केन्द्रीय सतर्कता आयोग

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भारत का केन्द्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission (CVC)) भारत सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारियों/कर्मचारियों से सम्बन्धित भ्रष्टाचार नियंत्रण की सर्वोच्च संस्था है। इसकी स्थापना सन् १९६४ में की गयी थी।

केन्द्रीय सतर्कता आयोग के अधिकार एवं कार्य[संपादित करें]

केन्द्रीय सतर्कता आयोग के सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 के अंतर्गत इस आयोग के अधिकार एवं कार्य निम्नलिखित हैं-[1]

  • दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन (केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो) को अधीक्षण के लिए निदेश देना जहां तक इनका संबंध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अन्तर्गत अपराधों के अन्वेषण से है- अनुभाग 8 (1) (ख);
  • केन्द्रीय सरकार द्वारा भेजे गए किसी संदर्भ पर जांच करना अथवा जांच या अन्वेषण करवाना- अनुभाग 8 (1) (ग);
  • केन्द्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, 2003 की धारा 8 की उपधारा 2 में विनिर्दिष्ट पदाधिकारियों के ऐसे प्रवर्ग से संबंधित किसी पदधारी के विरुद्ध प्राप्त किसी शिकायत में जांच करना या जांच अथवा अन्वेषण कराना- अनुभाग 8 (1) (घ);
  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अधीन अभिकथितरूप से किए गए अपराधों में अथवा दण्ड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत किसी अपराध में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन द्वारा किए गए अन्वेषणों की प्रगति का पुनर्विलोकन करना - अनुभाग 8 (1) (ङ);
  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अधीन अभियोजनकी मंजूरी के लिए सक्षम प्राधिकारियों के पास लंबित आवेदनों की प्रगति का पुनर्विलोकन करना - अनुभाग 8 (1) (च);
  • केन्द्रीय सरकार तथा इसके संगठनों को ऐसे मामलों पर सलाह देनाजो इनके द्वारा आयोग को भेजे जाएंगे - अनुभाग 8 (1) (छ);
  • विभिन्न केन्द्रीय सरकारी मंत्रालयों, विभागों तथा केन्द्रीय सरकार के संगठनों के सतर्कता प्रशासन पर अधीक्षण रखना - अनुभाग 8 (1) (ज);
  • किसी भी जांच का संचालन करते समय आयोग को सिविल न्यायालय के सभी अधिकार प्राप्त होंगे - अनुभाग 11;
  • संघ के कार्यां से संबंधित लोक सेवाओं तथा पदों पर नियुक्त व्यक्तियों से संबंधित अथवा अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों से संबंधितसतर्कता अथवा अनुशासनिक मामलों का नियंत्रण करने वाले कोई भी नियम अथवा विनियम बनाने से पहले आयोग से किए जाने वाले अनिवार्य परामर्श पर केन्द्र सरकार को उत्तर देना - अनुभाग 19;
  • केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त उस समिति के अध्यक्ष हैं तथा दोनों सतर्कता आयुक्त सदस्य हैं जिसकी सिफारिशों पर केन्द्रीय सरकार, प्रवर्तन निदेशक की नियुक्ति करती है- अनुभाग 25;
  • प्रवर्तन निदेशक की नियुक्ति से संबंधित समिति को यह अधिकार भी है कि वह प्रवर्तन निदेशालय में उप निदेशक तथा इससे ऊपर के स्तर के पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति के लिए, प्रवर्तन निदेशक से परामर्श करने के पश्चात् अपनी सिफारिशें दें- अनुभाग 25;
  • केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त उस समिति के अध्यक्ष हैं तथा दोनों सतर्कता आयुक्त सदस्य हैं जिसे दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन (केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो) में पुलिस अधीक्षक तथा इससे ऊपर के स्तर के पदों, निदेशक को छोड़कर, पर अधिकारियों की नियुक्ति तथा इन अधिकारियों के कार्यकाल का विस्तारण अथवा लघुकरण करने के लिए, निदेशक (केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो) से परामर्श करने के पश्चात् अपनी सिफारिशें देने का अधिकार प्राप्त है- अनुभाग 26 तथा दिल्ली विशेष पुलिस स्थापन अधिनियम, 1946 का अनुभाग 4 (ग).

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]