अरुणा राय
अरुणा राय भारत की एक राजनैतिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होने सन् १९६८ से १९७५ तक भारतीय प्रशासनिक सेवा में कार्य किया। उनके योगदान के लिये उन्हें मैगससे पुरस्कार एवं मेवाड़ सेवाश्री आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। वे राजस्थान के निर्धन लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिये किये गये प्रयास के लिये विशेष रूप से जानी जातीं हैं। भारत में सूचना का अधिकार लागू करने के लिये उनके प्रयत्न एवं योगदान उल्लेखनीय हैं। वे मेवाड़ के राजसमन्द जिले में स्थित देवडूंगरी गांव से सम्पूर्ण देश में संचालित मजदूर किसान शक्ति संगठन की संस्थापिका एवं अध्यक्ष भी हैं।
[संपादित करें] जीवन वृत्त
- सरकार की स्टेंडिंग कमेटी एक विगयापन निकलवाती है जिसमे वो आम नागरिकों से लोकपाल बिल के लिए सुझाव मांगती है... - तभी अचानक कहीं से अरुणा राय अपना तीसरा लोकपाल ले कर प्रकट हो जाती है..वही अरुणा राय जो सोनिया गाँधी की अगुआई में राष्ट्रीय सलाहकार समिति की अध्यक्ष हैं और पहले भी सोनिया गाँधी के साथ काम कर चुकी है... - अरुणा राय अन्ना हज़ारे के आंदोलन को गैर लोकतांत्रित व जन लोकपाल को ग़लत घोषित कर देती है.. - ये सब पहले से नियोजित षड्यंत्र है जिससे अन्ना व जन लोकपाल के प्रति लोगों की राय बदल जाए और जनसमूह अलग अलग विभाजित हो जाए... - अरुणा रॉय कॉंग्रेस की चमची है...जो अन्ना के आंदोलन को खराब करने के लिए सरकार द्वारा भेजी गई है