रासायनिक बन्धन
किसी अणु में दो या दो से अधिक परमाणु जिस बल के द्वारा एक दूसरे से बंधे होते हैं उसे रासायनिक बन्ध कहते हैं। ये बन्धन रासायनिक संयोग के बाद बनते हैं तथा परमाणु अपने से सबसे पास वाली निष्क्रिय गैस का इलेक्ट्रान विन्यास प्राप्त कर लेते हैं। दूसरे शब्दों में, रासायनिक बन्धन वह परिघटना है जिसमें दो या दो से अधिक अणु या परमाणु एक दूसरे से आकर्षित होकर और जुडकर एक नया अणु या आयन बनाते हैं(एक विशेष प्रकार के बन्धन 'धात्विक बन्धन' में यह प्रक्रिया भिन्न होती है)। यह प्रक्रिया सूक्ष्मदर्शी स्तर पर होती है, लेकिन इसके परिणाम का स्थूल रूप में अवलोकन किया जा सकता है, क्योंकि यही प्रक्रिया अनेकानेक अणुओं और परमाणुओं के साथ होती है। गैस में ये नये अणु स्वतन्त्र रूप से मौजू़द रहते हैं, द्रव में अणु या आयन ढीले तौर पर जुडे रहते हैं और ठोस में ये एक आवर्ती (दुहराव वाले) ढाँचे में एक दूसरे से स्थिरता से जुडे रहते हैं।
अनुक्रम |
प्रकार [संपादित करें]
रासायनिक बंध कई प्रकार के होते हैं:-
"शक्तिमान" [संपादित करें]
संयोजी बंध [संपादित करें]
आयोनिक बंध [संपादित करें]
धात्विक बंध [संपादित करें]
"क्षीण" [संपादित करें]
- डाईहाईड्रोजन बंध
- डाईहाईड्रोजन काम्प्लेक्स
- लो बैरियर हाईड्रोजन बंध
- सम्मितीय हाईड्रोजन बंध
- हाईड्रोफाइल
- अन्य असंयोजी
- वान डर वाल बल
- यांत्रिक बंध
- हैलोजन बंध
- ऑरोफिलिसिटी
- इंटरकैलेशन
- स्टैकिंग
- एन्ट्रोपिक बल
- रासायनिक ध्रुवता
अन्य [संपादित करें]
आवश्यक नहीं क्षीणतम शक्तिशाली बंध सर्वशक्तिमान क्षीण बंध से आवश्यक रूप से शक्तिमान हो।
इन्हें भी देखें [संपादित करें]
|
||||||||||||||||||||||||||||