पीयूष ग्रन्थि
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| Pituitary gland | |
|---|---|
| Located at the base of the brain, the pituitary gland is protected by a bony structure called the sella turcica (also known as turkish saddle) of the sphenoid bone. | |
| Median sagittal through the hypophysis of an adult monkey. Semidiagrammatic. | |
| लैटिन | hypophysis, glandula pituitaria |
| ग्रे की शरीरिकी | subject #275 1275 |
| धमनी | superior hypophyseal artery, infundibular artery, prechiasmal artery, inferior hypophyseal artery, capsular artery, artery of the inferior cavernous sinus[1] |
| पूर्वगामी | neural and oral ectoderm, including Rathke's pouch |
| एमईएसएच | {{{MeshNameHindi}}} |
| डोर्लैंड्स/एल्सीवियर | Pituitary gland |
पीयूष ग्रन्थि या पीयूषिका , एक अंत:स्रावी ग्रंथि है जिसका आकार एक मटर के दाने जैसा होता है और वजन 0.5 ग्राम (0.02 आउन्स) होता है. यह मस्तिष्क के तल पर हाइपोथैलेमस (अध;श्चेतक) के निचले हिस्से से निकला हुआ उभार है, और यह एक छोटे अस्थिमय गुहा (पर्याणिका) में दृढ़तानिका-रज्जु (diaphragma sellae) से ढंका हुआ होता है. पीयूषिका खात, जिसमें पीयूषिका ग्रंथि रहता है, वह मस्तिष्क के आधार में कपालीय खात में जतुकास्थी में स्थित रहता है. इसे एक मास्टर ग्रंथि माना जाता है. पीयूषिका ग्रंथि हार्मोन का स्राव करने वाले समस्थिति का विनियमन करता है, जिसमें अन्य अंत:स्रावी ग्रंथियों को उत्तेजित करने वाले ट्रॉपिक हार्मोन शामिल होते हैं. कार्यात्मक रूप से यह हाइपोथैलेमस से माध्यिक उभार द्वारा जुड़ा हुआ होता है.
अनुक्रम |
खंड [संपादित करें]
मस्तिष्क के तल पर स्थित पीयूषिका (पिट्यूटरी) दो ललाट खण्डों (lobes) से मिलकर बनी होती है: अग्रस्थ पीयूषिका (adenohypophysis) और पश्च पीयूषिका (neurohypophysis). पीयूषिका कार्यात्मक रूप से हाइपोथैलेमस से पीयूषिका डांठ द्वारा जुड़ा हुआ होता है, जिससे हाइपोथैलेमस (अध्:श्चेतक) संबंधी स्रावित होने वाले कारक स्रावित होते हैं और, बदले में, पीयूषिका हार्मोनों के स्राव को उत्तेजित करते हैं. हालांकि पीयूषिका ग्रंथि को मास्टर अंत:स्रावी ग्रंथि के रूप में जाना जाता है, इसके दोनों ललाट खंड हाइपोथैलेमस के नियंत्रण के अधीन होते हैं.
अग्रस्थ पीयूषिका (Adenohypophysis) [संपादित करें]
अग्रस्थ पीयूषिका महत्वपूर्ण अंत:स्रावी हार्मोन जैसे कि ACTH, TSH, PRL, GH, इंडोर्फिन, FSH, और LH को संश्लेषित एवं स्रावित करता है. ये हार्मोन हाइपोथैलेमस के प्रभाव के अधीन अग्रस्थ पीयूषिका से स्रावित होते हैं. हाइपोथैलेमस (अध्:श्चेतक) संबंधी हार्मोन अग्रस्थ ललाट खंड में एक विशेष केशिका प्रणाली के माध्यम से स्रावित होते हैं, जिन्हें हाइपोथैलेमस-पीयूषिका संबंधी पोर्टल प्रणाली भी कहा जाता है. अग्रस्थ पीयूषिका शरीर-रचना संबंधी प्रदेशों में विभाजित होता है जिन्हें पार्स ट्यूबेरैलिस, पार्स इंटरमीडिया, और पार्स डिस्टैलिस कहा जाता है. यह ग्रसनी (स्टोमोडियल भाग) के पृष्ठीय दीवार में उत्पन्न खात के कारण विकसित होता है जिसे राथके (Rathke) की थैली के रूप में जाना जाता है.
