ऍच॰ जी॰ वेल्स

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हर्बट जार्ज वेल्स (21 सितंबर 1866 – 13 अगस्त, 1946) महान अंग्रेजी विज्ञान कथाकार थे।

परिचय[संपादित करें]

वेल्स को गंभीर विज्ञान कथा साहित्य का जनक माना जाता है। फ्रांसीसी लेखक जूल्स बर्न ने जिस तरह गुब्बारों, पनडुब्बियों आदि वैज्ञानिक आविष्कारों का सहारा लेकर रोमांचक यात्राओं की कहानियां लिखीं, वेल्स ने विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के मानव तथा मानव समाज पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का चित्रण किया। आज वर्न और वेल्स विज्ञान कथा साहित्य के जनक माने जाते हैं।

वेल्स का जन्म 21 सितंबर 1866 को ब्राम्ले, कैंट (इंगलैंड) में एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था। उनका सोच समाजवादी था और उनकी विज्ञान कथाओं में यह परिलक्षित भी हुआ है। उन्होंने बड़ी संख्या में विज्ञान कथाएं और उपन्यास लिखे। हालांकि तब कहानी लेखन की इस विधा का नाम ‘साइंस फिक्शन’ नहीं पड़ा था। 'द स्टार', 'कंट्री आफ द ब्लाइंड', 'द मैजिक शाप', 'द ब्यूटिफुल सुइट', 'द स्टोलन बैसिलस' आदि उनकी अविस्मरणीय कहानियां हैं। उनका पहला उपन्यास ‘द टाइम मशीन’ 1895 में छपा। यह दुनिया भर में लोकप्रिय हुआ। टाइम मशीन के रूप में वेल्स ने अद्भुत कल्पना की। यह उनकी कल्पना का एक ऐसा आविष्कार था जिसका विश्व भर में विज्ञान लेखक आज तक उपयोग कर रहे हैं। इस आविष्कार पर आधारित सैकड़ों कहानियां लिखी गई हैं और अब भी लिखी जा रही हैं। मैंने भी लिखी है। मेरी विज्ञान कथा ‘अतीत में एक दिन’ के पात्र भी ऐसी ही एक टाइम मशीन यानी काल यंत्र में जहांगीर के युग की सैर करते हैं। वेल्स ने अपने इस अनोखे विचार से कालयात्रा को कल्पना में संभव बना दिया। इससे विज्ञान-कथाकारों को विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के सहारे विकसित हो रहे अपने समाज के अतीत, वर्तमान और भविष्य पर दृष्टि डालने का रास्ता मिल गया।

19 वीं सदी के आखिरी वर्षों में वेल्स ने जो कथा विचार दिए, उन पर विज्ञान कथाकर आज भी कहानियां लिख रहे हैं। कहने का मतलब यह कि भावी विज्ञान कथाकारों पर वेल्स का गहरा प्रभाव पड़ा।

अपने उपन्यास ‘द इनविजिबल मैन’ (1897) में उन्होंने दिखाया था कि विज्ञान के बल पर अधिक ताकत हाथ में आ जाने का हश्र क्या हो सकता है। ‘द वार इन द एयर’ (1908) उपन्यास में उन्होंने भावी युद्ध में हवाई बमबारी की पूर्व कल्पना कर ली थी। इसी तरह अपने एक और उपन्यास ‘द वर्ल्ड सेट फ्री’ (1914) में उन्होंने विज्ञान की खोजों से विकसित हो रहे विनाशकारी हथियारों पर सवाल उठाए। वेल्स ने चांद की यात्रा पर ‘द फर्स्ट मैन इन द मून’ (1901) उपन्यास लिखा था। उनके लगभग सभी उपन्यासों पर फिल्में बनीं।

विज्ञान-कथा की नई विधा देकर एच. जी. वेल्स अमर हो गए। अंग्रेजी कथा साहित्य में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।

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