जननेन्द्रिय हर्पीज

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जननेन्द्रिय हर्पीज
वर्गीकरण व बाहरी संसाधन
हर्पीज़ सिम्प्लेक्स विषाणु का इलेक्ट्रॉन माइक्रोग्राफ़
आईसीडी-१० A60., B00., G05.1, P35.2
आईसीडी- 054.0, 054.1, 054.2, 054.3, 771.2
रोग डाटाबेस 5841 33021
ई-मेडिसिन med/1006 
एमईएसएच D006561
स्त्री गुप्तांग पर हरपीज
हर्पीज से ग्रसित शिश्न

जननेन्द्रिय हर्पीज़ (Herpes genitalis या genital herpes) या परिसर्प एक यौन संचारित रोग (एसटीडी) है जो कि हर्पिस सिम्प्लेक्स नामक विषाणु प्रकार - 1 (एच एस वी-1) और टाइप - 2 (एच एस वी-2) से पैदा होता है। वर्ष १९९८ में किये गये एक अध्ययन से यह बात सामने आयी थी कि यौनिक रूप से संचारित रोगों में यह रोग सबसे आम है। [1]। इस रोग से ग्रसित अधिकांश रोगियों को पता ही नहीं होता कि वे इस रोग से ग्रसित हैं।[2] इस रोग का कोई इलाज नहीं है। किन्तु समय के साथ रोग के लक्षण मन्द पड़ते चले जाते हैं।[3]

सामान्यतः किसी व्यक्ति को काम क्रिया के दौरान एच एस वी-2 संक्रमण तभी हो सकता है जबकि वह ऐसे व्यक्ति के साथ संपर्क करे जो योनि एचएसवी-2 से पीड़ित है। यह किसी ऐसे व्यक्ति से भी हो सकता है जो संक्रमण से प्रभावित हो और उसमें कोई दर्द न हो। साथ ही, उसे यह भी मालूम न हो कि वह संक्रमण से पीड़ित है।

लक्षण[संपादित करें]

एचएसवी-2 से पीड़ित अधिकांश व्यक्तियों को अपने संक्रमण की जानकारी ही नहीं होती है। वायरस संप्रेषण को 2 सप्ताह बाद ही पहला प्रकोप होता है और संकेत दिखाई पड़ते हैं। वे विचित्र रूप में दो से चार सप्ताह में ठीक हो जाते हैं लेकिन जननांग या गुदा में या उसके आसपास एक या दो फफोले रह जाते हैं। फफोले फूट जाते हैं और नरम फुंसिया रह जाती हैं जिन्हें ठीक होने में दो से चार सप्ताह लग जाते हैं। ऐसा पहली बार होता है। विचित्र रूप से दूसरा रोग फैलता दिखाई दे सकता है जो कि पहले रोग से कई सप्ताह या महीनों के बाद दिखाई देता है किंतु यह पहले की अपेक्षा कम गंभीर और कम अवधि का होता है। भले ही संक्रमण शरीर में लंबी अवधि के लिए बना रहे किंतु कुछ वर्षों की अवधि के दौरान फैलने वाले रोगों में कमी आ जाती है। अन्य संकेत और लक्षण फ्लू के लक्षणों की तरह होते हैं, जिनमें बुखार और सूजी ग्रंथियां शामिल हैं।

उपचार[संपादित करें]

ऐसा कोई इलाज नहीं है जिससे कि त्वचा रोग का उपचार किया जा सके, किंतु एन्टी वायरस दवाईयों के प्रयोग से दवाई प्रयोग की अवधि के दौरान इसे फैलने से रोका जा सकता है। इसके अतिरिक्त प्रतिदिन निरोधात्मक उपाय करने से लाक्षणिक त्वचा रोग से साथी को बचाया जा सकता है।

रोकथाम[संपादित करें]

यौन संचारित बीमारी (एसटीडी) से बचने का सबसे पक्का तरीका है कि संभोग न किया जाए या फिर ऐसे साथी के साथ आपसी एक संगी संबंध रखा जाए जिसे यह बीमारी नहीं है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. [Antonio C Gerbase, Jane T Rowley, Thierry E Merten (1998). "Global epidemiology of sexually transmitted diseases". Lancet 352: S2–S4. doi:10.1016/S0140-6736(98)90001-0.]
  2. "Genital Herpes - CDC Fact Sheet". Retrieved 2013-11-09.
  3. David M. Koelle, MD; Jacqueline Benedetti, PhD; Andria Langenberg, MD; and Lawrence Corey, MD (1992). "Asymptomatic Reactivation of Herpes Simplex Virus in Women after the First Episode of Genital Herpes". Annals of Internal Medicine 116 (6): 433–437. doi:10.7326/0003-4819-116-6-433

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]