विपणन

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द्तुघ्ह्

विपणन एक सतत प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत मार्केटिंग मिक्स (उत्पाद, मूल्य, स्थान, प्रोत्साहन जिन्हें प्रायः ४ Ps कहा जाता है) की योजना बनाई जाती है एवं कार्यान्वयन किया जाता है. यह प्रक्रिया व्यक्तियों और संगठनों के बीच उत्पादों , सेवाओं या विचारों के विनिमय हेतु की जाती है.

विपणन को एक रचनात्मक उद्योग के रूप में देखा जाता है, जिसमें शामिल हैं विज्ञापन (advertising), वितरण (distribution) और बिक्री (selling) इसका सम्बन्ध ग्राहकों की भावी आवश्यकताओं और आकांक्षाओं का पूर्व विचार करने से भी है, जो प्रायः बाज़ार शोध के माध्यम से पता लगाई जाती हैं.

मूलतः , विपणन किसी संगठन को बनाने या निर्देशित करने करने की प्रक्रिया है, ताकि लोगों को सफलतापूर्वक वह उत्पाद या सेवा बेची जा सके जिसकी न केवल उन्हें ज़रूरत है बल्कि वे उसे खरीदने के इच्छुक भी हैं.

इसलिए अच्छा विपणन इस काबिल होना चाहिए कि वह उपभोक्ताओं हेतु एक "प्रस्ताव" या लाभों का सेट बना सके, ताकि उत्पादों या सेवाओं के माध्यम से ग्राहक को उसके पैसे का मूल्य अदा किया जा सके.

इसके विशेषज्ञ क्षेत्रों में शामिल हैं :


परिचय

एक बाज़ार केंद्रित या उपभोक्ता केंद्रित संगठन पहले यह तय करता है की उसका संभावित ग्राहक चाहता क्या है और तब उत्पाद (product) या सेवा की रचना की जाती है. जब ग्राहक किसी उत्पाद या सेवा को ज़रूरत होने पर इस्तेमाल करता है या उसे कोई कथित लाभ हासिल होता है, तो विपणन सिद्धांत और व्यवहार न्यायोचित माना जाता है.

विपणन के दो प्रमुख घटक हैं- नए ग्राहकों को शामिल करना (अधिग्रहण) तथा मौजूदा ग्राहकों को बनाए एवं उनके साथ संबंधों का विस्तार करना (आधार प्रबंधन). एक बार जब विक्रेता (marketer) आने वाले खरीदार को अपना ग्राहक बना लेता है तो आधार प्रबंधन शुरू हो जाता है. आधार प्रबंधन के तहत जो प्रक्रिया आरम्भ होती है उसमें विक्रेता अपने ग्राहक के साथ रिश्ते विकसित करता है, संबंधों को पोषण देता है, दिए जा रहे फायदों में ईज़ाफा करता है और अपने उत्पाद/सेवा को निरंतर बेहतर बनाता है ताकि उसका व्यापार प्रतिस्पर्धियों से सुरक्षित रहे.

विपणन योजना (marketing plan) की सफलता के लिए ४ Ps (four "Ps") का मिश्रण उपभोक्ताओं (consumer) या लक्षित बाज़ार (target market) की मांगों व ज़रूरतों में प्रतिबिंबित होना चाहिए. एक बाज़ार खंड (market segment) को वह खरीदने के लिए राज़ी करना जिसकी उन्हें ज़रूरत नहीं, बहुत ही खर्चीला काम है और शायद ही कभी सफल होता है. विपणक, औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरह के विपणन अनुसंधान (marketing research) से प्राप्त जानकारी पर निर्भर करते हैं और यह तय करते हैं की ग्राहक क्या चाहता है और उसके लिए कितना भुगतान करने का इच्छुक है. विपणक आशा करते हैं की इस प्रक्रिया से उन्हें एक सतत् प्रतियोगी लाभ (sustainable competitive advantage) हासिल होगा. विपणन प्रबंधन (Marketing management) इस प्रक्रिया हेतु व्यावहारिक अनुप्रयोग है. प्रस्ताव भी ४ Ps सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण अंग है.

अमेरिकी विपणन संघ (American Marketing Association) (AMA) के अनुसार, "विपणन एक संगठनात्मक कार्य और प्रक्रियाओं का एक समूह है जिससे ग्राहक बनाये जाते हैं, उनसे संप्रेषण किया जाता है और उन्हें उपयोगिता प्रदान की जाती है तथा उपभोक्ता से रिश्ते बनाये जाते हैं ताकि संगठन एवं उसके हितधारकों को लाभ मिले.

विपणन के तरीकों की सूचना कई सामाजिक विज्ञानों (social science) में दी गयी है खासकर मनोविज्ञान, समाजशास्त्र (sociology), और अर्थशास्त्र में. मानव शास्त्र का प्रभाव भी छोटा लेकिन बढ़ता हुआ है. बाज़ार अनुसंधान इन गतिविधियों को मज़बूती देता है. विज्ञापन (advertising) के माध्यम से विपणन कई रचनात्मक (creative) कलाओं से भी जुड़ता है. विपणन एक विस्तृत एवं कई प्रकाशनों से बड़े स्तर पर परस्पर सम्बद्ध विषय है . यह समय व संस्कृति के अनुसार ख़ुद को और अपनी शब्दावली को नए तरीके से दुबारा गढ़ने के लिए कुख्यात है.

