंड गाइल्स साअर डैनफॉस के लिए जॉयस्टिकों का डिजाइन और उत्पादन भी करता है। एपेम विश्व बाजार में सीएच प्राडक्ट्स [1], ओलिवर कंट्रोल सिस्टम्स [2] और स्वयं एपेम जैसे ब्रांडों वाला एक और ऐसा निर्माता है [3].

उत्तरी अमेरिका में ऐसे कई छोटे प्रांतीय उत्पादक भी हैं जो इस उद्योग की सेवा करते हैं; ओईएम कंट्रोल्स, ओटो इंजीनियरिंग, पीओ कंट्रोल्स, सीएच प्राडक्ट्स और बीजी सिस्टम्स.

यूरोप में कई निर्माता हैं जो विशिष्ट बाजार भागों जैसे, क्रेन नियंत्रण, विमानन, आदि की आपूर्ति कर रहे हैं। यूरोपीय वैश्विक जॉयस्टिक आपूर्तिकर्ताओं में से एक स्विस कंपनी गेंज एंड थोमा एजी है, जो मानक और आवश्यकतानुसार औद्योगिक ग्रेड जॉयस्टिकों की आपूर्ति कर रही है। ब्रिटेन में प्रिंटेड मोटर वर्क्स ने हाल ही में फ्लाइटलिंक कंट्रोल्स / पीएमएल (PML) फ्लाइटलिंक का औद्योगिक उत्पादन संभाल लिया है।

जॉयस्टिक के कुछ बड़े निर्माता जॉयस्टिकों के हैंडलों और ग्रिपों को ओईएम की जरूरतों के अनुसार अनुकूलित कर सकते हैं, जबकि कुछ छोटे निर्माता अकसर छोटे ओईएमों को मानक उत्पाद ऊंचे दामों पर बेचने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

हैट स्विच[संपादित करें]

शीर्ष पर हरे रंग में हैट स्विच

हैट स्विच कुछ जॉयस्टिकों पर मौजूद एक प्रकार का नियंत्रक होता है। इसे एक पीओवी (दृष्टिकोण) स्विच के नाम से भी जाना जाता है। यह अपनी आभासी दुनिया में चारों ओर देखने, मेनू को ब्राउज़ करने में सहायता करता है। उदाहरण के लिए, कई उड़ान सिमुलेटर इसका प्रयोग खिलाड़ी के दृष्टिकोणों को बदलने के लिए करते हैं, जबकि अन्य खेलों में कभी-कभी इसका प्रयोग डी-पैड के स्थान पर किया जाता है,[19] जबकि प्लेस्टेशन डुअलशॉक नियंत्रक के अनुरूप बनाए गए कम्प्यूटर गेमपैड अपने डी-पैड को पीओवी स्विच स्कैनकोड आवंटित करते हैं।

हैट स्विच शब्द "कुली हैट" शब्द का सुधरा हुआ रूप है, जो ऐसे ही दिखने वाले शिरोवस्त्र पर आधारित है, जिसे आक्रामक माना जा सकता है।

वास्तविक विमान में, हैट स्विच ऐलिरॉन या रूडर ट्रिम जैसी वस्तुओं को नियंत्रित कर सकते हैं।

सहायक तकनीक[संपादित करें]

विशेषज्ञ जॉयस्टिकें, जो एक सहायक तकनीक संकेतक उपकरण के रूप में वर्गीकृत किये गए हैं, का प्रयोग काफी गंभीर रूप से विकलांग लोगों के लिए कंप्यूटर माउस की जगह किया जाता है। खेलों को नियंत्रित करने के बजाय ये जॉयस्टिक यूएसबी (USB) पोर्ट में प्लग होकर माउस सूचक का नियंत्रण करते हैं। वे अक्सर मस्तिष्क पक्षाघात जैसी एथीटॉयड अवस्थाओं में उपयोगी होते हैं, जो उन्हें एक मानक माउस की अपेक्षा पकड़ने में अधिक आसान पाते हैं। पेशीय अल्पसक्रियता या मोटर न्यूरॉन बीमारी जैसे मांसपेशियों की कमजोरी के रोगों के लिए भी लघु जॉयस्टिकें उपलब्ध हैं। विद्युत-शक्ति से चलने वाली पहियेदार कुर्सी के नियंत्रण के लिए भी उनका प्रयोग किया जाता है क्यौंकि वे सरल होते हैं तथा नियंत्रण पद्धति के रूप में प्रयोग के लिए प्रभावी होते हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • गेमपैड
  • ग्रैविस पीसी (PC) गेमपैड
  • खेल नियंत्रक
  • विमान उड़ान नियंत्रण प्रणाली
  • केमप्सटन जॉयस्टिक
  • टीएसी (TAC)-2
  • आर्केड
  • फ्लाइट सिम्युलेटर

