रेडियो आवृत्ति

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रेडियो आवृत्ति (RF) 3 हर्ट्ज़ से 300 गीगा हर्ट्ज़ की आवृत्ति तरंगों को कहते हैं । तदनुसार यह आवृत्ति वह है, जिस पर यदि प्रत्यावर्ती धारा की विद्युत तरंग बनाई जाए, तो वह रेडियो तरंगों को डिटेक्ट कर ले । क्योंकि अधिकतर इस रेंज की आवृत्ति, याँत्रिक प्रणालियों के द्वारा निर्माण योग्य नहीं हैं, अतः RF का तात्पर्य विद्युत परिपथों या विद्युतचुम्बकीय विकिरण में दोलन से ही होता है ।

विद्युत आकाशवाणीकी खास गुण[संपादित करें]

इन विद्युत संकेतों में कुछ खास गुण होते हैं, जो कि दिष्ट धारा संकेतों में नहीं पाइ जाती । ये वायु को आयनित कर उसके द्वारा एक चालक पथ का निर्माण कर लेते हैं । इस गुण के द्वारा आर्क वैल्डिंग की जाती है । एक अन्य गुण से, विद्युत चुम्बकीय शक्ति द्वारा विद्युत धारा को चालक के तार की सतह पर विद्युत धारा को भेजा जाता है, जिसे "छाल प्रभाव" या खाल प्रभाव भी कहते हैं। इनकी क्षमता रोधक से भी होकर जा पाने की होती है, जैसे संधारित्र का पारद्युतिक या । इन प्रभावों की कोटि , संकेतों की आवृत्ति पर निर्भर करती है ।

बाहरी कङियाँ[संपादित करें]


रेडियो वर्णक्रम
अत्यधिक निम्न आवृत्ति (ELF) परम निम्न आवृत्ति (SLF) अत्यन्त निम्न आवृत्ति (ULF) अति निम्न आवृत्ति (VLF) निम्न आवृत्ति (LF) मध्यम आवृत्ति (MF) उच्चावृत्ति (HF) अत्योच्चावृत्ति (VHF) अत्यन्त उच्चावृत्ति (UHF) परम उच्चावृत्ति (SHF) अत्यधिक उच्चावृत्ति (EHF)
3 Hz 30 Hz 300 Hz 3 किलो हर्ट्ज़ 30 किलो हर्ट्ज़ 300 किलो हर्ट्ज़ 3 मैगा हर्ट्ज़ 30 मैगा हर्ट्ज़ 300 मैगा हर्ट्ज़ 3 गीगा हर्ट्ज़ 30 गीगा हर्ट्ज़
30 Hz 300 Hz 3 किलो हर्ट्ज़ 30 किलो हर्ट्ज़ 300 किलो हर्ट्ज़ 3 मैगा हर्ट्ज़ 30 मैगा हर्ट्ज़ 300 मैगा हर्ट्ज़ 3 गीगा हर्ट्ज़ 30 गीगा हर्ट्ज़ 300 गीगा हर्ट्ज़