अनुक्रम

विपणन की अवधारणा[संपादित करें]

"विपणन" एक जानकारी देने वाला व्यावसायिक कार्य है जो लक्ष्य किए जा रहे बाज़ार को कंपनी व उसके उत्पादों के प्रतिस्पर्धात्मक लाभ एवं कीमत के बारे सूचित व शिक्षित करता है. मूल्य (Value) वह कीमत है जो ग्राहक किसी उत्पाद का मालिक बनने या उसको इस्तेमाल करने के लिए चुकाता है. "प्रतिस्पर्धात्मक लाभ (Competitive Advantage)" इस बात को दर्शाता है की कंपनी या उसके उत्पाद दोनों अपने प्रतिद्वंदी से बेहतर ऐसा कुछ कर रहे हैं जिससे उपभोक्ता को फायदा पहुंचे.

विपणन का केंद्र कंपनी तथा उत्पाद संबन्धी सूचनाएं निश्चित ग्राहकों तक पहुंचाने पर रहता है. विपणन कार्य में कई निर्णय (रणनीतियां) किए जाते हैं की कौन सी सूचना देनी है, कितनी सूचना देनी है, किसको देनी है, कैसे देनी है और कहां देनी है. एक बार फैसले कर लिए जाएँ तो ऐसे कई तरीके (युक्तियाँ) और प्रक्रियाएं हैं जिन्हें चुनिन्दा रणनीतियों के समर्थन में लागू किया जा सकता है.

विपणन क्या है? में क्रिस न्यूटन कहते हैं विपणन को अक्सर गलतफहमी में विज्ञापन या बिक्री समझ लिया जाता है. ( विपणन सहायता ऑनलाइन , २००८ ) में विपणन को उन सभी रणनीतियों एवं निर्णयों के रूप में परिभाषित किया गया है जो निम्नलिखित बारह क्षेत्रो में तय किए जाते हैं:

  • बाज़ार में आवश्यकता की पहचान एवं परिमाणित करना.
  • लक्षित बाजारों (target markets) की पहचान एवं परिमाण मालूम करना.
  • लक्षित बाजारों तक पहुँचने हेतु इष्टतम लागत वाले प्रभावी मीडिया - ऑनलाइन और ऑफलाइन- की पहचान करना.
  • समग्र उत्पाद मिश्रण ' मैट्रिक्स ' में प्रस्तुत उत्पाद की प्राथमिकताओं की समीक्षा करना.


  • सबसे प्रभावी वितरण चैनलों की पहचान और विकास करना चाहे वह थोक व्यापारियों का नेटवर्क हो, साझेदारी गठबंधन हों, फ्रेंचाईजिंग (franchising) हो या बाज़ार के अन्य रास्ते हों.
  • 'आसानी से बेचे जा सकने' वाले रूप को तय करने के लिए अवधारणा या उत्पाद की विभिन्न तरीकों से पैकेजिंग का परीक्षण करना.
  • इष्टतम मूल्य निर्धारण रणनीतियों को खोजने हेतु परीक्षण.
  • कारगर प्रचारक रणनीतियां और प्रभावी विज्ञापन और सहयोगी समानांतर, पेशकशों, और लॉन्च की रणनीतियों का विकास करना.
  • बिक्री की प्रक्रिया का विकास एवं दस्तावेज़ बनाना.
  • बिक्री प्रक्रिया के इष्टतम निष्पादन की खोज करना, इन सब के ज़रिये - बिक्री प्रलेखों का परीक्षण, लोगों का चुनाव, संपार्श्विक सहयोग, कौशल व रवैये का प्रशिक्षण, ट्रैकिंग, मापन व परिष्कार.
  • यह सुनिश्चित करना की बिक्री के अनुमान वास्तविक उत्पादन क्षमता दर्शायें
  • ग्राहक के आजीवन उपयोग हेतु पोषण कार्यक्रम विकसित करना.

[1]

विपणन का ध्येय है कंपनी और उसके उत्पादों के लिए लक्षित बाजारों में प्राथमिकता का निर्माण करना तथा उसे बनाये रखना. किसी भी कारोबार का अभिप्राय होता है अपने ग्राहकों के साथ परस्पर लाभकारी एवं स्थायी संबंधों का निर्माण करना. हालांकि व्यापार के सभी क्षेत्र इसी ध्येय की प्राप्ती के लिए उत्तरदायी होते हैं, किंतु विपणन पर सबसे अधिक इसकी जिम्मेदारी होती है.

इसकी परिभाषा को बड़े दायरे में देखा जाए तो विपणन कार्य तीन विषयों के समन्वय से होता है: "उत्पाद विपणन (Product Marketing)", "कॉर्पोरेट विपणन (Corporate Marketing)" और, "विपणन संचार (Marketing Communications)" .

विपणन के दो स्तर[संपादित करें]

रणनीतिक विपणन : यह निर्धारित करने का प्रयास की एक संगठन बाज़ार में अपने प्रतिद्वंदियों से कैसे मुकाबला करे. विशेष रूप से , इसका उद्देश्य अपने प्रतियोगियों के सापेक्ष एक लाभदायक बढ़त लेना है.

