ऊटी

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ऊटी
உதகமண்டலம்
ಉದಕಮಂಡಲ
ऊटी  உதகமண்டலம்  ಉದಕಮಂಡಲ की एक झलक
ऊटी का एक दृश्य

ऊटी
உதகமண்டலம்
ಉದಕಮಂಡಲ
प्रदेश
 - जिला
तमिलनाडु
 - नीलगिरि
स्थान 11.38° N 76.9° E
क्षेत्रफल
 - समुद्र तल से ऊँचाई
  वर्ग कि.मी.

 - २२१३ मीटर
समय मण्डल IST (UTC+5:30)
जनसंख्या (२००१)
 - घनत्व
९३,९२१
 - /वर्ग कि.मी.
महापौर
सांसद
संकेतक
 - डाक
 - दूरभाष
 - वाहन
 
 - ६४३००_
 - +९१-४२३
 - टीएन ४३


ऊटी का एक चाय बागान

ऊटी या उटकमंडलम तमिलनाडू प्रान्त का एक शहर है। कर्नाटक और तमिलनाडू की सीमा पर बसा यह शहर मुख्य रूप से एक हिल स्टेशन के रूप में जाना जाता है। कोयंबतूर यहाँ का निकटतम हवाई अड्डा है। सड़को द्वारा यह तमिलनाडू और कर्नाटक के अन्य हिस्सों से अच्छी तरह जुड़ा है परन्तु यहाँ आने के लिये कन्नूर से रेलगाड़ी ट्वाय ट्रेन द्वारा पहुँचा जा सकता है। ऊटी या उटकमंडलम तमिलनाडू प्रान्त में नीलगिरी की पहाडियो में बसा हुआ एक लोकप्रिय पर्वतीय स्थल है। उधगमंडलम शहर का नया आधिकारिक तमिल नाम है। ऊटी समुद्र तल से लगभग ७,४४० फीट (२,२६८ मीटर) की ऊचाई पर स्थित है।

अनुक्रम

[संपादित करें] इतिहास

नीलगिरी पर्वत चेर साम्राज्य का अन्श हुआ करते थे। फिर वे गन्गा सामराज्य के हाथों मे चले गये और फिर १२वीं शताब्दी में होयसल साम्राज्य के राजा विष्णुवर्धन के राज्य मे आ गये। उस के बाद नीलगिरी पर्वत मैसूर राज्य का हिस्सा बन गये जिस के टीपू सुलतान ने उन्हें १८वीं शताब्दी में अंग्रेजों के हवाले कर दिया।

पडोसी कोइम्बटोर जिले के गवर्नर, जॉन सुलिवान को यहाँ की आबो-हवा बहुत पसंद आने लगी और उसने स्थानीय जातियों (टोडा, इरुम्बा और बदागा) से जमीन खरीदनी शुरु कर दी।

अंग्रेजी राज के तहत इन पर्वतों का विकास बहुत तेजी से होने लगा क्योंकि ज्यादातर जमीन यहाँ अमीर अंग्रेजों की निजी संपत्ती थी। बाद में ऊटी को मद्रास प्रेसीडेंसी की ग्रीश्मकालीन राजधानी का दर्जा दे दिया गया।

[संपादित करें] पर्यटन उद्योग

नीलगिरी या नीले पर्वतों की पर्वतमाला मे बसा हुआ ऊटी प्रति वर्श बडी तादाद में पर्यटको को आकर्शित करता है। सर्दियों के अलावा साल भर मौसम सुहाना ही रहता है। सर्दी के समय तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाता है। पर आज ये शहर अधिकाधिक औद्योगिकीकरण और पर्यावरण सम्बन्धी समस्याओं से जूझ रहा है।

घने वनस्पति, चाय के बागान और नीलगिरी के पेड यहा के पहाडों की विशेशता है। यहाँ कि प्राक्रितिक सुंदरता बनाये रखने के लिये पहाडों के कई हिस्सों को आरक्षित वन का दर्जा प्रदान किया गया है। इस कारण से शिविर क्षेत्र से बाहर शिविर लगाने के लिये खास अनुमति लेनी पड़ती है। ऊटी एक बिंदू की तरह पर्यटकों को आकर्षित करता है और फिर वे आसपास भी भ्रमण करते हैं।

इन्ही पहाडो़ में दूसरे छोटे शहर जैसे कुन्नू‍र और कोटागिरी भी हैं। ये शहर ऊटी से सिर्फ कुछ ही घंटों की दूरी पर हैं और इन का मौसम भी ऊटी जैसा ही है पर यहाँ कम पर्यटक है और दाम भी सस्ते हैं।


[संपादित करें] स्थानीय अर्थव्यवस्था

ऊटी जिला हेडक्वाटर भी है। ऐसे तो यहाँ की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर्यटन पे ही टिकी है, ऊटी आसपास के शहरों के लिये बाजा़र का काम भी करता है। अर्थव्यवस्था मूलतः क्रिषि पे निर्भर है। ठन्डे मौसम की वजह से यहाँ "अंग्रेजी सब्जियाँ" जैसे आलू, गाजर और गोभी उगाई जाती हैं। ऊटी म्यूनिसिपल बाजा़र में रोजना इन सब्जियों की नीलामी होती है।


[संपादित करें] यह भी देखें

[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