अल्गोरिद्म

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महत्तम समापवर्तक (HCF) निकालने के लिए यूक्लिड के अल्गोरिद्म का फ्लोचार्ट

गणित, संगणन तथा अन्य विधाओं में किसी कार्य को करने के लिये आवश्यक चरणों के समूह को कलन विधि (अल्गोरिद्म) कहते है।

कलन विधि को किसी स्पष्ट रूप से पारिभाषित गणनात्मक समस्या का समाधान करने के औजार (tool) के रूप में भी समझा जा सकता है। उस समस्या का इनपुट और आउटपुट सामान्य भाषा में वर्णित किये गये रहते हैं; इसके समाधान के रूप में कलन विधि, क्रमवार ढंग से बताता है कि यह इन्पुट/आउटपुट सम्बन्ध किस प्रकार से प्राप्त किया जा सकता है।

कुछ उदाहरण :

१) कुछ संख्यायें बिना किसी क्रम के दी हुई हैं; इन्हें आरोही क्रम (ascending order) में कैसे सजायेंगे?

२) दो पूर्णांक संख्याएं दी हुई हैं ; उनका महत्तम समापवर्तक (Highest Common Factor) कैसे निकालेंगे ?

कुछ प्रसिद्ध कलनविधियाँ[संपादित करें]

  • युक्लिड की कलनविधि
  • फर्मत की कलनविधि
  • लुन (Luhn) की कलनविधि
  • शॉटन की कलनविधियाँ (algorithms for sorting)
  • कम्प्रेशन की कलनविधियाँ (algorithms for compression)
  • ट्री-सर्च अल्गोरिद्म (min-max तथा alpha-beta)
  • क्रिप्टोग्राफी के अल्गोरिद्म

इतिहास[संपादित करें]

प्राचीन संस्कृत गणित ग्रन्थों में बहुत से अलगोरिद्म श्लोक के रूप में दिए गए हैं। उदाहरण के लिए निम्नलिखित कलनविधि धनात्/ऋणात्मक संख्याओं के गुणन/भाजन का नियम बताता है-

स्वयोरस्वयो स्‍वम् वध: स्वर्णघाते।
क्षयो भागहारे अपि चैवम् निरुक्तम्।।

अन्वय - स्वयो: (+*+), अस्वयो: (-*-) वध: स्वम् (+) (भवति|) स्व-ऋण-घाते (+*-) वध: क्षय: (-) (भवति)| भागहारे (/) अपि च एवं निरुक्तम्।

अर्थ : दो धनात्मक या दो ऋणात्मक संख्याओं का गुणनफल धनात्मक होता है। धनात्मक ऋणात्मक संख्याओं का गुणन ऋणात्मक होता है। यही बात भाजन (division) पर भी लागू होती है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाह्य सूत्र[संपादित करें]