मोनियर विलियम्स

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मोनियर विलियम्स ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में बोडन-चेयर के प्रोफेसर, संस्कृत व्याकरण, संस्कृत-अंग्रेजी कोश, अंग्रेजी-संस्कृत कोश आदि विश्वविख्यात रचनाओं के प्रणेता थे। उन्होने हिन्दी व्याकरण पर भी कार्य किया है।

(i) रुडीमेन्ट्स ऑफ हिन्दुस्तानी ग्रामर (1858)

(ii) हिन्दुस्तानी : प्राइमर एण्ड ग्रामर (1860)

(iii) प्रैक्टिकल हिन्दुस्तानी ग्रामर (1862) )[1][2]

मोनियर विलियम्स ने संस्कृत के शब्दभण्डार की बहुविषयक समृद्धि को लक्ष्य करके लिखा है कि संस्कृत का कोश बनाने वाले को लगभग सर्वज्ञ होना चाहिए। उनके कथनानुसार इंग्लैण्ड में यूनिवर्सिटी शिक्षा प्राप्त तरुण संस्कृत की वैज्ञानिक शब्दावली (scientific expressions) की सही-सही व्याख्या नहीं कर सकते।[3]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "प्रोफ़ेसर महावीर सरन जैन का आलेख : विदेशी विद्वानों द्वारा हिन्दी का अध्ययन" (एचटीएमएल). रचनाकार. http://rachanakar.blogspot.com/2009/09/blog-post_176.html. अभिगमन तिथि: २००९. 
  2. जैन, प्रोफ़ेसर महावीर सरन. विदेशी विद्वानों द्वारा हिन्दी वाड्.मीमांसापरक अध्ययन (फिलॉलाजिकल स्टडीज) (सन् 1940 ई0 तक). 
  3. भारत की भाषा समस्या, पृष्ट १६८ (डॉ रामविलास शर्मा)