आर्कटिक

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कृत्रिम रूप से रंगा हुआ आर्कटिक का स्थलाकृतिक मानचित्र

आर्कटिक, पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के आसपास के क्षेत्र को ठीक उसी प्रकार कहते है, जिस तरह दक्षिणी ध्रुव के आसपास का क्षेत्र अंटार्कटिक कहलाता है। आर्कटिक क्षेत्र में आर्कटिक महासागर (जो उत्तरी ध्रुव पर फैला है), कनाडा के कुछ भाग, ग्रीनलैंड (डेनमार्क का एक क्षेत्र), रूस का कुछ हिस्सा, संयुक्त राज्य अमेरिका (अलास्का), आइसलैंड, नार्वे, स्वीडन और फिनलैंड शामिल हैं। आर्कटिक शब्द यूनानी शब्द αρκτικός (आर्टिकोस) से आता है जो या तो नक्षत्र-मंड़ल सप्तऋषि या फिर ध्रुव तारे को इंगित करता है।

आर्कटिक क्षेत्र को आर्कटिक वृत (66°33'N) के उत्तरी क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जो अर्धरात्रि सूर्य और ध्रुवीय रात की अनुमानित सीमा है। इसको एक दूसरी तरह से परिभाषित करने के लिए कहा जा सकता है कि, यह वह क्षेत्र है जहां सबसे गर्म माह (जुलाई) का औसत तापमान 10 डिग्री सेल्सियस (50 °F) से कम होता है और सबसे उत्तरी वृक्ष रेखा इस क्षेत्र की सीमा की समताप रेखा से लगभग मिलती है।[1][2] सामाजिक और राजनीतिक रूप से आर्कटिक क्षेत्र में आठ आर्कटिक देशों के उत्तरी क्षेत्र शामिल है, हालांकि प्राकृतिक विज्ञान की परिभाषाओं के अनुसार इन देशों के इन उत्तरी क्षेत्रों को उप-आर्कटिक क्षेत्र माना जाता है।

आर्कटिक क्षेत्र में एक विशाल बर्फ से ढका महासागर है (जिसे कभी कभी अटलांटिक महासागर का उत्तरी भाग भी माना जाता है) जिसके चारों ओर वनस्पतिविहीन पर्माफ्रोस्ट (स्थायीतुषार) उपस्थित है। हाल के वर्षों में समुद्र में बर्फ की मात्रा में कमी आई है। आर्कटिक के जीवनचक्र में बर्फ में रहने वाले जीव,[3] प्राणीप्लवक, पादपप्लवक, मछलियां, समुद्री स्तनपायी, पक्षी, स्थलचर जीव, पादप और मानव शामिल हैं। आर्कटिक क्षेत्र पृथ्वी की पारिस्थितिकी प्रणालियों के बीच एक अद्वितीय क्षेत्र है। आर्कटिक के मूल निवासी और उनकी संस्कृति इस क्षेत्र की विषम शीत और चरम परिस्थितियों के लिए अभ्यस्त हो गये है।

भूमंडलीय ऊष्मीकरण के परिणामस्वरूप ध्रुवों की ओर खिसकती समताप रेखाओं (पिछले 30 वर्षों के दौरान लगभग 35 मील प्रति दशक) के कारण आर्कटिक क्षेत्र जिसे वृक्ष रेखा और तापमान के द्वारा परिभाषित किया जाता है, वर्तमान में सिकुड़ रहा है,[4] जिसका शायद सबसे बड़ा परिणाम समुद्री बर्फ की मात्रा में आई कमी है। भिन्न भिन्न परीक्षण अनुमानों के अनुसार आर्कटिक सागर की ज्यादातर बर्फ या तो पूरी तरह से या फिर इसकी ज्यादातर सितंबर 2040 से लेकर सन 2100 के बाद के कुछ समय तक, नष्ट हो जायेगी।[5]


संदर्भ[संपादित करें]

  1. "arctic." Dictionary.com Unabridged (v 1.1). Random House, Inc. Retrieved on May 2, 2009.
  2. Addison, Kenneth (2002). Fundamentals of the physical environment. Routledge. प॰ 482. 
  3. Christopher Krembs and Jody Deming. "Organisms that thrive in Arctic sea ice." National Oceanic and Atmospheric Administration. November 18, 2006.
  4. Hansen, Jim (October 19, 2006). "The Planet in Peril – Part I". Yale Center for the Study of Globalization. http://yaleglobal.yale.edu/content/planet-peril-%E2%80%93-part-i. 
  5. Serreze, Mc; Holland, Mm; Stroeve, J (Mar 2007). "Perspectives on the Arctic's shrinking sea-ice cover". Science (New York, N.Y.) 315 (5818): 1533–6. doi:10.1126/science.1139426. PMID 17363664. 

यह भी देखें[संपादित करें]

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