फ्लिप-फ्लॉप
एलेक्ट्रॉनिकी में फ्लिप-फ्लॉप (flip-flop) एक डिजिटल परिपथ है जिसका आउटपुट दो स्थाई अवस्थाओं में में से किसी एक में बना रहता है (जब तक उसे बदलने के लिये इनपुट में कुछ न किया जाय)। इसे 'लैच' (latch) भी कहते हैं। इस परिपथ एक या अधिक इन्पुट होते हैं जिन पर संकेत का उचित परिवर्तन करके आउटपुट के स्टेट को बदला जा सकता है। इसके एक एक या दो आउटपुट होते हैं।
फ्लिप-फ्लॉप कई प्रकार के होते हैं और आंकिक एलेक्ट्रॉनिकी की मूलभूत निर्माण-ईकाई हैं। ये आंकड़ा भंडारण के अवयव (अर्थात 'मेमोरी') तैयार करने के लिये प्रयुक्त होते हैं। ये 'सेक्वेंशियल लॉजिक' की श्रेणी में आते हैं। इनका उपयोग पल्सों को गिनने (काउन्टर) के लिये तथा अलग-अलग समय पर पहुंचने वाले इनपुट संकेतों को समकालिक बनाने (synchronizing) के लिये किया जाता है।
अनुक्रम |
[संपादित करें] इतिहास
प्रथम फ्लिप-फ्लॉप परिपथ का आविष्कार सन १९१८ में हुआ था जो निर्वात नली का उपयोग करके बनाया गया था। उस समय उसका नाम एक्लीज-जॉर्डन ट्रिगर परिपथ (Eccles–Jordan trigger circuit) था। बाद में ट्रांजिस्टर से फ्लिप-फ्लॉप बने और आजकल एकीकृत परिपथ के रूप में उपलब्ध हैं।
[संपादित करें] प्रकार
- सेट-रिसेट लैच या एस-आर लैच (बिना गेट वाले 'सरल' लैच तथा गेटेड एस-आर फ्लिप-फ्लॉप)
- डी फ्लिप-फ्लॉप
- टी फ्लिप-फ्लॉप
- जेके फ्लिप-फ्लॉप
[संपादित करें] प्रमुख फ्लिप-फ्लॉप की अवस्था-परिवर्तन सारणी
संकेत:
- X - यह 1 या 0 कुछ भी हो,
- Qt - पिछली अवस्था (स्टेट),
- Qt+1 - वर्तमान अवस्था.
| Qt | Qt+1 | D | T | SR | JK |
|---|---|---|---|---|---|
| 0 | 0 | 0 | 0 | 0X | 0X |
| 0 | 1 | 1 | 1 | 10 | 1X |
| 1 | 0 | 0 | 1 | 01 | X1 |
| 1 | 1 | 1 | 0 | X0 | X0 |