पश्च पीयूषिका (Neurohypophysis) [संपादित करें]
पश्च पीयूषिका संग्रह एवं स्रावित करता है:
- ऑक्सीटॉसिन (Oxytocin), जिसका अधिकांश हिस्सा हाइपोथैलेमस में स्थित परानिलयी (paraventricular) नाभिक से स्रावित होता है.
- मूत्रवर्द्धक रोधी हार्मोन (ADH, जो वैज़ोप्रेसिन और AVP, जो आर्जिनिन वैज़ोप्रेसिन के रूप में भी जाना जाता है), जिसका अधिकांश हिस्सा हाइपोथैलेमस में नेत्र नली के ऊपर स्थित नाभिक से स्रावित होता है.
ऑक्सीटॉसिन उन हार्मोनों में से एक है जो अनुकूल फीडबैक वाले पाश का निर्माण करते हैं. उदाहरण के लिए, गर्भाशय का संकुचन पश्च पीयूषिका से ऑक्सीटॉसिन के स्राव को उत्तेजित करता है, जो बदले में, गर्भाशय के संकुचन को बढाता है. यह अनुकूल फीडबैक पाश सम्पूर्ण प्रसव के दौरान जारी रहता है.
मध्यवर्ती ललाट खंड [संपादित करें]
कई पशुओं में एक मध्यवर्ती ललाट खंड भी होता है. यह शारीरिक रंग के परिवर्तन पर नियंत्रण करने वाला माना जाता है. वयस्क मानवों में, यह अग्रस्थ और पश्च पीयूषिका के बीच कोशिकाओं की सिर्फ एक पतली परत है. मध्यवर्ती ललाट खंड मेलेनिन कोशिका को उत्तेजित करने वाला हार्मोन (MSH) उत्पन्न करता है, हालांकि इस कार्य का श्रेय अक्सर (गलत ढंग से) अग्रस्थ पीयूषिका को दिया जाता है.
कशेरुकी जंतुओं में भिन्नताएं [संपादित करें]
पीयूषिका ग्रंथि सभी कशेरुकी जंतुओं में पाई जाती है, लेकिन इसकी संरचना विभिन्न समूहों के बीच अलग-अलग होती है.
उपर्युक्त वर्णित पीयूषिका का विभाजन स्तनधारी जंतुओं की ख़ास विशेषता होती है और, भिन्न-भिन्न मात्राओं में यह सभी चौपायों के लिए भी सही है. हालांकि, सिर्फ स्तनधारियों में ही पश्च पीयूषिका का एक ठोस आकार होता है. लंगफिश में यह अग्रस्थ पीयूषिका के ऊपर स्थित ऊतकका अपेक्षाकृत रूप से एक सपाट विस्तार है, और उभयचरों, सरीसृपों और पक्षियों में, यह उत्तरोत्तर सुविकसित हो जाता है. आम तौर पर चौपायों में मध्यवर्ती कपाल खंड सुविकसित नहीं होता है, और पक्षियों में यह पूरी तरह से अनुपस्थित रहता है.[2]
लंगफिशों (Lungfishes) के अलावा, मछली में पीयूषिका की बनावट आम तौर पर चौपायों से भिन्न होती हैं. सामान्य रूप से, मध्यवर्ती कपाल खंड में सुविकसित होने की प्रवृत्ति होती है, और आकार की दृष्टि से यह अग्रस्थ पीयूषिका के शेष हिस्से के बराबर होता है. पश्च कपाल खंड पीयूषिका के डांठ के तल पर ऊतक का एक विस्तार उत्पन्न करता है, और अधिकांश स्थितियों में अग्रस्थ पीयूषिका के ऊतक में अनियमित अंगुली के जैसा उभार भेजता है. अग्रस्थ पीयूषिका विशिष्ट रूप से दो प्रदेशों में विभाजित रहती है, एक अधिक अग्रस्थ चंचु संबंधी और एक पश्च समीपस्थ हिस्सा, लेकिन दोनों के बीच सीमा अक्सर स्पष्ट रूप से चिह्नित नहीं रहती है. इलैज़्मोब्रैंक (Elasmobranch) में ठीक अग्रस्थ पीयूषिका के नीचे एक अतिरिक्त अग्रस्थ (अभ्युदरीय) कपाल खंड होता है.[2]
