फेफड़ा

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मानव के वक्ष गुहा में हृदय को घेरे हुए दोनों फेफड़े.[1]

हवा या वायु में श्वांस लेने वाले प्राणियों का मुख्य श्वसन अंग फेफड़ा या फुप्फुस (जैसा कि इसे वैज्ञानिक या चिकित्सीय भाषा मे कहा जाता है) होता है। यह प्राणियों में एक जोडे़ के रूप मे उपस्थित होता है। फेफड़े की दीवार असंख्य गुहिकाओं की उपस्थिति के कारण स्पंजी होती है। यह वक्ष-गुहा में स्थित होता है। इसमें रक्त का शुद्धीकरण होता है। प्रत्येक फेफड़ा में एक पल्मोनरी शिरा हृदय से अशुद्ध रक्त लाती है। फेफड़े में रक्त का शुद्धीकरण होता है। रक्त में ऑक्सीजन का मिश्रण होता है। फेफडो़ का मुख्य कार्य वातावरण से ऑक्सीजन लेकर उसे रक्त परिसंचरण मे प्रवाहित (मिलाना) करना और रक्त से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर उसे वातावरण में छोड़ना है। गैसों का यह विनिमय असंख्य छोटे छोटे पतली-दीवारों वाली वायु पुटिकाओं जिन्हें अल्वियोली कहा जाता है मे होता है। यह शुद्ध रक्त पल्मोनरी धमनी द्वारा हृदय में पहुँचता है, जहां से यह फिर से शरीर के विभिन्न अवयवों मे पम्प किया जाता है।


संदर्भ[संपादित करें]