फ़ोनीशिया

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फ़ोनीशिया का प्रभाव पूरे भूमध्य सागर क्षेत्र में समुद्री व्यापार के ज़रिये फैल गया

फ़ोनीशिया मध्य-पूर्व के उर्वर अर्धचंद्र के पश्चिमी भाग में भूमध्य सागर के तट के साथ-साथ स्थित एक प्राचीन सभ्यता थी। समुद्री व्यापार के ज़रिये यह 1550 से 300 ईसा-पूर्व के काल में भूमध्य सागर के दूर​-दराज़ इलाक़ों में फैल ग​ई। उन्हें प्राचीन यूनानी और रोमन लोग "जमुनी-रंग के व्यापारी" कहा करते थे क्योंकि रंगरेज़ी में इस्तेमाल होने वाले म्यूरक्स घोंघे से बनाए जाने वाले जामुनी रंग केवल इन्ही से मिला करता था। इन्होने जिस अक्षरमाला का इजाद किया उसपर विश्व की सारी प्रमुख अक्षरमालाएँ आधारित हैं। कई भाषावैज्ञानिकों का मानना है कि देवनागरी-सहित भारत की सभी वर्णमालाएँ इसी फ़ोनीशियाई वर्णमाला की संताने हैं।[1][2]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Sanford B. Steever. "The Dravidian languages". Taylor & Francis, 1998. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780415100236. http://books.google.com/books?id=CF5Qo4NDE64C. "... Many Indologists follow Bithler (1895, 1896) in believing that both Kharosthi and Brahmi were derived from Semitic writing - with Brahmi perhaps based on a Semitic script like the Phoenician, rather than on Aramaic ..." 
  2. Chandrika Singh Upasak. "History of palaeography of Mauryan Brahmi script". Nav Nalanda Mahavihar, 2002. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788188242047. http://books.google.com/books?id=P19jAAAAMAAJ. "... On the basis of a comparison between Brahmi and North Semitic alphabets, he maintained that twenty two letters of the Brahmi script were directly derived from the North Semitic character; some of these are found in early Phoenician ..."