परिचालन संबन्धी विपणन: ग्राहकों को आकर्षित करना व उन्हें बनाये रखना है और उनके लिए अधिक से अधिक उपयोगी होना है. साथ ही तत्पर सेवाओं द्वारा ग्राहक को संतुष्ट करना और उसकी अपेक्षाओं पर खरा उतरना है. परिचालन संबन्धी विपणन में शामिल हैं पोर्टर के पाँच बलों का निर्धारण

चार Ps[संपादित करें]

१९६० के दशक के आरम्भ में, प्रोफ़ेसर नील बोर्डेन ने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल (Harvard Business School) में कंपनी के ऐसे कार्यों की पहचान की जो उत्पाद या सेवाएं खरीदने के ग्राहक के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं. बोर्डेन ने यह सुझाया कि कंपनी द्वारा उठाये जाने वाले वे सभी कदम "विपणन मिश्रण" हैं. प्रोफेसर ई.जेरोम मैकार्थी, भी हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से थे, उन्होंने १९६० के दशक की शुरुआत में सुझाया की विपणन मिश्रण में ४ तत्वों का समावेश है: उत्पाद, मूल्य, स्थान और संवर्धन.

आम चलन में "विपणन" उत्पाद का प्रचार है, विशेषकर विज्ञापन (advertising) और ब्रांडिंग (brand) किंतु, व्यावसायिक उपयोग में इसका अर्थ विषद है जिसका मतलब है की विपणन ग्राहक-केंद्रित है. उत्पादों का विकास ग्राहकों के एक समूह या कुछ मामलों में कुछ ख़ास ग्राहकों की आवश्यकताओं की पूर्ती हेतु किया जाता है. ई.जेरोम मैकार्थी (E. Jerome McCarthy) ने विपणन को चार सामान्य गतिविधियों के समूहों में बांटा. उनकी टाईपोलोजी को दुनिया भर में इतनी मान्यता हासिल हुई की उनके "चार P" भाषा का हिस्सा बन गए हैं.

ये चार Ps हैं:

  • उत्पाद (Product): विपणन का उत्पाद संबन्धी पहलू वास्तविक माल या सेवाओं के ब्यौरे के बारे में की यह कैसे अन्तिम-उपयोगकर्ता (end-user) की ज़रूरतों एवं मांगों से सम्बंधित है. एक उत्पाद के दायरे में कुछ सहयोगी तत्व भी आते हैं जैसे वारंटी, गारंटी और सपोर्ट
  • मूल्य निर्धारण (Pricing): का आशय किसी उत्पाद का एक मूल्य (price) निर्धारित करने से है, जिसमें छूट भी शामिल होती है. ज़रूरी नही की मूल्य, मुद्राओं में ही हो - यह उस उत्पाद या सेवा के बदले में दी जा सकने वाली कोई चीज़ हो सकती है जैसे समय, ऊर्जा, मनोविज्ञान या ध्यान.
  • संवर्धन (Promotion): इसमें शामिल हैं विज्ञापन (advertising), बिक्री संवर्धन (sales promotion), प्रचार (publicity), और व्यक्तिगत बिक्री (personal selling), ब्रांडिंग (branding) और उत्पाद, ब्रांड (brand), या कंपनी के संवर्धन हेतु विभिन्न पद्धतियाँ.
  • नियोजन (या वितरण (distribution)): से तात्पर्य है की उत्पाद किस तरह उपभोक्ता तक पहुंचेगा; उदाहरण के लिए बिक्री व्यवस्था का बिन्दु या खुदरा बिक्री (retailing). इस चौथे P को कई बार स्थान भी कहा जाता है. इसका तात्पर्य है कि किस चैनल के ज़रिये एक उत्पाद या सेवाओं को बेचा जाएगा (जैसे ऑनलाइन बनाम खुदरा), कौन से भौगोलिक क्षेत्र या उद्योग में , किस खंड को (युवा व्यस्क, परिवार, व्यवसायी लोग) आदि इसके अलावा यह भी की जिस वातावरण में उत्पाद बेचा जाएगा वह कैसे बिक्री को प्रभावित कर सकता है.

ये चार तत्व विपणन मिश्रण (marketing mix), के तौर पर जाने जाते हैं [2]जिनका उपयोग एक विक्रेता विपणन योजना (marketing plan) बनाने के लिए करता है. कम कीमत के उपभोक्ता उत्पाद के विपणन में चार P का मॉडल सबसे अधिक काम आता है. औद्योगिक उत्पादों , सेवाओं , उच्च मूल्य के उपभोक्ता उत्पादों के मामले में इस मॉडल में समायोजन करना पड़ता है. सेवा विपणन (Services marketing) बेजोड़ किस्म की सेवाओं के लिए होना चाहिए. औद्योगिक या B२B (B2B) विपणन, उन दीर्घकालीन अनुबंधों के लिए होना चाहिए जो आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) के मामलों में विशिष्ट हों. संबंधों का विपणन (Relationship marketing) में विपणन को दीर्घकालीन संबंधों के परिप्रेक्ष्य में देखा जाता है बजाय व्यक्तिगत व्यवहार के.

इसके विरुद्ध मॉर्गन ने राईडिंग द वेव्स ऑफ़ चेंज (जोसे-बास, १९८८), में सुझाया कि ४ Ps दृष्टिकोण की एक सबसे बड़ी खामी यह है की "यह अनजाने में ही भीतर की ओर ज़ोर देता है, जबकि विपणन का सार बाहर को ओर होना चाहिए". फिर भी ४ Ps विपणन कार्य की प्रमुख श्रेणियों हेतु एक याद रहने एवं काम करने योग्य मार्गदर्शिका व ढाँचे के तौर पर मददगार हैं जिसके तहत इन्हें इस्तेमाल किया जा सकता है.

