गोस्वामी समाज

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गोस्वामी समाज एक भारतीय संस्कृति से जुड़ा समाज है इसे दसनाम गोस्वामी समाज के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसमें दश तरह की उपजातिया होती है जिनमे गिरी, पूरी, वन, भारती, अरण्य, सागर, पर्वत, सरस्वती, तीर्थ, आश्रम आदि शामिल है भारतीय उपजाति "गोस्वामी" के समूह से बना यह समाज सम्पूर्ण भारत में फैला है सर्वाधिक गोस्वामी समाज के लोग राजस्थान,बिहार,गुजरात एवं उत्तराखंड में रहते है इस समाज के साधु भगवा रंग के कपडे पहनते है पूर्व में अधिकतर गोस्वामी समाज के लोग मंदिर में पूजा का कार्य करते थे लेकिन अब गोस्वामी समाज के लोग खेती व प्रशासनिक सेवा में भी कार्यरत है ये शिव के उपासक होते है गोस्वामी समाज भक्ति परंपरा से जुड़ा संप्रदाय हैं इन्होंने भक्ति का अनूठा योगदान दिया है माना जाता है कि इन लोगों को मरने के बाद स्वर्ग की प्राप्ति होती हैं शूद्र द्वारा इनको देवताओं के समान माना गया है सामान्य रूप से इन्हें ब्राह्मणों के समान माना जाता है लेकिन यह तकनीकी रूप से ब्राह्मणों से श्रेष्ठ होते हैं।

== समाज के प्रमुख के व्यक्ति == स्वामी विवेकानंद जी गोस्वामी तुलसीदास जी स्वामी दयानद सरस्वती

नागा बाबा[संपादित करें]

साधु जो अब समाज को त्यागकर साधना में लीन रहना चाहते हैं उनको दीक्षित किया जाता है। आचार्य आदि शंकराचार्य द्वारा संन्यासियों की पहले से चली आ रही परंपरा को जब संगठित किया गया और उसे नाम दिया- दसनामी साधु संघ।

दीक्षा के समय प्रत्येक दसनामी जैसा कि उसके नाम से ही स्पष्ट है, निम्न नामों, गिरि, पुरी, भारती, वन, अरण्य, पर्वत, सागर, तीर्थ, आश्रम या सरस्वती में से किसी एक नाम से अभिभूषित किया जाता है या वह पहले से ही उसी समाज से संबंधित रहता है। किसी एक नाम और परंपरा का साधु बनकर वह सात में से किसी एक अखाड़े का सदस्य बनता है।

दसनामी साधुओं में मंडलेश्वर और नागा पद होते हैं। उनमें भी शास्त्रधारी और अस्त्रधारी महंत होते हैं। शास्त्रधारी शास्त्रों आदि का अध्ययन कर अपना आध्यात्मिक विकास करते हैं तथा अस्त्रधारी अस्त्रादि में कुशलता प्राप्त करते हैं।

नागा उपाधियां : चार जगहों पर होने वाले कुंभ में नागा साधु बनने पर उन्हें अलग अलग नाम दिए जाते हैं। इलाहाबाद के कुंभ में उपाधि पाने वाले को 1.नागा, उज्जैन में 2.खूनी नागा, हरिद्वार में 3.बर्फानी नागा तथा नासिक में उपाधि पाने वाले को 4.खिचडिया नागा कहा जाता है। इससे यह पता चल पाता है कि उसे किस कुंभ में नागा बनाया गया है।

नागाओं के अखाड़ा पद : नागा में दीक्षा लेने के बाद साधुओं को उनकी वरीयता के आधार पर पद भी दिए जाते हैं। कोतवाल, पुजारी, बड़ा कोतवाल, भंडारी, कोठारी, बड़ा कोठारी, महंत और सचिव उनके पद होते हैं। सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पद सचिव का होता है।

13 अखाड़े : तेरह अखाड़ों में से जूना अखाड़ा इनका खास अखाड़ा है। इसके अलवा अग्नि अखाड़ा, आह्वान अखाड़ा, निरंजनी अखाड़ा, आनंद अखाड़ा, महानिर्वाणी अखाड़ा एवं अटल अखाड़ा आदि सभी शैव से संबंधित है। वैष्णवों में बैरागी, उदासीन, रामादंन और निर्मल अखाड़ा प्रमुख है।

उत्पति एवं इतिहास[संपादित करें]

आदि गुरु शंकराचार्य ने धर्म की हानी रोकने के लिए इस समाज की स्थापना की थी

गोस्वामी समाज को ऋषियों की संतान भी कहा जाता है 10 नाम गोस्वामी समाज के 10 उच्च जातियों के चार अलग-अलग ऋषि है

1.गिरि 2.पर्वत और 3.सागर। इनके ऋषि हैं भ्रुगु।
4.पुरी 5.भारती और 6.सरस्वती। इनके ऋषि हैं शांडिल्य।
7.वन और 8.अरण्य के ऋषि हैं कश्यप।
9.तीर्थ और 10. आश्रम के ऋषि अवगत हैं।

उन्नीसवीं सदी के पूर्वार्ध में अंग्रेजों के शासनकाल में शैव गोसाइयों ने शस्त्र धारण कर लिए थे। ये लोग मराठों की फौज में भी भर्ती हुए थे। वैराग्य धारण करने के बाद साधु हो जाने के बावजूद जो लोग पुनः ग्रहस्थाश्रम में लौट आते हैं उनके वंशजों को भी गोसाई या गुसॉंईं कहा जाता है।