इमाम अहमद रजा
| इमाम अहमद रजा खान कादरी اعلیٰ حضرت امام احمد رضا خان قادری رضی اللہ تعالیٰ عنہ |
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मुस्तफा जाने रहमत पे लाखों सलाम शमये बजमे हिदायत पे लाखों सलाम |
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| विकल्पीय नाम: | आला हजरत और मुजद्दिदे आजम |
| जन्म - तिथि: | 1856 |
| जन्म - स्थान: | बरेली जिला, उत्तर प्रदेश, भारत |
| मृत्यु - तिथि: | 1921 |
| मृत्यु - स्थान: | बरेली जिला, भारत |
| धर्म: | इस्लाम |
इमाम अहमद रज़ा खान फाज़िले बरेली का जन्म १० शव्वाल १६७२ हिजरी मोताबिक १४ जून १८५६ को बरेली में हुआ. आपके पूर्वज कंधार के पठान थे जो मुगलों के समय में हिंदुस्तान आये थे . इमाम अहमद रज़ा खान फाज़िले बरेली के मानने वाले इन्हें आलाहजरत के नाम से याद करते है। आलाहजरत बहुत बड़े मुफ्ती, आलिम, हाफिज़, लेखक, शायर, धर्मगुरु, भाषाविद, युगपरिवर्तक, तथा समाज सुधारक थे। सय्यदुनअ आला हजरत इमाम अहमद रजा खान कादरी 14 वीँ शताब्दी के नवजीवनदाता (मुजद्दिद) थे। जिन्हेँ उस समय के प्रसिद्ध अरब विद्वानों ने यह उपादी दी. उन्होंने हिंद उपमहाद्वीप के मुसलमानों के दिलों में अल्लाह सुब्हानहु तआला और मुहम्मद रसूलल्लाह सल्लाहु तआला अलैही वसल्लम के प्रती प्रेम भर कर और मुहम्मद रसूलल्लाह सल्लाहु तआला अलैही वसल्लम की सुन्नतों को जीवित कर के इस्लाम उन्होंने 13 वर्ष की कम आयु में मुफ्ती की श्रेणी ग्रहण की. उन्होंने 72 से अधिक विभिन्न विषयों पर 1000 से अधिक किताबें लिखीं जिन में तफ्सीर हदीस उनकी एक प्रमुख पुस्तक जिस का नाम अद्दौलतुल मक्किया है जिस को उन्होंने केवल 8 घंटों में बिना किसी संदर्भ ग्रंथों के मदद से हरम-ए-मक्का में लिखा. (Ye Kaam sirf ek aashike RASOOL hi ker sakta Hai)उनकी एक प्रमुख ग्रंथ फतावा रज्विया इस सदी के इस्लामी कानून का अच्छा उदाहरण है जो 13 विभागों में विरचित है। कन्जुल ईमान फी तर्जमतुल कुर॑आन उर्दु और हिन्दी भाषा में अब तक का उत्तम अनुवाद
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