(7) सात Ps[संपादित करें]

पहले से मौजूद चार(4) Ps (उत्पाद , मूल्य निर्धारण संवर्धन और स्थान) के अलावा सेवाओं के विपणन में तीन अतिरिक्त शीर्षक जोड़े गए हैं जिन्हें विस्तृत विपणन मिश्रण कहा जाता है. ये हैं:

  • लोग (People): कोई भी व्यक्ति जो ग्राहक के संपर्क में आ रहा है वह उसके समग्र संतोष को प्रभावित कर सकता है. चाहे लोग एक उत्पाद की सहयोग सेवा से जुड़े हों या फिर पूर्ण सेवा में शामिल हों, लोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ग्राहक की नज़र में में उन्हें पूरी सेवा से अलग कर के नही देखा जाता. इसलिए उन्हें समुचित तौर पर प्रशिक्षित (trained), ठीक तरह से अभिप्रेरित (motivated) और सही किस्म का इंसान होना चाहिए. कई बार ग्राहकों को भी "लोग" शीर्षक के अंतर्गत ले लिया जाता है क्योंकि वे भी उपभोक्ता के सेवा अनुभव को प्रभावित कर सकते हैं, (उदहारण स्वरुप खेल आयोजन).
  • प्रक्रिया (Process): इसमें वे प्रक्रियाएं शामिल हैं जो सेवा देती हैं तथा लोगों का व्यवहार (behaviour) जो की ग्राहक संतुष्टि (customer satisfaction) में अहम होता है.
  • भौतिक साक्ष्य (Physical evidence): एक उत्पाद के विपरीत एक सेवा को तब तक अनुभव नही किया जा सकता जब तक की वह हासिल न हो जाए, यही बात इसे अमूर्त (intangible) बनाती है. इसलिए इसका मतलब यह है की एक उपभोक्ता को सेवा के प्रयोग हेतु निर्णय करते वक्त अधिक जोखिम होता है. जोखिम की इस भावना को कम करने के लिए और सफलता की सम्भावना को बढ़ाने हेतु यह महत्वपूर्ण होता है की सक्षम (potential) ग्राहक को यह देखने का मौका दिया जाए की सेवा कैसी होगी. ऐसा भौतिक साक्ष्य दे कर किया जाता है जैसे मामलों का अध्ययन (case studies), प्रशंसापत्र (testimonials) या प्रदर्शन (demonstrations).

चार नए Ps[संपादित करें]

  • निजीकरण : यहाँ इसका तात्पर्य उत्पादों और सेवाओं को इन्टरनेट के इस्तेमाल द्वारा अनुकूल बनाने से है. इसके आरंभिक उदहारण हैं डैल ऑन-लाइन तथा Amazon.com, लेकिन यह अवधारणा सामाजिक मीडिया एवं आधुनिक कलनविधि के उभरने से और आगे बढ़ी. उभरती तकनीकें इस विचार को आगे बढाती रहेंगी.
  • भागीदारी : यह ग्राहक को इन बातों में भागीदार बनाने के लिए है की ब्रांड किसके लिए होना चाहिए, उत्पाद की दिशायें क्या होनी चाहिए और यहाँ तक की कौन से विज्ञापन चलने चाहिए. यह अवधारणा सूचना के लोकतंत्रीकरण के ज़रिये विघटनकारी बदलाव की नींव रख रही है.
  • साथियों से साथियों तक:यह ग्राहक के नेटवर्क एवं समुदाय सम्बंधित है, जिनके बीच सलाह मशविरा चलता है. विपणन के साथ एक ऐतिहासिक दिक्कत यह है की "रुकावटी" प्रकृति का होता है, उपभोक्ता पर ब्रांड को थोपना चाहता है. यह टीवी विज्ञापन में सबसे स्पष्ट है ."निष्क्रिय ग्राहकों की जमात" का स्थान अंतत: "सक्रिय ग्राहकों के समुदाय" ले लेंगे. ब्रांड का काम उन्हीं वार्तालापों के मध्य होता है. P२P को अब सामाजिक कंप्यूटिंग के रूप में देखा जा रहा है और यह भावी विपणन में सबसे अधिक विघटनकारी शक्ति होगी.
  • प्रागाक्ति मॉडलिंग :इनसे तात्पर्य उन कलनविधियों से है जो विपणन समस्याओं में सफलता पूर्वक लागू की जाती हैं (प्रतिगमन एवं श्रेणीबद्ध समस्यायें दोनों)

उत्पाद[संपादित करें]

मौके[संपादित करें]

  • विस्तार -- उत्पाद श्रंखला की संख्या एक रेंज में.
  • गहराई -- उत्पाद आईटमों की संख्या एक उत्पाद श्रंखला में.

उत्पाद डिजाइन का क्रम =[संपादित करें]

  • उत्पाद विचारों की रचना एवं विकास
  • उत्पाद विचारों के द्वारा चुनाव एवं छानना
  • उत्पाद कांसेप्ट की रचना और परीक्षण.
  • उत्पाद कांसेप्ट के बजाय बिज़नस का विश्लेषण करना.
  • भावनात्मक उत्पाद की रचना और परीक्षण.

