सत्त्रिया नृत्य

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परम्परागत सत्रीया नृत्य के वस्त्रो एवं असमिया आभूषणों से सुसज्जित सत्रीया नृत्यांगना कृष्णाक्षी कश्यप

सत्त्रिया नृत्य (असमिया: সত্ৰীয়া নৃত্য), आठ मुख्य भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं में से एक है। यह नृत्य असम का शास्त्रीय नृत्य है। वर्ष 2000 में इस नृत्य को भारत के आठ शास्त्रीय नृत्यों में सम्मिलित होने क गौरव प्राप्त हुआ। इस नृत्य के संस्थापक महान संत श्रीमनता शंकरदेव हैं। सन्करदेव ने सत्त्रिया नृत्य को अंकिया नाट (सन्करदेव द्वारा तैयार किया एक असमिया अधिनियम नाटकों का एक रूप) के लिए एक संगत के रूप में बनाया था। यह नृत्य सत्त्र नामक असम के मठों में प्रदर्शन किया गया था। यह परंपरा विकसित हुइ और बढ़ी सत्त्रो के भीतर और यह नृत्य रूप सत्त्रिया नृत्य कहा जाने लगा।

नृत्य[संपादित करें]

सत्त्रिया नृत्य का मूल आमतौर पर पौराणिक कहानियों होती हैं। यह एक सुलभ, तत्काल और मनोरंजक तरीके से लोगों को पौराणिक शिक्षाओं को पेश करने का एक कलात्मक तरीका था। परंपरागत रूप से, यह नृत्य केवल मठों में 'भोकोट' (पुरुष भिक्षुओं) द्वारा, अपने दैनिक अनुष्ठान के एक भाग के रूप में या विशेष त्योहारों को चिह्नित करने के लिए, प्रदर्शन किया जाता था। आज सत्त्रिया नृत्य केवल पौराणिक विषयों तक सीमित नहीं हैं और दोनो पुरुषों और महिलाओं द्वारा मंच पर प्रदर्श्न किया जाता है।

सत्त्रिया नृत्य कई पहलुओं में विभाजित है जैसे कि: अप्सरा नृत्य, बेहार नृत्य, छली नृत्य, दसावतारा नृत्य, मंचोक नृत्य, नातौ नृत्य, रसा नृत्य, राजघारिया छली नृत्य, गोसाई प्रबेश, बार प्रबेश, झूमूरा, नाडू भंगी और सुत्रधरा। भारतीय शास्त्रीय नृत्य के अन्य सात स्कूलों की तरह, सत्त्रिया नृत्य में भी शास्त्रीय नृत्य शैली के लिए आवश्यक सिद्धांते शामिल हैं : नृत्य और नाट्य शास्त्र के ग्रंथ जैसे कि नाट्याशास्त्रा, अभिनया दर्पणा और संगीत रत्नाकारा; एक विशिष्ट प्रदर्शनों की सूची और नृतता (शुद्ध नृत्य), नृत्य (अर्थपूर्ण नृत्य) और नाट्य (अभिनय) के पहलुओं को अभिनय में शामिल करते हैं।

इतिहास[संपादित करें]

यह नृत्य कला 500 से अधिक वर्षों से चली आ रही परंपरा हैं। यह नृत्य असम की वैष्णव मठों, जो की सत्रा के नाम से जाना जाता है, की परंपरा हैं। यह मूल रूप से पौराणिक नृत्य नाटक के रूप में ब्रह्मचारी भिक्षुओं द्वारा अभ्यास किया था। ये नृत्य नाटक, मुख्य रूप से, असमिया वैष्णव संत और समाज सुधारक श्रीमनता सन्करदेव और उनके प्रमुख शिष्य माधवदेव द्वारा लिखित और किया गया था। ये ज्यादातर 16 वीं सदी के दौरान लिखे गये थे। इस नृत्य कला को पेहले केवल पुरुषों द्वारा प्रदर्शित किया गया था लेकिन अब यह महिला नर्तकियों द्वारा भी किया जाता है। 15 नवम्बर 2000 में संगीत नाटक अकादमी ने सत्त्रिया नृत्य को भारत के शास्त्रीय नृत्य रूपों में से एक के रूप में मान्यता दे दी है।

सत्त्रिया नृत्य की पदोन्नति[संपादित करें]

इन वर्षों में, सत्त्रिया नृत्य को असम राज्य के बाहर और भारत से बाहर दोनों में अधिक से अधिक स्वीकृति और संरक्षण प्राप्त हुआ है।

नृत्य के प्रमुख प्रतिपादक[संपादित करें]

  1. बापुराम बरबायान अतैई
  2. मनिराम डटा मुकतियार बरबायान
  3. गहन चंद्रा गोस्वामी
  4. जीबेश्वर गोस्वामी
  5. प्रदीप चलीहा
  6. ललित चंद्रा नाथ ओझा
  7. गोपीराम/गुपीराम बरगयन
  8. रामेश्वर सैकिया
  9. हरीचरण सैकिया
  10. कोशा काँटा देवा गोस्वामी
  11. आनंदा मोहन भगवती
  12. गुणकँता डटा बरबायान
  13. प्रभात शर्मा
  14. जतीन गोस्वामी
  15. परमान्दा बरबायान
  16. माणिक बरबायान
  17. घनकन्ता बोरा बरबायान
  18. जिबनजीत डटा
  19. टांकेश्वर हज़ारीका बरबायान
  20. मूही कांत बोरह गायन बरबायान
  21. भाबनांदा बरबायान

संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के प्राप्तकर्ता[संपादित करें]

  1. मनिराम डटा मुकतियार बरबायान (1963)
  2. बापुराम बरबायान अतैई (1978)
  3. रोसेश्वर सैकिया बरबायान (1980)
  4. इंदिरा पी. पी. बोरा (1996)
  5. प्रदीप चलीहा (1998)
  6. परमान्दा बरबायान (1999 - 2000)
  7. घनकन्ता बोरा बरबायान (2001)
  8. जतिन गोस्वामी (2004)
  9. गुणकँता डटा बरबायान (2007)
  10. माणिक बरबायान (2010)

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. ^ a b Kothari, Sunil (ed). Sattriya-Classical Dance of Assam. Marg, The Marg Foundation, Mumbai, 2013.
  2. ^ Sethi, Arshiya Sattriya: The redefining of a tradition
  3. ^ Thakur, Sudarsha Cultural Reportage
  4. ^ Kothari, Sunil (ed). Sattriya-Classical Dance of Assam. Marg, The Marg Foundation, Mumbai, 2013, Blurb.

पठनीय[संपादित करें]

  • Neog, Maheswar. Aesthetic Continuum: Essays on Assamese Music, Drama, Dance and Paintings. New Delhi: Omsons Publications, 2008.
  • Neog, Maheswar and Keshav Changkakati. Sattriya Dances of Assam and their Rhythms. Guwahati: Assam Prakashan Parishan, 1973.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

Sattriya Dance at sattriyakristi.com website.