एल्कलॉएड
एल्कलॉएड प्राकृतिक रूप से उपलब्ध रासायनिक यौगिक होते हैं, जिनमें प्रायः क्षारीय नाइट्रोजन परमाणु होते हैं। इस समूह में कुछ ऐसे बन्धु यौगिक भी आते हैं, जिनमें उदासीन[2] एवं अशक्त अम्लीय गुण होते हैं।[3] समान गुणों और संरचना वाले कुछ अन्य यौगिकों को भी एल्कलॉएड समूह में रखा जाता है।[4] कार्बन, हाईड्रोजन एवं नाईट्रोजन, अणुओं के अलावा एल्कलॉएड यौगिकों में गंधक और कभी-कभार क्लोरीन, ब्रोमीन या फॉस्फोरस भी उपस्थित हो सकते हैं। [5]
[संपादित करें] संदर्भ
- ↑ Andreas Luch (2009). Molecular, clinical and environmental toxicology. Springer. प॰ 20. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 3764383356. http://books.google.com/?id=MtOiLVWBn8cC&pg=PA20.
- ↑ IUPAC. Compendium of Chemical Terminology, 2nd ed. (The "Gold Book"). Compiled by A. D. McNaught and A. Wilkinson. Blackwell Scientific Publications, Oxford (1997) ISBN 0-9678550-9-8 doi:10.1351/goldbook
- ↑ R. H. F. Manske. The Alkaloids. Chemistry and Physiology. Volume VIII. - New York: Academic Press, 1965, p. 673
- ↑ Robert Alan Lewis. Lewis' dictionary of toxicology. CRC Press, 1998, p. 51 ISBN 1-56670-223-2
- ↑ Chemical Encyclopedia: alkaloids
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। कार्बन के रासायनिक यौगिकों को कार्बनिक यौगिक कहते हैं। प्रकृति में इनकी संख्या 10 लाख से भी अधिक है। जीवन पद्धति में कार्बनिक यौगिकों की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। इनमें कार्बन के साथ-साथ हाइड्रोजन भी रहता है। ऐतिहासिक तथा परंपरा गत कारणों से कुछ कार्बन के यौगकों को कार्बनिक यौगिकों की श्रेणी में नहीं रखा जाता है। इनमें कार्बनडाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड प्रमुख हैं। सभी जैव अणु जैसे कार्बोहाइड्रेट, अमीनो अम्ल, प्रोटीन, आरएनए तथा डीएनए कार्बनिक यौगिक ही हैं। कार्बन और हाइड्रोजन के यौगिको को हाइड्रोकार्बन कहते हैं। मेथेन (CH4) सबसे छोटे अणुसूत्र का हाइड्रोकार्बन है। ईथेन (C2H6), प्रोपेन (C3H8) आदि इसके बाद आते हैं, जिनमें क्रमश: एक एक कार्बन जुड़ता जाता है। हाइड्रोकार्बन तीन श्रेणियों में विभाजित किए जा सकते हैं: ईथेन श्रेणी, एथिलीन श्रेणी और ऐसीटिलीन श्रेणी। ईथेन श्रेणी के हाइड्रोकार्बन संतृप्त हैं, अर्थात् इनमें हाइड्रोजन की मात्रा और बढ़ाई नहीं जा सकती। एथिलीन में दो कार्बनों के बीच में एक द्विबंध (=) है, ऐसीटिलीन में त्रिगुण बंध (º) वाले यौगिक अस्थायी हैं। ये आसानी से ऑक्सीकृत एवं हैलोजनीकृत हो सकते हैं। हाइड्रोकार्बनों के बहुत से व्युत्पन्न तैयार किए जा सकते हैं, जिनके विविध उपयोग हैं। ऐसे व्युत्पन्न क्लोराइड, ब्रोमाइड, आयोडाइड, ऐल्कोहाल, सोडियम ऐल्कॉक्साइड, ऐमिन, मरकैप्टन, नाइट्रेट, नाइट्राइट, नाइट्राइट, हाइड्रोजन फास्फेट तथा हाइड्रोजन सल्फेट हैं। असतृप्त हाइड्रोकार्बन अधिक सक्रिय होता है और अनेक अभिकारकों से संयुक्त हा सरलता से व्युत्पन्न बनाता है। ऐसे अनेक व्युत्पंन औद्योगिक दृष्टि से बड़े महत्व के सिद्ध हुए हैं। इनसे अनेक बहुमूल्य विलायक, प्लास्टिक, कृमिनाशक ओषधियाँ आदि प्राप्त हुई हैं। हाइड्रोकार्बनों के ऑक्सीकरण से ऐल्कोहॉल ईथर, कीटोन, ऐल्डीहाइड, वसा अम्ल, एस्टर आदि प्राप्त होते हैं। ऐल्कोहॉल प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक हो सकते हैं। इनके एस्टर द्रव सुगंधित होते हैं। अनेक सुगंधित द्रव्य इनसे तैयार किए जा सकते हैं। इसी प्रकार एल्कलॉएड को भी विभिन्न प्रयोगों में लिया जा सकता है।