आर्द्रा तारा
आर्द्रा या बीटलजूस, जिसका बायर नाम α ओरायनिस (α Orionis) है, शिकारी तारामंडल में स्थित एक लाल महादानव तारा है। यह उस तारामंडल का दूसरा सब से चमकीला तारा और पृथ्वी के आकाश में आठवाँ सब से चमकीला तारा है। आद्रा पृथ्वी से लगभग ६४० प्रकाश-वर्ष दूर है लेकिन तेज़ी से हिल रहा है इसलिए यह दूरी समय के साथ-साथ बदलती रहती है। इसका निरपेक्ष कान्तिमान (चमक) -६.०५ मैग्निट्यूड अनुमानित किया जाता है (याद रहे के खगोलीय मैग्निट्यूड की संख्या जितनी कम होती है तारा उतना ही ज़्यादा रोशन होता है)। यर्कीज़ वर्णक्रम श्रेणीकरण में इसको एक "M2Iab" का तारा बताया जाता है। आद्रा का द्रव्यमान १८-१९ M☉ (यानि हमारे सूरज के द्रव्यमान का १८ से १९ गुना) और अर्धव्यास (त्रिज्या) लगभग १,१८० R☉ (यानि सूरज के अर्धव्यास का १,१८० गुना) है।
[संपादित करें] महानोवा होने की सम्भावना
खगोलशास्त्री मानते हैं के आर्द्रा केवल १ करोड़ साल की आयु का है लेकिन अपने अत्यधिक द्रव्यमान की वजह से तेज़ी से अपने जीवनक्रम से गुज़र रहा है। वैज्ञानिक अनुमान लगते हैं के यह कुछ ही लाखों वर्षों में भयंकर विस्फोट के साथ महानोवा (सुपरनोवा) बन जाएगा। ऐसा भी संभव है के यह पिछले ६०० वर्षों के अन्दर फट चुका हो, लेकिन उसका प्रकाश हम तक पहुँचते-पहुँचते सैंकड़ों साल गुज़र सकते हैं। इस समय जो आद्रा हम आसमान में देखते हैं वह ६४० वर्ष पुरानी छवि है। जब आर्द्रा फटेगा तो इसके पीछे एक २० किमी के व्यास का न्यूट्रॉन तारा रह जाएगा।
[संपादित करें] अन्य भाषाओँ में
आर्द्रा को अंग्रेज़ी में "बीटलजूस" (Betelgeuse) और मराठी में "काक्षी" कहा जाता है। इस तारे के हिन्दी नाम "आर्द्रा" का मतलब होता है "नम" (यानि हल्का गीला) और यह नाम "रूद्र" (शिवजी का नाम) से सम्बन्ध रखता है।