पैकेजिंग[संपादित करें]

अच्छी पैकेजिंग की जरूरतें[संपादित करें]

  • कार्यात्मक -- सामग्री की प्रभावी ढंग से संभाल व सुरक्षा
  • वितरण, बिक्री, खोलने, उपयोग, पुनः प्रयोग आदि के दौरान सुविधा प्रदान करे.
  • पर्यावरण की दृष्टि से जिम्मेदार हो
  • किफायती हो.
  • लक्षित बाज़ार हेतु ठीक से डिजाईन किया गया हो
  • नज़रों पर छा जाने वाला हो (खासकर रिटेल/ कंज्यूमर सेल में)
  • उत्पाद तथा पैकेज की विशेषताओं को सूचित और उनके इस्तेमाल की सिफ़ारिश करे
  • खुदरा विक्रेताओं की आवश्यकताओं के मुताबिक हो
  • उद्यम की छवि को बढ़ावा दे
  • प्रतियोगियों के उत्पादों से अलग नज़र आए
  • उत्पाद व पैकेजिंग की कानूनी शर्तों का पालन करे
  • सेवा और उत्पाद आपूर्ति में अन्तर बिन्दु
  • आदर्श उत्पाद, आदर्श रंग के लिए.

पैकेजिंग के प्रकार[संपादित करें]

  • विशेषता पैकेजिंग -- उत्पाद की विशिष्ट छाप पर ज़ोर देती है
  • दोहरे उपयोग हेतु पैकेजिंग
  • युग्म पैकेजिंग दो या अधिक उत्पाद एक ही कंटेनर में
  • बहुरूपदर्शी पैकेजिंग --एक श्रंखला या ख़ास थीम को दर्शाते हुए पैकेजिंग लगातार बदलती जाती है
  • तत्काल खपत हेतु पैकेजिंग -- उपयोग के पश्चात फेंक दी जाती है
  • पुनः बिक्री हेतु पैकेजिंग -- खुदरा व थोक व्यापारी के लिए उचित मात्रा में पैकिंग

ट्रेडमार्क[संपादित करें]

ट्रेडमार्क का महत्व[संपादित करें]

  • एक कंपनी के माल को दूसरी कंपनी के माल से अलग करता है
  • गुणवत्ता के लिए विज्ञापन का काम करता है
  • उपभोक्ताओं और निर्माताओं दोनों को सुरक्षित रखता है
  • प्रदर्शन और विज्ञापन अभियानों में प्रयुक्त होती है
  • नए उत्पादों को बाज़ार में उतारने के लिए काम आती है

ब्रांड्स[संपादित करें]

ब्रांड एक नाम, शब्द, डिज़ाइन, प्रतीक या कोई अन्य विशेषता है जो किसी उत्पाद या सेवा को प्रतिस्पर्धी के प्रस्ताव से अलग करता है. एक ब्रांड किसी संगठन, उत्पाद या सेवा के प्रति उपभोक्ता के अनुभव का प्रतिनिधित्व करता है.

ब्रांड को एक पहचाने जाने योग्य सत्ता के रूप में भी परिभाषित किया जाता है जो एक विशिष्ट मूल्य का वादा करती हैं.

सह - ब्रांडिंग (Co-branding) में विपणन गतिविधियाँ शामिल होती हैं जिसमें दो या अधिक उत्पाद होते हैं.

मूल्य निर्धारण[संपादित करें]

मूल्य निर्धारण से आशय उस पैसे से है जो एक उत्पाद के बदले दिया जाता है. यह मूल्य वस्तु की उपयोगिता से निर्धारित होता है की ग्राहक उसके बदले में कितने पैसे और/या बलिदान देने को तैयार है.

उद्देश्य[संपादित करें]

  • बिक्री का परिमाण बढ़ता है
  • राजस्व में वृद्धि
  • लाभ प्राप्ति होती है या लाभ बढ़ता है
  • शेयर बाजार में वृद्धि या बनाए रखना
  • प्रतियोगिता मिटती है
  • बड़े पैमाने पर उत्पादन के लाभ मिलते हैं

मूल्य निर्धारण को प्रभावित करने वाले घटक[संपादित करें]

मूल्य निर्धारित करने के लिए कदम[संपादित करें]

  • निर्धारित शेयर बाजार का अधिग्रहण करना
  • मूल्य रणनीति तय करना
  • मांग का अनुमान लगाना
  • प्रतिद्वंद्वियों की प्रतिक्रिया का मूल्यांकन

वितरण (स्थान)[संपादित करें]

चैनल[संपादित करें]

  • निर्माता से उपभोक्ता (सबसे प्रत्यक्ष)
  • निर्माता से थोक व्यापारी को, उससे खुदरा व्यापारी को और उससे ग्राहक को (पारंपरिक)
  • निर्माता से एजेंट को , उससे खुदरा व्यापारी और फिर ग्राहक (वर्तमान)
  • निर्माता से एजेंट को , उससे थोक व्यापारी को, उससे खुदरा व्यापारी और फिर ग्राहक को
  • निर्माता से एजेंट को और उससे ग्राहक को (उदाहरण: एमवे)

निर्माता[संपादित करें]

प्रत्यक्ष बिक्री विधियों के कारण[संपादित करें]

  • निर्माता उत्पादों को प्रदर्शित करना चाहता है
  • थोक व्यापारी, खुदरा विक्रेता और एजेंट बिक्री में सक्रिय नहीं होते.
  • निर्माता थोक व्यापारियों और खुदरा विक्रेताओं को उत्पाद का स्टॉक करने के लिए समझा नहीं पाता.
  • थोक व्यापारी और खुदरा विक्रेता माल में उच्च लाभ के लिए मार्जिन जोड़ देते हैं.
  • बिचौलिए माल की ढुलाई नहीं कर पाते.

