अहोम

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Tai Ahom
আহোম
ไทอาหม
कुल जनसंख्या

2 million (1990 est.)

ख़ास आवास क्षेत्र
Flag of भारत भारत:
    Assam 1.9 million
    Arunachal Pradesh 50,000
भाषाएँ
Ahom (formerly), Assamese
धर्म
Hinduism, Buddhism
अन्य सम्बंधित समूह
Shan, Thai, and other Tai groups

अहोम (Pron: /ˈɑːhɑːm{{{2}}}ˈɑːhəm/, असमिया আহোম, Tai/Thai อาหม) लोग असम, भारत के वाशिंदे हैं। वे ताई जाति के वंशज हैं जो १२२० में अपने ताई राजकुमार चुकाफ़ा के साथ ब्रह्मपुत्र घाटी आये और छह सदियों तक इस क्षेत्र में अधिपत्य जमाया। चुकाफ़ा और उनके अनुयायियों ने असम में अहोम वंश की स्थापना की। चुकाफ़ा और उसे उत्तराधिकारियों ने अहोम साम्राज्य को ६ शताब्दी (१२२८-१८२६) तक चलाया और विस्तार किया। १८२६ में प्रथम एंग्लो-बर्मी युद्ध जीतने के बाद ब्रिटिश लोगों ने अहोम राजाओं के साथ यांडूबु संधि की और इस क्षेत्र में नियंत्रण स्थापित किया ।

आधुनिक अहोम लोग और उनकी संस्कृति मूलत: ताई संस्कृति, स्थानीय तिब्बती-बर्मी और हिंदू धर्म के एक समधर्मी मिश्रण हैं। चुकाफ़ा के ताई अनुयायियों जो अविवाहित थे, उनमे से अधिकतरों ने बाद में स्थानीय समुदायों में शादी की। कालक्रम में तिब्बती-बर्मी बोलने वाले बोराही सहित कई जातीय समूह पूरी तरह से अहोम समुदाय में सम्मिलित हो गए। अहोम साम्राज्य ने अन्य समुदायों के लोगों को भी उनकी प्रतिभा की उपयोगिता के लिए तथा उनकी निष्ठा के आधार पर अहोम सदस्य के रूप में स्वीकार किया।

समय के साथ साथ अहोम लोगों ने हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति के अन्य पहलुओं को अपना लिया। साथ ही उन्होंने अहोम भाषा के बदले असमिया भाषा को अपनी बोल चाल की भाषा के रूप में अपना लिया। हालांकि अहोम आबादी के एक तिहाई लोग अभी भी प्राचीन ताई धर्म फुरलांग का पालन करते हैं। २०वीं शताब्दी के मध्य तक अहोम लोगों के पुरोहित और उच्च वर्ग के लगभग ४००-५०० लोग अहोम भाषा ही बोलते थे। परन्तु अब अहोम भाषा बोलने वाले नहीं या नाममात्र को रह गए हैं। अहोम जनगोष्ठी के लिए यह एक चिंतनीय विषय है। अब फिर से आम जनता के बीच फिर से ताई अहोम भाषा को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए विभिन्न ताई अहोम संगठनों द्वारा ऊपरी असम में ताई स्कूलों की स्थापना की जा रही है और बच्चों को ताई भाषा पढने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अनेकों ताई भाषा संस्थान जैसे- पी. के. बरगोहाईं ताई संस्थान, दक्षिण पूर्व एशियाई अध्ययन- गुवाहाटी, सेंट्रल ताई अकादमी-पाटसाकू (शिवसागर) हाल के दिनों में स्थापित हुए हैं। आने वाले दिनों में और अधिक ताई स्कूलों को असम भर में स्थापित करने की योजना है[1]

२०वीं शताब्दी के अंत से अब तक, अहोम लोगों ने अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत को पुनर्जीवित करने और लोगों में उत्सुकता जगाने के लिए विस्तृत अध्ययन और प्रचार-प्रसार किया है[2]। १९०१ के जनगणना के मुताबिक भारत में अहोम लोगों की कुल जनसंख्या १,७९,००० के आसपास थी। २०११ के जनगणना के मुताबिक अब भारत में अहोम लोगों की जनसंख्या २०,००,००० से ज्यादा है, परन्तु मूल अहोम जाति से अन्य जाति तथा उपजाति में परिवर्तित होने वाले लोगों की जनसंख्या इसमें जोड़ दे तो यह संख्या ८०,००,००० से ज्यादा हो जाएगी[3]

इतिहास[संपादित करें]

अहोम शासन[संपादित करें]

इन्हें भी देखें: Ahom kingdom

अहोम लोगों ने १२२८ में चुकाफ़ा नामक शासक के नेतृत्व में असम में अपने राज्य की स्थापना की। उन्होंने असम में १८२६ ईसवीं तक अपना राज कायम रखा। राजा चुकाफ़ा बहुत ही विनम्र था और वह स्थानीय जनजातियों मोरानी और बोराही लोगों के साथ दोस्ती कायम की। अहोम लोगों की आने वाली पीढ़ियों ने इन जनजातियों की लड़कियों से शादियाँ की और असम में ही पूर्ण रूप से बस गए। अहोम राजा सुहुंगमुंग ने हिन्दू नाम 'स्वर्ग नारायण' अपनाया और बाद में सभी अहोम राजाओं को असमिया भाषा में “स्वर्गदेव” (स्वर्ग का स्वामी) बुलाया गया। अहोम राजाओं को ताई भाषा में “चाओ-फा” कहा जाता था। अहोम राजाओं के राज्याभिषेक समारोह को Singarigharutha के नाम से जाना जाता था। अहोम शासकों और लोगों ने असम में मुगलिया सल्तनत के विस्तार को रोका। १९वीं सदी के शुरुआती वर्षों में अहोम लोगों के बीच गृहयुद्ध छिड़ गया जिसकी वजह से उनकी ताक़त और संसाधन घटते चले गए और उनकी सत्ता समाप्ति के कगार पर आ गयी। इसी स्थति का फायदा उठाते हुए बर्मा (वर्तमान म्यांमार) के सेना ने असम पर आक्रमण कर दिया और अहोम राजा को राज्य छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। उसकी जगह पर एक कठपुतली राजा को सत्ता पर बिठाया गया। उसके पश्चात अंग्रेजों ने असम पर आक्रमण किया और पहले एंग्लो-बर्मी युद्ध में अंग्रेजों ने बर्मी सेना को हरा कर असम को ब्रिटिश शासन के अधीन में ले लिया। अहोम लोग असमिया समाज के एक महत्वपूर्ण अंग हैं।

संस्कृति[संपादित करें]

अंतिम संस्कार का रिवाज़[संपादित करें]

पितृ और कुल पूजा[संपादित करें]

अहोम लोग[संपादित करें]

वर्तमान में अहोम लोग[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

Notes[संपादित करें]

  1. Dipima Buragohain. Issues of Language Contact and Shift in Tai Ahom
  2. Sikhamoni Gohain Boruah & Ranjit Konwar, The Tai Ahom of India and a Study of Their Present Status Hiteswar Saikia College and Sri Ranjit Konwar, Assam Forest Department
  3. http://www.ethnologue.com/show_language.asp?code=aho

बाहरी संदर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]



सन्दर्भ[संपादित करें]