स्तंभन

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स्तंभन क्रम

स्तंभन से अभिप्राय शिश्न के आकार मे बढ़ने और कड़ा होने से है, जो यौनिच्छा करने पर शिश्न के उत्तेजित होने के कारण होता है, यद्यपि यह गैर यौन स्थितियों में भी हो सकता है। प्राथमिक शारीरिक तंत्र जिसके चलते स्तंभन होता है, मे शिश्न की धमनियाँ स्वतः फैल जाती हैं, जिसके कारण अधिक रक्त शिश्न के तीन स्पंजी ऊतक कक्षों मे भर जाता है और इसे लंबाई और कठोरता प्रदान करता है। यह रक्त से भरे ऊतक रक्त को वापस ले जाने वाली शिराओं पर दबाव डाल कर सिकोड़ देते है, जिसके कारण अधिक रक्त प्रवेश करता है और कम रक्त वापस लौटता है। थोड़ी देर बाद एक साम्यावस्था अस्तित्व मे आती है जिसमे फैली हुई धमनियों और सिकुडी़ हुई शिराओं मे रक्त की समान मात्रा बहने लगती है और इस साम्यावस्था के कारण शिश्न को एक निश्चित स्तंभन आकार मिलता है।

यद्यपि स्तंभन संभोग के लिये आवश्यक है पर विभिन्न अन्य यौन गतिविधियों के लिए यह आवश्यक नहीं है।

संदर्भ [संपादित करें]

बाह्य सूत्र [संपादित करें]