अप्रत्यक्ष बिक्री के कारण[संपादित करें]

  • निर्माता के पास माल का वितरण करने हेतु वित्तीय संसाधन नहीं होते.
  • वितरण चैनल पहले ही स्थापित होते हैं.
  • निर्माता को कुशल वितरण का ज्ञान नहीं होता.
  • निर्माता अपनी पूंजी का प्रयोग और अधिक उत्पादन के लिए करना चाहता है.
  • बहुत बड़े क्षेत्र में बहुत से ग्राहकों के होने से पहुँचना मुश्किल हो जाता है.
  • निर्माता के पास उत्पादों का विस्तृत वर्गीकरण नहीं होता कि वह कुशल विपणन कर सके.
  • प्रत्यक्ष ऑन सेलिंग के लाभ

थोक व्यापारी[संपादित करें]

थोक व्यापारियों का उपयोग करने के कारण[संपादित करें]

  • खुदरा विक्रेता या ग्राहक को माल बेचने का जोखिम उठाता है
  • संग्रहण स्थान
  • परिवहन लागत घटती है
  • खुदरा विक्रेताओं को ऋण अनुदान
  • निर्माताओं के लिए बिक्री करने में सक्षम
  • निर्माताओं को सलाह दें
  • उत्पादों को छोटी मात्राओं में बाँट दें

थोक व्यापारी को दरकिनार करने के कारण[संपादित करें]

  • सीमित भण्डारण सुविधायें
  • खुदरा विक्रेता की वरीयताएँ
  • थोक व्यापारी उत्पादों को सफलतापूर्वक प्रोमोट नहीं कर सकता
  • थोक व्यापारी के अपने ब्रांड
  • नजदीकी बाज़ार से संपर्क की इच्छा
  • अधिकार की स्थिति
  • थोक व्यापारी की सेवाओं की लागत
  • मूल्य स्थिरीकरण
  • त्वरित वितरण की आवश्यकता
  • ज़्यादा कमाई

थोक व्यापारी को दरकिनार करने के तरीके[संपादित करें]

  • बिक्री कार्यालय एवं शाखाएं
  • डाक आदेश
  • खुदरा विक्रेताओं को सीधी बिक्री
  • यात्रा अभिकर्ता
  • प्रत्यक्ष आदेश

अभिकर्ता[संपादित करें]

  • कमीशन एजेंट हर उस व्यक्ति के लिए काम करते हैं जो उनकी सेवाएं चाहता है. वे किसी भी माल के स्वामी नहीं होते किंतु वे डेल क्रेडर (del credere) कमीशन पाते हैं.
  • बिक्री एजेंट अनुबंध के आधार पर काम करते हैं और उत्पादक के सभी उत्पाद बेचते हैं. उन्हें कीमत और बिक्री के सम्बन्ध में सारे अधिकार होते हैं.
  • खरीद एजेंट उत्पादक और रिटेलर की ओर से माल खरीदते हैं. उन्हें खरीदने के काम का विशेष ज्ञान होता है.
  • दलाल की एक ख़ास उत्पाद की बिक्री में विशेषज्ञ होता है. वे दलाली प्राप्त करते हैं.
  • कारखाना प्रतिनिधि एक से अधिक निर्माताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं .वे एक विशिष्ट क्षेत्र के भीतर काम करते हैं और सम्बंधित लाइन का माल ही बेचते हैं किंतु कीमत व बिक्री के मामलों में उनके अधिकार सीमित होते हैं.

विपणन संचार[संपादित करें]

विपणन संचार रणनीति के हिसाब से विभिन्न श्रेणियों के लिए विपणन संदेश तैयार करता है और उन्हें तय लक्ष्य की ओर प्रेषित करता है. अजनबियों को ग्राहक में परिवर्तित करने के पृथक चरण होते हैं जो इस्तेमाल किए जाने वाले संचार माध्यम को नियंत्रित करते हैं.

विज्ञापन[संपादित करें]

  • विचारों की जन प्रस्तुतियों तथा अभिव्यक्ति प्रचार का सशुल्क रूप.
  • जनता पर लक्ष्य
  • निर्माता यह तय कर सकता है कि विज्ञापन में क्या जाएगा.
  • व्यापक एवं अव्यक्तिगत माध्यम

सफल विज्ञापन के कार्य और लाभ[संपादित करें]

  • विक्रेता का काम आसान हो जाता है
  • निर्माता को बताई गयी छवि को कायम बनाये रखने पर ज़ोर देता है
  • ग्राहक को झूठे दावों तथा घटिया उत्पादों से आगाह करता है और बचाता है.
  • निर्माता को बड़े पैमाने पर उत्पादन में समर्थ बनाता है
  • लगातार ताकीद
  • बिना रुकावट के उत्पादन एक सम्भावना
  • साख में वृद्धि
  • जीवन स्तर में वृद्धि (या फिर दृष्टिकोण)
  • लोकप्रियता बढ़ने के साथ कीमतों में गिरावट
  • निर्माता व थोक व्यापारी को प्रतिद्वन्द्वियों के उत्पाद एवं अपने उत्पाद की कमियों के बारे में जानकारी देता है.

