कांगो नदी

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कांगो नदी

कांगो नदी जिसे जेयरे नदी के नाम से भी जाना जाता है अफ़्रीका की एक प्रमुख नदी है। ४,७०० किलोमीटर की दूरी तय करने वाली यह नदी पश्चिम मध्य अफ़्रीका की सबसे विशाल और नील नदी के बाद अफ़्रीका की सबसे लम्बी नदी है। कांगो नदी विश्व की समस्त नदियों में, दक्षिणी अमरीका की ऐमेंज़न को छोड़कर सबसे अधिक लंबी है। लंबी है। इसकी संपूर्ण लंबाई 2,900 मील है। इसका प्रवाहक्षेत्र 14,25,000 वर्ग मील है। नदी अपने मुहाने पर सात मील चौड़ा रूपधारण कर समुद्र में गिरती है। यह समुद्र में प्रति सेकेंड 20 लाख घन फुट कीचड़ युक्त पानी गिराती है । यह नदी मध्य अफ्रीका के 4,650 फुट की ऊँचाई से निकलती है उत्तरी रोडेशिया में चंबेज़ी तदुपरांत लूआ पूला (Lua Pula) नाम से विख्यात है। यह नदी 200 फुट की ऊँचाई से गिरकर स्टैनली जलप्रपात का सृजन करती है। इसके पश्चात् यह बहुत बड़ी नदी का रूप धारण कर लेती है जो 980 मील चंद्राकार रूप में बहती हुई भूमध्य रेखा को दो बार आर-पार करती है। इसकी सहायक नदियों में कसाई तथा उंबागी विशेष उल्लेखनीय हैं। इस नदी में 4,000 लघु द्वीप हैं। इसमें छोटी- छोटी वाष्पचालित नौकाएँ भी चलाई जाती हैं। इसका निचला जलप्रवाह 28 स्थलों पर विघटित होकर जलशक्ति उत्पादक स्थानों का सृजन करता है। यहाँ पर शिकार खेलने योग्य भयंकर जंगली जानवर पाए जाते हैं क्योंकि इस नदी का अधिकांश मार्ग घने तथा अभेद्य जंगलों से घिरा हुआ है। इसमें सैकड़ों जातियों की मछलियाँ मिलती हैं तथा तटीय प्रदेश में दुर्लभ कीड़े मकोड़ों की प्राप्ति होती है।