कलश लोग

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कलश स्त्रियाँ

कलश या कलाश लोग हिन्दु कुश पर्वत शृंखला में बसने वाली एक जाती है। यह उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा राज्य के चित्राल ज़िले में रहते हैं। कलश लोग अपनी कलश भाषा बोलते हैं। कलश लोग और पड़ौस में रहने वाले अफ़ग़ानिस्तान के नूरिस्तानी लोग एक ही जाती की दो शाखाएँ हैं। नूरिस्तानी लोगों को उन्नीसवी सदी के अंत में अफ़ग़ानिस्तान के अमीर अब्दुर रहमान ख़ान ने पराजित करके मुस्लिम बनाया था जबकि बहुत से कलश लोग अभी भी अपने हिन्दू धर्म से मिलते-जुलते प्राचीन धर्म के अनुयायी हैं। अनुमान लगाया जाता है के अब इनकी जनसंख्या ६,००० के लगभग है। कलश लोग अधिकतर बुमबुरेत, रुम्बुर और बिरिर नाम की तीन घाटियों में रहते हैं और कलश भाषा में इस क्षेत्र को "कलश देश" कहा जाता है।

संस्कृति[संपादित करें]

कलश लोगों की संस्कृति अपने इर्द-गिर्द के लोगों से बिलकुल भिन्न है। यह कई देवी-देवताओं में विशवास रखते हैं।[1] क्योंकि बहुत से कलश लोगों का रंग सफ़ेद है और इनकी आँखें अक्सर नीली-भूरी होती हैं, इसलिए भारत में अंग्रेज़ी राज के ज़माने में कई पश्चातीय इतिहासकारों का कहना था के यह सिकंदर की फ़ौजों में शामिल यूनानियों के वंशज हैं, लेकिन आधुनिक युग में इसे एक मिथ्या ही माना जाता है। उनके धर्म को भी पहले प्राचीन यूनानी धर्म जैसा माना जाता था, लेकिन आधुनिक अध्ययन से पता चला है के यह प्राचीन भारतीय और हिंद-ईरानी धर्म के कहीं ज़्यादा पास है।[2]

कलश भाषा[संपादित करें]

कलश भाषा भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर पश्चिमी भाग और अफ़ग़ानिस्तान में पायी जाने वाली दार्दी भाषा परिवार की एक सदस्य है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Kalash spring festival, Greek influence, BBC News
  2. See the summary of Kalash and Nuristani religion, excerpted below (Religion, Festivals), by M. Witzel, The Ṛgvedic Religious System and its Central Asian and Hindukush Antecedents. In: A. Griffiths & J.E.M. Houben (eds.). The Vedas: Texts, Language and Ritual. Groningen: Forsten 2004: 581-636.