उद्देश्य[संपादित करें]

  • मशहूर माल के लिए मांग बनाये रखता है
  • नए व अज्ञात माल का परिचय देता है
  • मशहूर माल / उत्पाद / सेवाओं की मांग को बढाता है

एक अच्छे विज्ञापन की आवश्यकताएँ[संपादित करें]

  • ध्यान आकर्षित करना (जागरूकता)
  • दिलचस्पी बढ़ाना
  • इच्छा उत्पन्न करना
  • कार्रवाई करवाना

एक विज्ञापन अभियान के आठ चरण[संपादित करें]

  • बाज़ार शोध
  • लक्ष्यों की स्थापना करना
  • बजटिंग
  • मीडिया का चुनाव (टेलिविज़न, अखबार, रेडियो)
  • अभिनेताओं का चुनाव (नया चलन)
  • डिजाइन और शब्द
  • समन्वय
  • परीक्षण के परिणाम

व्यक्तिगत बिक्री[संपादित करें]

किसी व्यक्ति या संभावित ग्राहकों के समूह को एप्रोच करने वाले सेल्स मैन द्वारा मौखिक प्रस्तुति:

  • सीधा , परस्पर सम्बन्ध
  • निजी हित
  • ध्यानाकर्षण और प्रतिक्रिया
  • दिलचस्प प्रस्तुति

बिक्री संवर्धन[संपादित करें]

उत्पाद की खरीद को बढावा देने हेतु अल्पकालिक इंसेंटिव

  • त्वरित अपील
  • बेचने की उत्कंठा

इसका एक उदाहरण है कूपन या एक बिक्री. लोगों को खरीदने के लिए प्रोत्साहन दिया जाता है, पर इससे ग्राहक विश्वास निर्माण नहीं होता और न ही भविष्य में दुबारा खरीदने के लिए प्रोत्साहित होता है.विक्रय वृद्धि की एक बड़ी खामी यह है कि प्रतिद्वंदियों द्वारा इसे आसानी से कॉपी किया जा सकता है. इसका इस्तेमाल करते हुए हमेशा अपने उत्पाद को दूसरो से भिन्न नहीं रखा जा सकता.

विपणन जन संपर्क[संपादित करें]

  • उत्पाद के पक्ष में रिपोर्ट देने वाली प्रेस विज्ञप्ति के ज़रिये मांग को बढावा देना.
  • उच्च स्तर की विश्वसनीयता
  • प्रभावी समाचार
  • उद्यम कि बेहतर छवि

ग्राहक पर ध्यान[संपादित करें]

आजकल कई कंपनियां अपने ग्राहकों पर ध्यान केंद्रित करती हैं. इसका मतलब यह है कि कंपनियों कि गतिविधियाँ एवं उत्पाद ग्राहकों कि मांग के अनुसार होते हैं. आम तौर पर यह तीन तरीकों से किया जाता है: ग्राहक चालित दृष्टिकोण, बाज़ार में परिवर्तन को पहचानने कि समझ और उत्पाद को अभिनव बनाने का दृष्टिकोण.

उपभोक्ता संचालित दृष्टिकोण के तहत उपभोक्ता की मांगें रणनीतिक विपणन फैसलों का निर्धारण करती हैं. कोई भी रणनीति तब तक नहीं अपनाई जाती जब तक की वह उपभोक्ता अनुसंधान परीक्षण में सफ़ल न हो जाए. एक उत्पाद का हर पहलू , जिसमें उत्पाद की प्रकृति भी शामिल है, वह भावी उपभोक्ता की ज़रूरतों से संचालित होता है. आरंभिक बिन्दु सदैव उपभोक्ता ही होता है. इसके पीछे तार्किक पहलू यह है की अनुसंधान एवं विकास कोष ऐसे उत्पाद को तैयार करने में नहीं खर्च करना चाहिए जिसे लोग खरीदना न चाहें. इतिहास गवाह है की कई उत्पाद प्रौद्योगिकी की अनोखी मिसाल होने के बावजूद बाज़ार में नहीं चले.[3]

इस ग्राहक केंद्रित विपणन के औपचारिक दृष्टिकोण को SIVA[4] के तौर पर जाना जाता है (समाधान, सूचना, मूल्य, पहुँच).मूलतः इस प्रणाली में ग्राहक पर फोकस करने के लिए चार P को नए नाम और नए शब्द दिए गए हैं.

SIVA मॉडल मांग/ ग्राहक केंद्रित संस्करण प्रदान करता है, जो विपणन प्रबंधन के मशहूर ४Ps आपूर्ति वाले मॉडल (उत्पाद , मूल्य , स्थान , संवर्धन) का विकल्प है.


उत्पाद -- > समाधान
संवर्धन -- > सूचना
मूल्य -- > मान
स्थान -- > पहुँच


SIVA मॉडल के चार तत्व हैं:

  1. समाधान : ग्राहक की समस्या/ ज़रूरत का समाधान कितना उपयुक्त है?
  2. सूचना : क्या ग्राहक समाधान के बारे में जानता है?यदि हाँ, किस से व् कैसे इतनी जानकारी प्राप्त करें की वह खरीद का फ़ैसला कर सके?
  3. मूल्य : क्या ग्राहक इस लेन -देन का मूल्य जानता है, यह उसे कितने में पड़ेगा, इसके क्या फायदे हैं, उसको क्या चुकाना होगा, इसके बदले में उसे क्या हासिल होगा?
  4. पहुँच : ग्राहक समाधान को कहाँ पा सकता है?कितनी आसानी से/ स्थानीय स्तर पर/ कितनी दूर जा कर वे खरीद सकते हैं और पा सकते हैं?