लैम्प्रे, जो सर्वाधिक आदिम मछलियों में से एक हैं,में इस व्यवस्था से यह सूचना मिल सकती है कि पूर्वज कशेरुकी जंतुओं में किस प्रकार मूल रूप से पीयूषिका विकसित हुई. यहाँ, पश्च पीयूषिका मस्तिष्क के तल पर ऊत्तक का एक सामान्य सपाट विस्तार है, और इसमें कोई पीयूषिका डांठ नहीं होती है. राथके की थैली (Rathke's pouch) नासिका छिद्रों के नजदीक बाहर की तरफ खुली बनी रहती है. मध्यवर्ती कपाल खंड के संगत, ग्रंथिनुमा ऊत्तक के तीन विशिष्ट समूह, अग्रस्थ पीयूषिका के चंचु संबंधी तथा समीपस्थ हिस्से थैली से पास-पास संबंधित रहते हैं. ये विभिन्न भाग मस्तिश्कावरण संबंधी झिल्लियों द्वारा अलग-अलग किये जाते हैं, जिससे यह सुझाव मिलता है कि अन्य कशेरुकी जंतुओं की पीयूषिका ने अनेक अलग-अलग, लेकिन पास-पास संबंधित, ग्रंथियों का निर्माण किया होगा.[2]
अधिकांश मछली में एक यूरोफीजिस भी होता है, जो एक तंत्रिका संबंधी श्रावक ग्रंथि होती है जो आकार में बहुत कुछ पश्च पीयूषिका के सामान होती है, लेकिन यह पूंछ में स्थित होती है और मेरु रज्जु से जुडी हुई होती है. परासरण दाब के नियंत्रण में इसका कोई कार्य हो सकता है.[2]
कार्य [संपादित करें]
पीयूषिका हार्मोन कुछ निम्नलिखित शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद करते हैं:
- वृद्धि
- रक्तचाप
- गर्भावस्था और प्रसव के कुछ पहलू जिसमें प्रसव के दौरान गर्भाशय के संकुचन का उत्तेजन शामिल हैं
- स्तन दूध का उत्पादन
- पुरुषों और महिलाओं दोनों में यौन अंगों के कार्य
- अवतु ग्रंथि (थाइराइड ग्रंथि) का कार्य
- भोजन का ऊर्जा के रूप में परिवर्तन (metabolism)
- शरीर में जल एवं परासरण दाब का नियंत्रण
- गुर्दों में जल के अवशोषण को नियंत्रित करने के लिए ADH (मूत्र वर्द्धन रोधी हार्मोन) को स्रावित करता है
- तापमान का नियंत्रण
अतिरिक्त तस्वीरें [संपादित करें]
इन्हें भी देखें [संपादित करें]
संदर्भ [संपादित करें]
- ↑ Gibo H, Hokama M, Kyoshima K, Kobayashi S (1993). "[Arteries to the pituitary]". Nippon Rinsho 51 (10): 2550–4. PMID 8254920.
- ↑ 2.0 2.1 2.2 2.3 Romer, Alfred Sherwood; Parsons, Thomas S. (1977). The Vertebrate Body. Philadelphia, PA: Holt-Saunders International. pp. 549-550. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-03-910284-X.
बाहरी लिंक [संपादित करें]
- NeuroNames hier-382
- बी.यू पर ऊतक विज्ञान 14201loa
- UMM अंतःस्त्राविका स्वास्थ्य गाइड से पीयूषिका ग्रन्थि
- ओक्लाहोमा राज्य, अंतःस्त्रावी प्रणाली
- पीयूषिका रक्ताघात बहुरुपिया पीयूषिका फोड़ा
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