संदर्भ[संपादित करें]

  1. Zeller Jr., Tom (2005-06-05). "A Great Idea That's All in the Wrist". New York Times. http://www.nytimes.com/2005/06/05/weekinreview/05zeller.html?ex=1275624000&en=127d9054b0921b1d. अभिगमन तिथि: 2006-09-07. 
  2. Quinion, Michael (2004-07-17). "Questions & Answers: Joystick". World Wide Words. http://www.worldwidewords.org/qa/qa-joy1.htm. अभिगमन तिथि: 2006-09-07. 
  3. साँचा:KLOV game
  4. साँचा:KLOV game
  5. साँचा:KLOV game
  6. स्टीफन टोटिलो, इन सर्च ऑफ़ द फर्स्ट वीडियो गेम गन, कोटाकू
  7. साँचा:KLOV game
  8. अंतरिक्ष हैरियर सिंहावलोकन, आईजीएन (IGN)
  9. Yo-Sung Ho & Hyoung Joong Kim (November 13-16, 2005), Advances in Multimedia Information Processing-PCM 2005: 6th Pacific-Rim Conference on Multimedia, Jeju Island, Korea, Springer Science & Business, प॰ 688, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 3540300406, http://books.google.co.uk/books?id=z-KQDQ0BtG4C&pg=PA688, अभिगमन तिथि: 2011-04-03, "The two routes to conventional gun control are light guns and positional guns. Light guns are the most common for video game systems of any type. They work optically with screen and do not keep track of location on the screen until the gun is fired. When the gun is fired, the screen blanks for a moment, and the optics in the gun register where on the screen the gun is aimed. That information is sent to the computer, which registers the shot. ... Positional guns are mounted stationary on the arcade cabinet with the ability to aim left/right and up/down. They function much like joysticks, which maintain a known location on screen at all times and register the current location when fired." 
  10. Morgan McGuire & Odest Chadwicke Jenkins (2009), Creating Games: Mechanics, Content, and Technology, A K Peters, Ltd., प॰ 408, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 1568813058, http://books.google.co.uk/books?id=0G3PKwgvizEC, अभिगमन तिथि: 2011-04-03, "Light guns, such as the NES Zapper or those used in the House of the Dead series, are distinctly different from positional guns used by arcade games such as SEGA's Gunblade NY. ... Light guns differ from positional guns, such as in Gunblade NY (bottom), that are essentially analog joysticks. ... Positional guns are essentially analog sticks mounted in a fixed location with respect to the screen. Light guns, in contrast, have no fixed a priori relationship with a display." 
  11. साँचा:KLOV game
  12. साँचा:KLOV game
  13. साँचा:KLOV game
  14. साँचा:KLOV game
  15. साँचा:KLOV game
  16. साँचा:KLOV game
  17. साँचा:KLOV game
  18. Gerry Block (December 18, 2007). "Arcade in a Box Xbox 360 Arcade Stick". IGN. http://uk.gear.ign.com/articles/842/842386p1.html. अभिगमन तिथि: 2009-04-21. 
  19. "Microsoft Combat Flight Simulator 2, EU-Inside Moves Series, Jeff Van West, Book - Barnes & Noble". Search.barnesandnoble.com. http://search.barnesandnoble.com/booksearch/isbninquiry.asp?z=y&ean=9780735611764&displayonly=EXC. अभिगमन तिथि: 2010-08-18. 

बाहरी लिंक्स[संपादित करें]

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