अरवी
अरबी को घुइयाँ के नाम से भी जाना जाता है | मुख्य रूप से इसकी खेती कन्द के लिए ही की जाती है | इसके अन्द की सब्जी बनायी जाती है, उपवास के समय इन्हीं कन्दों का उपयोग फलाहार के लिए किया जाता है | इसके पत्तों की भी सब्जी बनाई जाती है | कुछ प्रजातियों के कन्दों में कनकानाहट पायी जाती है | जो उबाल देने के बाद समाप्त हो जाती है | पत्तियों में कनकनाहट कंन्द की तुलना में अधिक पायी जाती है |
प्रजातियाँ [संपादित करें]
पत्तों तथा डंठलों के रंग के अनुसार अरवी की दो किस्में होती है : एक किस्म में डंठलें बैगनी रंग की तथा दूसरी में हरी होती है ।
इसी प्रकार हरी और गोल कन्द वाली किस्में होती है। कुछ कन्दों के गूदे सफेद कुछ के पीले कुछ के नांरगी व बैगनी होते हैं |
अरवी की प्रमुख प्रजातियाँ निम्न हैं- गौरिया, काका कच्चू, पंचमुखी, फैजाबादी गेडिया,एफ.सी. १, एफ.सी.४, तथा एफ.सी. ६ इत्यादि
पूसा कोमल, पूसा बरसाती, पूसा फागुनी तथा पूसा दो फसली
इन्हें भी देखें [संपादित करें]
बाहरी कड़ियाँ [संपादित करें]
- अरबी या घुइयाँ या अरुई की आर्गनिक जैविक उन्नत खेती
- अरवी की खेती (उत्तरा कृषि प्रभा)
- अरवी की खेती (डिजिटल मण्डी)
- Hardy Tropicals information page on Colocasia esculenta