क्रोध

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क्रोध या गुस्सा एक भावना है। दैहिक स्तर पर क्रोध करने/होने पर हृदय की गति बढ़ जाती है; रक्त चाँप बढ़ जाता है। यह भय से उपज सकता है। भय व्यवहार में स्पष्ट रूप से व्यक्त होता है जब व्यक्ति भय के कारण को रोकने की कोशिश करता है। क्रोध मानव के लिए हानिकारक है

क्रोध पर नियंत्रण की आवश्यकता[संपादित करें]

क्रोध प्रकट करने से पहले: कार्यालय में तनाव अधिक होना धैर्य क्षमता को कम करता है। जब आपके काम का श्रेय कोई और ले लेता है अथवा आपके काम पर प्रश्न उठाता है तो क्रोध के लक्षण उभरने लगते हैं। पर इससे पहले कि क्रोध हम पर हावी हो जाए हमें इसका प्रबंध करना जरूरी हो जाता है। हमें क्रोध के मूल कारण को जानने और समझने की जरूरत है। आप संबंधित व्यक्ति से बातचीत कर सकते हैं अथवा सीनियर के साथ मीटिंग भी कर सकते हैं। सीनियर द्वारा आपके काम पर प्रश्न किए जाने की स्थिति में अपनी शंकाओं और योजनाओं को उनके समक्ष रख सकते हैं। गुस्सा जाहिर करने की जगह धैर्य, ध्यान और विश्रम का सहारा लेने का प्रयास करें। निरंतर बदला लेने के लिए तत्पर न रहें।धैर्य मानव का सबसे बडा गुण है। गलती मानवीय स्वभाव है, हमेशा सटीक होना सम्भव नहीं है।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]


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