विटिलिगो
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| विटिलिगो सफ़ेद दाग वर्गीकरण व बाहरी संसाधन |
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| आईसीडी-१० | L80. |
|---|---|
| आईसीडी-९ | 709.01 |
| ओ.एम.आई.एम | 193200 |
| रोग डाटाबेस | 13965 |
| मेडलाइन+ | 000831 |
| ई-मेडिसिन | derm/453 |
| एमईएसएच | D014820 |
विटिलिगो एक स्वतः असंक्रमणकारी स्थिति होती है जिसमें विरंजकता होती है। इससे शरीर पर जगह-जगह सफेद दाग हो जाते हैं, जो दूध के जैसे सफेद रंग के होते है। इससे शरीर की सामान्य संरचना और संवेदना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता तथा त्वचा पर पपड़ी नहीं जमती।लिकोडर्मा विटिलिगों का ही दूसरा नाम है। यूनानी भाषा के अनुसार लिको का मतलब सफेद और डर्मा का मतलब त्वचा होता है। इसे स्वतः प्रतिरोध-क्षमता संबंधी अनियमितताओं से जोड़ा जा सकता है।
कारण[संपादित करें]
त्वचा के मेलनोकाइट्स के क्षतिग्रस्त हो जाने की वजह से विटिलिगो होता है। विटिलिगो होने के कई कारण सामने आए हैं-
- शरीर की प्रतिरोध क्षमता प्रणाली मेनोकाइट्स को नुकसान पहुंचाती है। शरीर उसके संपर्क में आनेवाले तत्वों को बाहरी समझ कर रंजकों को नष्ट कर देती है (अधिकतर ऐसा समझा जाता है)।
- आनुवांशिक खराबियों की वजह से चोट आदि लगने के मामले में मेलनोकाइट्स संवेदी हो जाते हैं।
- असामान्य रूप से कार्य करने वाली नस संबंधी कोशिकाओं से विषैला पदार्थ उत्पन्न हो सकता है जो मेलोकाइट्स को नुकसान पहुंचा सकता है।
- स्वयं नष्ट करने वाले मोलनोकाइट्स जब रंजक निर्मित करते हैं तब विषैले उप उत्पाद निर्मित हो सकते है जो मेलनोकाइट्स को नष्ट कर देते हैं।
- अनुसंधानकर्ताओं का विश्वास है कि इन सभी सिद्धांतो के मिले जुले रूप से इसे और अच्छी तरह समझा जा सकता है।
बाहरी सूत्र[संपादित करें]
| विकिमीडिया कॉमन्स पर Vitiligo से सम्बन्धित मीडिया है। |
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