भगवान का अस्तित्व

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भगवान की सत्ता हेतु प्रमाण

मानव प्राचीन काल से ही इश्वर की सत्ता को सिद्धि का प्रयास करता रहा हेँ इस सिद्धी के लिये मानव ने अनेक युक्तियो का सहारा लिया हें पुरंतु ये समस्या केवल दार्शनिक की है। एक दार्शनिक को हमेशा प्रमाणों की आवयश्कता रहती हें और ये प्रमाण भी युक्तिपूर्ण होने चाहियें। इस संबध मी दिए गए सभी प्रमाणों को दो भागो मै विभाजित किया गया है -

(१) प्रमाण जो मानव के अनुभव पे आधारित होते हो यथा सृष्टिमूलक, प्रयोजन मूलक, नीति मूलक, धार्मिक अनुभव मूलक प्रमाण

(२) प्रमाण जिनका मानव के अनुभव से रिश्ता न हो इसमे प्रत्य सत्ता मूलक प्रमाण आता हैं

सृष्टि मूलक[संपादित करें]

यह एक प्राचीन अनुमान माना जाता है जिसका प्रचालन सभी प्राचीन धार्मिक दार्शनिक मान्य्ताओ में रहा हैं इसके नाम से ही साफ हो जाता हैं कि इसका सम्बन्ध जगत से हैं इस प्रमाण में जगत के अस्तित्व के आधार पर इश्वेर् की सत्ता प्रमाणित की जाती हैं।

इस युक्ति के तीन भेद माने जाते हैं तीनो ही प्रकारों में विश्व के कारण रूप में ईश्वर की सत्ता सिद्ध की जाती हैं

(१.१) गति मूलक युक्ति - आरास्तू ने इसका प्रयोग

इन्हें भी देखें[संपादित करें]