सोलारिस (उपन्यास)

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कथा में सोलारिस समुद्र से पूरा ढका दो सूर्यों वाला एक ग्रह था (एक सूर्य लाल था और दूसरे का रंग नीला )

सोलारिस (अंग्रेज़ी: Solaris) सन् 1961 में पोलिश विज्ञान कथा लेखक स्तानिस्लाव लॅम द्वारा लिखा गया एक उपन्यास है, जिसमें मनुष्यों और एक अमानुष जीव के बीच सम्पर्क और प्रकारांतर से इस सम्पर्क की निष्फलता को दिखाया गया है।

इस काल्पनिक कथा में मनुष्य 'सोलारिस' नामक एक ग्रह का अध्ययन कर रहे हैं। वे ग्रह के इर्द-गिर्द कक्षा में परिक्रमा करते एक बड़े अंतरिक्ष यान को अड्डा बनाकर उसमें रह रहे हैं। उस ग्रह पर एक समुद्र फैला हुआ है जिसमें अजीब-अजीब सी चीज़ें होती रहतीं हैं, जैसे कभी विचित्र आकार के तैरते हुए द्वीप बन जाते हैं। धीरे-धीरे इस बात का खुलासा होता है कि पूरा ग्रह ही एक जीवित 'प्राणी' है। जिस तरह से मनुष्य उस पर शोध कर रहे हैं, वैसे ही वह मनुष्यों पर शोध आरम्भ कर देता है। उसमें मनुष्यों के विचारों को पढ़ने और उनके डरों और आशाओं को भांपने की क्षमता है। एक-एक कर के वह यान के सभी वैज्ञानिकों के विचारों से खिलवाड़ करता रहता है। मुख्य पात्र (क्रिस कॅल्विन) की एक प्रेमिका थी जिसकी मृत्यु हो चुकी थी। सोलारिस उसी रूप की एक स्त्री को यान पर प्रकट कर देता है, जिस से उस नायक को गहरे असमंजस से गुज़रना पड़ता है।

फ़िल्में[संपादित करें]

सोलारिस पर आधारित तीन फ़िल्में बन चुकीं हैं:

  • 1968 में सोवियत संघ में टेलिविज़न के लिए बनी फिल्म, जिसका निर्देशन बोरिस निरेन्बर्ग ने किया था।[1][2]
  • 1972 में सोवियेत संघ में ही आन्द्रेइ तार्कोव्स्की (Андрей Тарковский) द्वारा निर्देशित फिल्म। इसने 1972 के कान फ़िल्मोत्सव में "ग्रां प्री" (Grand Prix) पुरस्कार जीता था।
  • 2002 में अमेरिका में स्टीवन सोडरबर्ग (Steven Soderbergh) द्वारा निर्देशित फिल्म।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]