ज़रफ़शान नदी

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ताजिकिस्तान के अइनी ज़िले में ज़रफ़शान नदी का एक नज़ारा
ज़रफ़शान नदी के मार्ग का नक़्शा

ज़रफ़शान नदी (ताजिकी: Дарёи Зарафшон, दरिया-ए-ज़रफ़शान; अंग्रेज़ी: Zeravshan River, ज़ेरवशान रिवर) मध्य एशिया की एक नदी है।

यह ताजिकिस्तान में पामीर पर्वतमाला में शुरू होती है और ३०० किमी पश्चिम की और ताजिकिस्तान के अन्दर ही बहती है। ताजिकिस्तान के पंजाकॅन्त (Панҷакент) शहर से गुज़रती हुई फिर यह उज़बेकिस्तान में दाख़िल होती है और उत्तर-पश्चिम की तरफ़ बहती है। फिर यह समरक़न्द की प्रसिद्ध नगरी के पास से निकलती है, जो पूरी तरह इस नदी द्वारा बनाए गए नख़लिस्तान (ओएसिस) पर निर्भर है (बिना इस नदी के यह एक मरूभूमी होता)। समरक़न्द से आगे चलकर उज़बेकिस्तान के नवोइ (Навоий) और बुख़ारा के शहरों से गुज़रकर क़ाराकुल शहर पहुँचती है और फिर आगे के रेगिस्तान की रेतों में ओझल हो जाती है। किसी ज़माने में यह और भी आगे चलकर अपने पानी को आमू दरिया में मिला देती थी, लेकिन वर्तमान में उस तक पहुँचने से पहले ही रेगिस्तान इसे सोख लेता है। इस बदलाव का मुख्य कारण यह है कि ज़रफ़शान का बहुत सा पानी अब सिंचाई के लिए खींच लिया जाता है जिस से इसके आगे के हिस्से में पानी का बहाव बहुत ही कम हो चुका है।[1]

नाम की उत्पत्ति और रेत में सोने की मौजूदगी[संपादित करें]

फ़ारसी में "ज़रफ़शान" (زر افشان) का मतलब "सोने की फुहार वाली" है। इसका नाम यह इसलिए पड़ा क्योंकि इसके ऊपरी हिस्से में रेत में कुछ सोने के कण मिलते हैं। इसके दोनों शब्दों ("ज़र" और "अफ़शान") का वर्णन इस प्रकार है -

  • "ज़र" का अर्थ फ़ारसी में "सोना" है, और यही शब्द संस्कृत में "हर" के रूप में आया। ध्यान दें कि क्योंकि फ़ारसी और संस्कृत दोनों हिंद-ईरानी भाषा परिवार की बहनें हैं इसलिए इनके शब्द अक्सर एक जैसे सजातीय शब्द हुआ करते हैं। "हर" और "ज़र" दोनों का अर्थ कभी "पीला या सोने के रंग जैसा" हुआ करता था। समय के साथ फ़ारसी में "ज़र" का अर्थ "सोना" और "ज़र्द" का अर्थ "पीला रंग" पड़ गया, जबकि संस्कृत में "हर"/"हरि" का अर्थ "पीला-हरा" और फिर केवल "हरा" पड़ गया।[2]
  • "अफ़शान" का अर्थ "बिखेरने वाला" या "फुहार देने वाला" होता है। जैसे किसी बहुत सुन्दर नज़ारे को "हुस्न अफ़शान" कहा जाता है। हिंदी-उर्दू में इसका अधिक प्रयोगित रूप "अफ़शाँ" है।

उच्चारण सहायता[संपादित करें]

ध्यान दीजिये की "बुख़ारा" जैसे शब्दों में 'ख़' की ध्वनि का उच्चारण 'ख' से थोड़ा भिन्न है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. R. Lal. "Climate change and terrestrial carbon sequestration in Central Asia". Psychology Press, 2007. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780415422352. http://books.google.com/books?id=rNCCzVQGlQAC. "... Zarafshan River once contributed its waters to Aral Sea, but in last decades due to intensive irrigated agricultural ..." 
  2. "Mother India: monthly review of culture, Volume 28". Sri Aurobindo Ashram, 1976. http://books.google.com/books?id=-xVdAAAAIAAJ. "... In Sanskrit the cognate harita later comes to mean 'yellow' or 'yellowish green', whereas in Persian its correlative zar-d settles down firmly in the sense of 'yellow' ..."