ज़ेटा ओरायोनिस तारा

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ज़ेटा ओरायोनिस एक नीला महादानव तारा है जो हमारे सूरज से बहुत बड़ा है
ज़ेटा ओरायोनिस शिकारी तारामंडल में आंच नीहारिका (फ़्लेम नेब्युला) के समीप नज़र आता है

ज़ेटा ओरायोनिस, जिसके बायर नामांकन में भी यही नाम (ζ Ori या ζ Orionis) दर्ज है, आकाश में शिकारी तारामंडल में स्थित एक तीन तारों का बहु तारा मंडल है।[1] इसका मुख्य तारा (जिसे "ज़ेटा ओरायोनिस ए" कहा जाता है) एक अति-गरम नीला महादानव तारा है और यह पृथ्वी से दिखने वाले तारों में से ३१वाँ सब से रोशन तारा है। यह हमसे ७०० प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित है और पृथ्वी से इसका औसत सापेक्ष कांतिमान (यानि चमक का मैग्निट्यूड) २.०४ है। अगर तीनों तारों को इकठ्ठा देखा जाए तो इनकी मिली-जुली चमक १.७२ मैग्निट्यूड है। ध्यान रहे के खगोलीय मैग्निट्यूड एक विपरीत माप है और यह जितना कम हो चमक उतनी ही ज़्यादा होती है।

अन्य भाषाओं में[संपादित करें]

ज़ेटा ओरायोनिस को अंग्रेज़ी में "ऑलनिटाक" (Alnitak) भी कहा जाता है। यह अरबी भाषा के "अन-निताक़" (النطاق) से लिया गया है जिसका अर्थ "कमरबंद" है। शिकारी तारामंडल में जो शिकारी की काल्पनिक आकृति बनती है, ज़ेटा ओरायोनिस उसकी कमरबंद के एक कोने का तारा है।

वर्णन[संपादित करें]

खगोलशास्त्रियों को इस तारे को ग़ौर से देखने पर तीन तारे मिले हैं:

  • ज़ेटा ओरायोनिस ए (ζ Ori A) - यह स्वयं एक द्वितारा है। इसमें एक तारा, जिसे ज़ेटा ओरायोनिस "एए" (Aa) कहा जाता है, O9.7 Ibe श्रेणी का नीला महादानव तारा है, जिसका द्रव्यमान सूरज के द्रव्यमान का २८ गुना है और व्यास हमारे सूरज के व्यास का २० गुना है। इसका दूसरा तारा, जिसे ज़ेटा ओरायोनिस "एबी" (Ab) कहा जाता है, O V श्रेणी का नीला बौना तारा है जिसके अस्तित्व का ज्ञान वैज्ञानिकों को सन् १९९८ में ही हुआ।[2]
  • ज़ेटा ओरायोनिस बी (ζ Ori B) - यह एक B श्रेणी का तारा है जो ज़ेटा ओरायोनिस ए की परिक्रमा करता है। यह एक परिक्रमा हर १,५०० वर्षों में पूरी करता है।
  • ज़ेटा ओरायोनिस सी (ζ Ori C) - पृथ्वी से यह तारा ज़ेटा ओरायोनिस के बहु तारा मंडल में नज़र ज़रूर आता है, लेकिन यह ज्ञात नहीं है कि यह वास्तव में इस मंडल के अन्य सदस्यों से गुरुत्वाकर्षक बंधन में बंधा हुआ है या उनसे हकीकत में दूर है और केवल आकाश में ही उनके समीप दिखाई देता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Yearbook of astronomy". W. W. Norton., 1986. http://books.google.com/books?id=_lU0AQAAIAAJ. "... Alnitak is a triple system. In 1819, Kunowsky discovered the double nature of the main star ..." 
  2. D. Vanbeveren. "The influence of binaries on stellar population studies". Springer, 2001. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780792371045. http://books.google.com/books?id=3KSJKNjoQswC.