प्राण
मुक्त ज्ञानकोष विकिपीडिया से
प्राण शरीर के भीतर की जीवनाधार वायु, श्वास।
अनुक्रम |
[संपादित करें] उदाहरण
[संपादित करें] मूल
प्राण से तात्पर्य है वह जीवनी शक्ति, जिसके कारण किसी जन्तु अथवा वनस्पति को जीवित कहा जा सकता है। जो साँस लेता हो, जिसमें आन्तरिक वृद्धि होती हो, चयापचय क्रिया होती हो, जो प्रजनन द्वारा अपनी संतति को बढ़ा सके उसे प्राणवान माना जाता है और प्राणी कहा जाता है। प्राण शक्ति का नाश होने से जीव मृत हो जाता है।
जब किसी प्राक्रित पदार्थ मे विकास लक्छित हो,तो समझा जाना चाहिए कि इसमे प्राण-त्तत्व विद्यमान है/