विज्ञान का दर्शन

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विज्ञान के दर्शन के अन्तर्गत विज्ञान (जिसमे प्राकृतिक विज्ञान तथा सामाजिक विज्ञान शामिल हैं) के दार्शनिक तथा तार्किक पूर्वधारणाओं, नींव तथा उनसे निकलने वाले परिणामों का अध्ययन किया जाता है।

इस प्रकार, विज्ञान के दर्शन मे निम्नलिखित विषयों पर ध्यान दिया जाता है: अभिधारणाओं का चरित्र एवं विकास, परिकल्पनाएं, तर्क एवं निष्कर्ष, जिस प्रकार विज्ञान मे इन्का उपयोग होता है; किस प्रकार से विज्ञान मे प्राकृतिक घटनाओं की व्याख्या तथा भविष्यवाणी होती है; वैज्ञानिक निष्कर्षों तक पहुंचने के लिए किस प्रकार के तर्क का प्रयोग होता है; वैज्ञानिक विधि का सूत्रीकरण, कार्यक्षेत्र और उसकी सीमाएँ; वे साधन जिनके द्वारा यह निर्धारित किया जाता है कि कब किसी वैज्ञानिक तथ्य को समुचित वस्तुनिष्ठ समर्थन प्राप्त है; तथा वैज्ञानिक विधि और नमूनों के प्रयोग के परिणाम।

वैज्ञानिक अभिधारणा तथा कथन[संपादित करें]

प्रेक्षण का सिद्धांत पर आश्रय[संपादित करें]

थॊमस कुह्न के अनुसार परीक्षण किये जा रहे सिद्धांत को उस सिद्धांत के प्रभाव से जिस पर प्रेक्षण आधारित हैं पृथक किया जाना असम्भव है।

परीक्षण द्वारा सिद्धांत की अनिर्धारणता[संपादित करें]