नास्तिकता

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कार्ल मार्क्स
कार्ल मार्क्स


नास्तिकता अथवा नास्तिकवाद (en:Atheism) वो विचारधारा है जो ईश्वर के अस्तित्व का खंडन करती है । (नास्ति = न + अस्ति = नहीं है , अर्थात ईश्वर नहीं है।) नास्तिक लोग ईश्वर (भगवान) को झूठ करार देते हैं । अधिकांश नास्तिक किसी भी देवी देवता, परालौकिक शक्ति, धर्म और आत्मा को नहीं मानते । हिन्दू दर्शन में नास्तिक शब्द उनके लिये भी प्रयुक्त होता है जो वेदों को मान्यता नहीं देते ।


नास्तिक शब्द का अनर्थ हुआ है । नास्तिकता का अर्थ है अस्तित्त्व को अस्वीकार करना एवम् अस्तित्त्वहीनता को सत्य मानना । इस तथ्य के आधार पर पराप्राकृतिक मान्यता ही नास्तिकता है । इस आधार पर बौद्ध दर्शन, जैन दर्शन, चारुवाक दर्शन्, मार्क्सवाद को आस्तिक दर्शन कहना आवश्यक है । अंग्रेजी शब्द एथिज्म (athiesm) का सही अर्थ यथार्थवाद होना आवश्यक है (नास्तिकता नहीं)

[संपादित करें] नास्तिकता के पक्ष में तर्क

  1. ईश्वर के अस्तित्व का कोई सबूत नहीं है । उसे देखा, सुना, महसूस किया नहीं जा सकता ।
  2. प्रकृति के सारे नियम कानून विज्ञान से समझे जा सकते हैं । जगत और जीवन का उद्भव भी विज्ञान समझा सकता है ।
  3. धर्मग्रन्थों में बकवास लिखी गयी है । उनकी कहानियाँ परीकथाएँ लगती हैं, जिनका ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है ।
  4. यदि ईश्वर है, तो इस दुनिया में इतना पाप, दुख और दर्द क्यों है ?
  5. धर्मग्रन्थों ने एक मनुष्य को दूसरे मनुष्य से पृथक कर दिया है।

[संपादित करें] नास्तिकता के विरोध में तर्क

वैयक्तिक औज़ार