शालिवाहन युग
शालिवाहन युग जिसे शक् युग के रूप में भी जाना जाता हैं, हिंदू कैलेंडर, भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर, और कम्बोडियन बौद्ध कैलेंडर के संदर्भ के रूप मे प्रयोग किया जाता है। माना जाता है कि इसकी शुरुआत वर्ष 78 के वसंत विषुव के आसपास हुई थी।[तथ्य वांछित]
शालिवाहन राजा, शालिवाहन (जिसे कभी कभी गौतमीपुत्र शताकर्णी के रूप में भी जाना जाता है) को शालिवाहन शक् युग की शुरुआत का श्रेय दिया जाता है जब उसने वर्ष 78 में उज्जैनी के नरेश विक्रमादित्य को युद्ध मे हराया था और इस युद्ध की स्मृति मे उसने इस युग को आरंभ किया था।[तथ्य वांछित]
एक मत है कि, शक् युग उज्जैन, मालवा के राजा विक्रमादित्य के वंश पर शकों की जीत के साथ शुरु हुआ। इस जीत के बाद, शकों ने उस पश्चिमी क्षत्रप राज्य की स्थापना की जिसने तीन से अधिक सदियों तक इस क्षेत्र पर शासन किया।[1]
सन 1633 तक इसे जावानीस अदालतों द्वारा भी प्रयुक्त किया जाता था, पर उसके बाद इसकी जगह अन्नो जावानिको ने ले ली जो जावानीस और इस्लामी व्यवस्था का मिला जुला रूप था।[2]