तरंगदैर्घ्य

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
साइन-आकारीय अनुप्रस्थ तरंग का तरंगदैर्घ्य, λ

भौतिकी में, कोई साइन-आकार की तरंग, जितनी दूरी के बाद अपने आप को पुनरावृत (repeat) करती है, उस दूरी को उस तरंग का तरंगदैर्घ्य (wavelength) कहते हैं। दीर्घ (= लम्बा) से 'दैर्घ्य' बना है।

तरंगदैर्घ्य, तरंग के समान कला वाले दो क्रमागत बिन्दुओं की दूरी है। ये बिन्दु तरंगशीर्श (crests) हो सकते हैं, तरंगगर्त (troughs) या शून्य-पारण (zero crossing) बिन्दु हो सकते हैं। तरंग दैर्घ्य किसी तरंग की विशिष्टता है। इसे ग्रीक अक्षर 'लैम्ब्डा' (λ) द्वारा निरुपित किया जाता है। इसका SI मात्रक मीटर है।

किसी तरंग के तरंगदैर्घ्य (λ), तरंग के वेग (v) तथा तरंग की आवृति (f) में निम्नलिखित सम्बन्ध होता है-

\lambda=\frac{v}{f}

विद्युतचुम्बकीय माध्यम में तरंगदैर्घ्य[संपादित करें]


\lambda^\prime = \frac{\lambda_0}{\sqrt{\mu_{\rm r} \varepsilon_{\rm r}}} = \frac{c}{f} \frac{1}{\sqrt{\mu_{\rm r} \varepsilon_{\rm r}}}

डी-ब्रागली तरंगदैर्घ्य[संपादित करें]


\lambda = \frac{h}{p} = \frac {h}{mv} \sqrt{1 - \frac{v^2}{c^2}}

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]