नूरिस्तानी लोग

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एक नूरिस्तानी लड़की

नूरिस्तानी समुदाय पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान के नूरिस्तान इलाक़े में रहने वाली एक जाती है। नूरिस्तान के लोग अपने सुनहरे बालों, हरी-नीली आँखों और गोरे रंग के लिए जाने जाते हैं। उन्नीसवी सदी के अंत तक नूरिस्तानियों का धर्म हिन्दू धर्म से मिलता जुलता एक अति-प्राचीन हिन्द-ईरानी धर्म था और नूरिस्तान को इर्द-गिर्द के मुस्लिम इलाक़ों के लोग "काफ़िरिस्तान" के नाम से जानते थे।[1] सैंकड़ों-हज़ारों वर्षों तक यहाँ के लोग स्वतन्त्र रहे और यहाँ तक कि पंद्रहवी सदी के आक्रमणकारी तैमुरलंग को भी हरा दिया। १८९० के दशक में अफ़ग़ानिस्तान के अमीर अब्दुर रहमान ख़ान ने इस इलाक़े पर हमलों के बाद इस पर क़ब्ज़ा कर लिया। इसके बाद यहाँ के लोगों को मजबूरन मुस्लिम बनाना पड़ा और इस क्षेत्र का नाम भी बदल कर नूरिस्तान कर दिया गया, जिसका अर्थ है "नूर" (यानि "रोशनी") का स्थान।[2][3][4][5][6] यहाँ के लोगों के रीति-रिवाज और धार्मिक मान्यताओं में अभी भी उनके इस्लाम से पूर्व के धर्म के तत्व मिलते हैं।

नूरिस्तान से लगे हुए पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी चित्राल इलाक़े के कलश लोग नूरिस्तानियों से मिलते-जुलते हैं, लेकिन वे उन्नीसवी सदी में ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन भारत में आते थे, इसलिए वे अब्दुर रहमान ख़ान के हमलों से बचे रहे और उनमें से कई अभी भी अपने पूर्वजों के धर्म के अनुयायी हैं। अलग-अलग नूरिस्तानी और कलश क्षेत्रों में भाषा का भी अंतर है, लेकिन ये सारी भाषाएँ दार्दी भाषाओँ में ही गिनी जाती हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Kalash Religion
  2. With Camera to India, Iran and Afghanistan: Access to Multimedia Sources of the Explorer, Professor Dr. Morgenstierne (1892-1975)
  3. Martin Ewans, Afghanistan: a short history of its people and politics, Harper Perennial, 2002, p.103
  4. A Former Kafir Tells His 'Tragic Story'. Notes on the Kati Kafirs of Northern Bashgal (Afghanistan) / Max Klimburg, Eat and West, Vol. 58 - Nos. 1-4 (December 2008), pp. 391-402
  5. Reflections of the Islamisation of Kafiristan in Oral Tradition / Georg Buddruss Journal of Asian Civilizations - Volume XXXI - Number 1-2 - 2008, Special Tribute Edition, pp. 16-35
  6. 'The pacification of the country was completed by the wholly gratuitous conquest of a remote mountain people in the north-east, the non-Muslim Kalash of Kafiristan (Land of the Unbelievers), who were forcibly converted to Islam. Their habitat was renamed Nuristan (Land of Light).' Angelo Rasanayagam, Afghanistan: A Modern History, I.B. Tauris, 2005, p.11