प्रोग्राम अनुवादक

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कम्प्यूटर मात्र बाइनरी संकेत अर्थात 0 और 1 को ही समझता है। मशीनी भाषा के अतिरिक्त अन्य सभी प्रोग्रामिंग भाषाओ में 0 और 1 के अतिरिक्त अन्य अंक व अक्षरो का प्रयोग होता है। अनुवादक इन अंको व अक्षरों को बाइनरी संकेतों में अनुवादित कर देता है ताकि कम्प्यूटर में दिये गये निर्देशों को समझ कर उनके अनुसार विश्लेषण कर सही परिणाम प्रस्तुत कर सके। प्राप्त परिणाम भी चूंकि बाइनरी संकेतो में ही होते है अत: अनुवादक इन्हें मशीनी भाषा से मूल भाषा में अनुवादित कर देता है।

प्रोग्राम अनुवादक के प्रकार[संपादित करें]

अनुवादक तीन प्रकार के होते है-

  • असेम्बलर- असेम्बली भाषा में लिखे गए प्रोग्राम को मशीनी भाषा में बदलने में कम्प्यूटर जिस सॉफ्टवेयर का अनुवादक के रूप में प्रयोग करता है, असेम्बलर कहलाते हैं। इसका मुख्य कार्य असेम्बली भाषा को मशीनी भाषा में परिवर्तित करके प्रोसेसर को भेजना एवं प्राप्त विश्लेषित परिणाम को पुन: मशीनी भाषा से असेम्बली भाषा में परिवर्तित करना है।
  • कम्पाइलर- उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा में लिखे गए प्रोग्राम को मशीनी भाषा में अनुवाद करने के लिये कम्प्यूटर जिस सॉफ्टवेयर का प्रयोग करता है कम्पाइलर कहलाता है।
  • इन्टरप्रेटर- यह एक प्रोग्राम होता है जो कि कम्पाइलर के भांति कार्य करता है।

कम्पाइलर और इन्टरप्रेटर में अन्तर[संपादित करें]

कम्पाइलर पूरे प्रोग्राम को प्रविष्ट होने के पश्चात उसे मशीनी भाषा में परिवर्तित करता है जबकि इन्टरप्रेटर उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा में लिखे गये प्रोग्राम की प्रत्येक लाइन के कम्प्यूटर में प्रविष्ट होते ही उसे मशीनी भाषा में परिवर्तित कर देता है। अत: ऐसी उच्च स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा जिसमें कि कम्पाइलर का प्रयोग होता है प्रोग्राम को लिखने के बाद प्रोग्राम को कम्पाइलर में लोड किया जाता है जबकि ऐसी भाषा में प्रोग्राम लिखने पर जिसमें की इन्टरप्रेटर का प्रयोग होना है प्रोग्राम लिखने से पूर्व ही इन्टरप्रेटर को लोड किया जाता है। ’सी’ भाषा में कम्पाइलर और बेसिक में इन्टरप्रेटर का प्रयोग किया जाता है।

यूनिक्स में प्रोग्राम संचिका बनाना[संपादित करें]

सी में प्रोग्राम लिखने के लिये यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम में मुख्यत: वीआइ एडिटर एवं ईडीएडिटर का प्रयोग किया जाता है। कोइ भी संचिका जिसका विस्तारित नाम ’सी’ है वह संचिका सी प्रोग्राम के नाम से जानी जाती है। यूनिक्स में ’सी’ प्रोग्रामिंग भाषा की प्रोग्राम संचिका बनाने की दो विधियाँ हैं-

  • cat> <file_name>
  • vi> <file_name>

डॉस में प्रोग्राम संचिका बनाना[संपादित करें]

डॉस में ’सी’ भाषा में प्रोग्राम लिखने के लिये copycon commond अथवा किसी भी डॉस editor का प्रयोग किया जा सकता है।

  • copycon<file_name>
  • Edit<file_name>

प्रोग्राम को कम्पाइल करना[संपादित करें]

प्रोग्राम लिखने के बाद इसे कम्पाइल किया जाता है। मुख्यत: यूनिक्स में ANSI compiler का प्रयोग किया जाता है। जबकि डॉस में किसी भी ’सी’ कम्पाइलर का प्रयोग किया जाता है।

डॉस में कम्पाइल करने की विधि[संपादित करें]

एमएस डॉस ऑपरेटिंग सिस्टम के लिये ’सी’, टर्बो ’सी’ के नाम से उपलब्ध है। टर्बो ’सी’ को डॉस प्रॉम्प्ट पर TC type करके एण्टर की दबाने से चलाया जा सकता है। ऐसा करने पर स्क्रीन पर एक विण्डो प्रदर्शित होती है। इस विण्डो में विभिन्न मेनु दिये होते है इन मेनु में से एक मेनु कम्पाइल करने का भी है। यहाँ पर कम्पाइल की जाने वाली संचिका को लोड करके ’अल्टर’ कुंजी के साथ फंक्शन कुंजी F9 दबाकर कम्पाइल किया जा सकता है। कम्पाइल करने के बाद लोड की संचिका के नाम की ही एक अन्य संचिका obj विस्तारित नाम से बन जाती है। यदि EXE संचिका भी बनानी है तो Make EXE विकल्प का प्रयोग करके बनाई जा सकती है।