कीर्तिपुर

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कीर्तिपुर (नेपाल भाषा:क्यपू) काठमाण्डौ घाटी के दक्षिण-पश्चिम मै अवस्थित एक नगर है। यह नगर काठमाडौं जिला मै अवस्थित है। यह नगर एक पहाड मै बसा हुवा है। यह एक ऐतिहासिक नगर है। यहाँ ऐतिहासिक बाघभैरव मन्दिर है। इस नगर के उत्तर-पूर्व मै घाटी का सबसे बडा जलभण्डार टौदह (झील) अवस्थित है। नेपाल का प्रथम विश्वविद्यालय त्रिभुवन विश्वविद्यालय यही नगर मै अवस्थित है।

शब्द का उत्त्पत्ति[संपादित करें]

कीर्तिपुर शब्द दो संस्कृत शब्द "कीर्ति" और "पुर" मिल कर बना है। कीर्ति का अर्थ glory और पुर का अर्थ स्थान होता है। नेवार समुदाय के ज्यादातर नगरौं के नाम उस नगर से सम्बन्धित कार्य मै "पुर" जोडकर बना होता है (उदाहरणः कान्तिपुर, भक्तपुर, ललितपुर, मध्यपुर आदि)। अतः, कीर्ति से सम्बन्धित नगर होने के कारण यह नगर का नाम कीर्तिपुर हो गया।

इतिहास[संपादित करें]

यह नगर का स्थापना लिच्छवि राजा शिवदेव तृतीय ने किया था। मध्यकालीन नेपाल मै यह नगर कभी कान्तिपुर, कभी ललितपुर के अधीन मै रहता था तो कभी स्वतन्त्र नगर के रुप मै रहता था। गोरखा के नरेश पृथ्वीनारायण शाह ने इस नगर को तीन बार आक्रमण करने के बाद जीता था। तीन बार आक्रमण करते समय उनका सेनापति कालु पांडे का निधन, उनका भाई शूरप्रताप शाह ने अपना आंख गवाने के साथ ही वेह भी एक बार बाल-बाल बचे थे। इन युद्धौं मे कीर्तिपुर से पुरुष के साथ-साथ महिला भी अपने नगर के लिए लडे थे। उन के पहले आक्रमण मै सभी मल्ल राज्यौं ने मिलकर उनके बिरुद्ध मै लडे थे। दुसरे बार मै सिर्फ कीर्तिपुर के सेना ने उनको हराया था और तीसरी बार मै उन्हौंने छल से यह नगर जीता था। नगर जितने के बाद उन्हौनें इस नगर के सभी लोगों के नाक और महिलाऔं के बाल काट दिए थे। इस बेइज्जती को कीर्तिपुर के लोग अब भी याद करते है। अत, नेपाल मै राजा के शक्ति को सिमित करने का आन्दोलन (उदाहरण- वि॰सं॰ २०४६का आन्दोलन, नेपाल का लोकतान्त्रिक आन्दोलन आदि) मै सर्वदा कीर्तिपुर आगे रहता है।

जनसंख्या[संपादित करें]

यह नगर का प्रमुख जाति नेवार है। यह नगर नेवार संस्कृति का सब से संरक्षित स्थानौं मै एक है। यहां का मुख्य भाषा नेपालभाषा और नेपाली है। यहां के प्रमुख धर्म हिन्दू धर्म और बौद्ध धर्म है।

देखें[संपादित करें]