बदू लोग

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ओमान का एक बदू परिवार
सीरिया में खाना पकाती दो बदू स्त्रियाँ
मिस्र के सीनाई प्रायद्वीप में रोटीयाँ बनते बदू पुरुष

बदू (अरबी: بدو) या बदूईन (بَدَوِيُّون, Bedouin) एक अरब मानव जाति है जो पारम्परिक रूप से ख़ानाबदोश जीवन व्यतीत करते हैं और 'अशाइर​' (عَشَائِر) नामक क़बीलों में बंटे हुए हैं। यह अधिकतर जोर्डन, इराक़, अरबी प्रायद्वीप और उत्तर अफ़्रीका के रेगिस्तानी क्षेत्रों में रहते हैं।[1]

नाम की उत्पत्ति[संपादित करें]

अरबी भाषा में दो प्रकार के रेगिस्तान होते हैं - अर्ध-शुष्क क्षेत्र और भीषण शुष्कता वाला क्षेत्र। अर्ध-रेगिस्तानी इलाक़े को 'बादियह' (بَادِية) कहते हैं जबकि पूर्ण रेगिस्तान को 'सहरा' (صَحَرَاء) बुलाते हैं। बादियह में बसने वालों को 'बदूवी' (بدوي) बुलाया जाता है और इसी से 'बदू' शब्द आया है।

समाज[संपादित करें]

बदू समाज में वफ़ादारी का बहुत महत्व है और इसमें श्रेणीयाँ होती हैं: पहले अपने क़रीबी परिवार से, फिर अपने रिश्तेदारों से और फिर क़बीले से। एक बदू कहावत है कि 'मैं अपने भाइयों के विरुद्ध, मैं और मेरे भाई अपने रिश्तेदारों के विरुद्ध, मैं और मेरे रिश्तेदार अपने क़बीले के विरुद्ध और मैं और मेरा क़बीला अजनबियों के विरुद्ध'। एक बदू परिवार को 'बैत' (بيت, bayt) कहा जाता है, जिसका अर्थ 'घर' या 'तम्बू' है। इन तम्बुओं को अक्सर 'बैत अस-शअर' (بيت الشعر, bayt as-sha'ar) कहा जाता है, जिसका मतलब 'बालों का घर' होता है, क्योंकि यह तम्बू अक्सर ऊँटों और बकरियों के बालों के बने होते हैं।[2] इसमें एक दम्पति, उनके माता-पिता और उनके बच्चे होते हैं। अक्सर बैतों का एक समूह साथ-साथ जगह-से-जगह जाता है और ऐसे समूह को 'गोउम' (goum) कहते हैं। गोउमों में आपसी रिश्तेदार होते हैं, लेकिन अक्सर अगर कोई नवविवाहित स्त्री किसी गोउम का भाग बनती है तो उसके कुछ पुरुष सम्बन्धी भी उस गोउम में आ मिलते हैं।

गोउमों से ऊपर का सामाजित वर्ग 'इब्न अम्म' (ibn ʿamm) कहलाता है, जिसका मतलब 'चाचा/ताया का बेटा' है। इसमें एक ही परिवार के तीन से पाँच पीढ़ियों के वंशज शामिल होते हैं। अक्सर किसी वंशज गुट के भिन्न गोउम अलग-अलग व्यवसायों में लगे होते हैं। अगर किसी गोउम को आर्थिक या अन्य परेशानी होती है तो उस वंशज गुट के अन्य गोउम उसकी मदद करने की कोशिश करते हैं। कभी-कभी अजनबियों को भी किसी वंशज गुट में शामिल कर लिया जाता है। बहुत से ऐसे गुटों से क़बीला बनता है। क़बीले से सभी लोग अपने आप को एक सांझे पूर्वज की संतान मानते हैं। अक्सर क़बीलों के नाम से पहले 'बनी', 'बेनी' या 'बनू' लगता है। मसलन सउदी अरब के हिजाज़ और तिहामाह क्षेत्रों में बसने वाले 'बनू किनानाह' (بنو كنانة, Banu Kinanah) क़बीले के सदस्य सभी एक 'किनानाह' नामक ऐतिहासिक पुरुष की संतान माने जाते हैं। यह भी देखा जाता है कि अजनबियों को कभी-कभी क़बीलों में दाख़िल कर लिया जाता है और वह स्वयं को भी उस पूर्वज का वंशज समझने लगते हैं। बदू लोगों की इज़्ज़त से सम्बंधित कई मान्यताएँ होती हैं।[3]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. The Bedouin of the Middle East, Elizabeth Losleben, pp. 4, Lerner Publications, 2003, ISBN 978-0-8225-0663-8, ... The Bedouin are an ancient Arab people. They live mainly in the Arabian and Syrian deserts, the Sinai Peninsula of Egypt, and the Sahara Desert of North Africa ...
  2. Rituals of Memory: In Contemporary Arab Women's Writing, Brinda J. Mehta, pp. 94, Syracuse University Press, 2007, ISBN 978-0-8156-3135-4, ... The Bedouin tent was consequently an architectural construct in consonance with the geography of the desert represented by the circularity of form, the use of natural fabric such as black goats' hair (hence the appellation black tent or bayt as sharr, the 'house of hair') ...
  3. Introduction to Sociology, George Ritzer, pp. 356, SAGE, 2012, ISBN 978-1-4129-7770-8, ... Depending on available resources, Bedouin travel fluidly as families, goum (small groups), descent groups, and tribes. Similar to the Roma in Europe, Bedouin are fiercely loyal, and many adhere to traditional honor codes and strict justice ...