इस मॉडल का प्रस्ताव चेकिटन देव और डॉन शुल्टज़ ने मार्केटिंग मैनेजमेंट जर्नल ऑफ़ द अमेरिकन मार्केटिंग असोसिएशन में दिया था और उन्होंने मार्केट लीडर - द जर्नल ऑफ़ द मार्केटिंग सोसाइटी इन द UK में प्रस्तुत किया था.

यह मॉडल प्रमुख तौर पर ग्राहक पर फोकस करता है

उत्पाद फोकस[संपादित करें]

नवोत्पाद दृष्टिकोण में, कंपनी उत्पाद नवाचार का अनुसरण करती है, फिर उस उत्पाद हेतु बाज़ार विकसित करती है. उत्पाद नवाचार प्रक्रिया को संचालित करता है और विपणन अनुसन्धान यह तय करने के लिए किया जाता है की उस नए उत्पाद हेतु लाभदायक बाज़ार खंड मौजूद है. तर्क यह है की शायद ग्राहकों को नहीं मालूम की भविष्य में उनके पास क्या विकल्प मौजूद होंगे तो हमें यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए की वे हमको बताएं की वे भविष्य में क्या खरीदेंगे. तथापि , विपणक आक्रामक तरीके से उत्पाद नवाचार को अपना सकते हैं और उसका लाभ उठा सकते हैं. उत्पाद नवाचार दृष्टिकोण का पालन करते वक्त विपणक को यह तय कर लेना चाहिए की उनके पास विभिन्न एवं विविध उत्पाद नवाचार दृष्टिकोण हों. यह दावा किया जाता है की यदि थॉमस एडिसन (Thomas Edison) विपणन शोध पर निर्भर होते तो वे बिजली के बल्ब का आविष्कार करने की बजाय बड़े आकार की मोम बत्तियां बनाते. कई कंपनियां, जैसे अनुसंधान व विकास केंद्रित कंपनियां सफलतापूर्वक उत्पाद की नवीनता पर फोकस करती हैं (जैसे निनटेंडो (Nintendo) जो निरंतर वीडीओ गेम्स (Video games) खेलने का तरीका बदलती रहती है). कई शुद्धाचार भक्त इस पर संदेह करते हैं की क्या वाकई यह एक किस्म का विपणन अभिविन्यास है, क्योंकि उपभोक्ता अनुसंधान का दर्जा बाद में आता है. कुछ लोग तो यह प्रश्न उठाते हैं की क्या यह विपणन है.

  • विपणन में सामूहिक व्यवहार का प्रयोग.
द इकोनोमिस्ट (The Economist) ने हाल ही में रोम में हुए एक सम्मेलन की रपट दी, जो मानव के अनुकरण करने के व्यवहार के बारे में थी.[5]आवेग युक्त खरीदारी में बढ़त के मेकेनिज्म और झुंड वृत्ति के जैसे लोगो के खरीदारी करने के बारे में विचार बांटे गए. मूल विचार यह है की लोग मशहूर चीज़ों को ज़यादा खरीदेंगे और कई फीडबैक मेकेनिज्म इस्तेमाल किए जाते हैं जो उत्पाद के बारे में जानकारी को प्रसिद्द करते हैं, इसमें शामिल हैं स्मार्ट-कार्ट (smart-cart) तकनीक और रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान टैग (Radio Frequency Identification Tag) टेक्नोलोजी.प्रिंसटन (Princeton) का एक शोधकर्ता एक "swarm-moves" (झुंड का चलना) मॉडल लाया, जो सुपर मार्केट के लिए मुफीद है क्योंकि यह "बिना लोगों को छूट दिए बिक्री बढ़ा सकता है."बड़े खुदरा विक्रेताओं संयुक्त राज्य अमेरिका में Wal - Mart और ब्रिटेन में टेस्को (Tesco) ने २००७ के वसंत में तकनीक को टेस्ट करने की योजना बनाई.
"सामाजिक प्रभाव की ताक़त" पर अन्य हालिया अध्ययनों में शामिल है "एक नकली संगीत बाज़ार जहाँ १४,००० लोगों ने वे गाने डाउनलोड किए जो उन्होंने सुने भी नहीं थे" (कोलंबिया विश्वविद्यालय (Columbia University), न्यू यार्क); एक जापान की सुविधा स्टोर की चेन "डिपार्टमेन्ट स्टोर और शोध कंपनियों से हासिल बिक्री के आंकडों" के आधार पर उत्पादों का आर्डर देती है; मैसाचुसेट्स (Massachusetts) की एक कंपनी सामाजिक नेटवर्क को अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करती है; तथा ऑनलाइन खुदरा विक्रेता पहले से अधिक लोगों को जानकारी दे रहे हैं की "आपके जैसी सोच रखने वाले ग्राहकों के बीच कौन से उत्पाद लोकप्रिय हैं" (उदाहरण अमेज़न (Amazon), ई बे (eBay)).

यह भी देखिए[संपादित करें]


सम्बंधित सूचियाँ[संपादित करें]

विपणन लेखों की विषद सूची हेतु देखिये विपणन विषयों की सूची (List of marketing topics).

संदर्भ[संपादित करें]


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