ईर्ष्या

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ईर्ष्या का अर्थ होता है डाह। किसी व्यक्ति (या समाज) के मन में ईर्ष्या की भावना तब पैदा होती है जब 'ऊंची' समझे जाने वाले गुण, उपलब्धियाँ, अनुभव आदि दूसरों में हों किन्तु उस व्यक्ति (या समाज) में न हों। ईष्या की स्थिति में व्यक्ति चाहता है कि वे गुण या उपलब्धियाँ आदि दूसरों में भी न होतीं तो अच्छा होता।

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