सार्वजनिक प्रस्ताव

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Initial Public Offering (IPO), जब एक कंपनी अपने सामान्य स्टॉक (common stock) या शेयर पहली बार जनता के लिए जारी करती है तो उसे आइपीओ अथवा " सार्वजनिक प्रस्ताव " कहा जाता है यह अधिकतर छोटी, नई कंपनियों द्बारा जारी किए जाते हैं जो अपने व्यापार को बढाने के लिए पूँजी (capital) चाहती हैं, पर यह बड़ी निजी-स्वामित्व वाली कंपनियों (privately-owned companies) द्बारा भी जारी किए जा सकते हैं जो सार्वजनिक बाज़ार में कारोबार करना चाहती हैं (publicly traded).

आइपीओ जारी करने वाली कंपनी किसी हामिदार (underwriting) कंपनी से मदद ले सकती है जो उसे जो यह निर्धारित करने में मदद करती है की किस प्रकार ज़मानत (security)(सामान्य या अधिमान्य (preferred)) जारी करनी चाहिये, आइपीओ का सर्वोत्तम मूल्य और उसे बाज़ार में जारी करने का सही समय क्या है।

आईपीओ एक जोखिम भरा निवेश (investment) हो सकते हैं व्यक्तिगत निवेशकों के लिए, यह भविष्यवाणी करना कठिन है कि शेयर अपने प्रारंभिक दिन के व्यापार और निकट भविष्य में कैसा प्रदर्शन करेंगे क्यूंकि उनके पास कंपनी का विश्लेषण करने के लिए पर्याप्त आंकड़े नही होते हैं साथ ही अधिकतर आईपीओ उन कंपनियों के हैं जो एक अस्थायी विकास के दौर से गुज़र रही हैं, इसलिए उनके भविष्यगत मूल्य के सन्दर्भ में अनिश्चितता बनी रहती है

सूचीकरण करने की वजह[संपादित करें]

जब एक कंपनी अपने शेयर को public exchange (public exchange), पर सूचीबद्ध करती है तब लगभग हमेशा ही वह अतिरिक्त नए शेयर निर्गम करना चाहती है ताकि वह और ज़्यादा पूँजी एकत्रित कर सके निवेशकों को नए जारी किए शेयर से जो पूँजी एकत्रित होती है वह सीधे कंपनी को जाती है (यह बाज़ार में शेयर के बाद के कारोबार के विपरीत होता है जब पूँजी निवेशकों के बीच बांटी जाती है). आईपीओ कंपनी को एक विस्तृत शेयर बाज़ार निवेशकों के समूह की मदद से भविष्य के विकास के लिए बड़ी मात्रा में पूंजी उपलब्ध करता है। कंपनी को पूँजी वापस नही करनी होती है पर नए शेयरधारक कंपनी को भविष्य में होने वाले लाभ पर और कम्पनी के विघटन की दशा में पूँजी के बंटवारे का अधिकार होता है

मौजूदा शेयरधारकों (shareholder) का कंपनी के शेयरों का अनुपात कम हो जायेगा पर उन्हें यह आशा रहती है की उनके द्बारा निवेश की गई पूँजी में बढोतरी ही होगी

इसके अलावा, एक बार एक कंपनी सूचीबद्ध हो जाती है तो वह और इस तरह वह अधिकारिक इश्यू (rights issue) के द्बारा विस्तार के लिए पूँजी बग्यारे ऋण लिए इकठ्ठा कर सकती है व्यक्तिगत निवेशकों को ढूँढने और उनसे परक्रामण करने की बजाये बाज़ार से ही नियमित रूप से बड़ी मात्रा में पूँजी एकत्रित कर पाने की सुविधा कई कंपनियों को सूचीबद्ध होने के लिए प्रोत्साहित करती है

प्रक्रिया[संपादित करें]

आईपीओ में आमतौर पर एक अथवा एक से अधिक निवेश बैंक (investment bank) पैर हामीदार (underwriter) होते हैं शरेस जारी करने वाली कंपनी "जारीकर्ता", किसी प्रमुख हामीदार से अपने शरेस जनता को बेचने के लिए अनुबन्ध करती है वह हामीदार इन शैरोन को बेचने का प्रस्ताव ले कर निवेशकों के पास जाता है

आईपीओ का यह सौदा (आवंटन और मूल्य निर्धारण) कई रूपों में हो सकता है आम उदाहरणों में शामिल हैं:


आमतौर पर एक बड़े आईपीओ की हामीदारी निवेश बैंकों के किसी संगठन (syndicate) के द्बारा की जाती है, जिसका नेतृत्व एक या अधिक बड़े निवेश बैंक कर रहे होते हैं शेयरों की बिक्री पर हामिदारों को आढ़त (commission) मिलती है जो बेचे गए शेयरों के मूल्य पर आधारित होती है आमतौर पर, प्रमुख हामिदार यानी वह हामिदार जिन्हों ने आईपीओ के सबसे बड़े हिस्से बेचे हैं, सबसे ज्यादा कमीशन पाते हैं - कुछ मामलों में 8 % तक.

बहुराष्ट्रीय आईपीओ में जारीकर्ता कंपनी के घरेलू अवंम अन्य बाजारों के अनुरूप भिन्न- भिन्न कानूनी आवश्यकताओं से निपटने के लिए हामिदारों के तीन संगठन तक हो सकते हैं उदाहरण के लिए, यूरोपीय संघ की एक जारीकर्ता कंपनी का प्रतिनिधित्व उसकी घरेलू बाज़ार, यूरोप, में वहां का प्रमुख हामिदार संगठन कर सकता है। अन्य बाजारों जैसे अमरीका / कनाडा और एशिया के लिए अलग हामीदार संगठन हो सकते हैं आमतौर पर, प्रमुख बाज़ार का प्रमुख हामीदार बैंक अन्य बाजारों में भी कंपनी का प्रमुख हामीदार होता है।

इस तरह की व्यापक कानूनी आवश्यकताओं की वजह से आईपीओ आमतौर पर एक या एक से अधिक कानूनी फर्म्स (law firm) के साथ काम करते हैं, जैसे की लन्दन की मैजिक सर्कल (Magic Circle) फर्म्स और न्यूयार्क सिटी की वाईट शू फर्म (white shoe firm)

आमतौर पर, पेशकश में नई पूँजी एकर्त्रित करने के लिए नए शेयरों का निर्गम एवं मौजूदा शेयरों की अनुषंगी बिक्री शामिल होती है। लेकिन, अधिकतर मौजूदा शेयरो की बिक्री पर कुछ नियामक प्रतिबंध एवं प्रमुख हामिदारों द्वारा लगाये गए प्रतिबन्ध लागु होते हैं

सार्वजनिक पेशकशें मुख्या तौर पर संस्थागत निवेशकों द्वारा बसची जाती हैं, लकिन कुछ शेयरों हामिदारों को भी बिक्री के लिए आवंटित किए जाते हैं। एक सार्वजनिक पेशकश के शेयरों बेचने वाले दलाल को आढ़त के बजाए बिक्री प्रत्यय से किया जाता है। ग्राहक को सार्वजनिक पेशकश के शेयरों खरीदने पर कोई आढ़त नही देनी होती, बिक्री प्रत्यय खरीद मूल्य में ही शामिल होता है।

जारीकर्ता हामिदारों को कुछ परिस्थितिओं में उनकी पेशकश १५% तक बढाने का विकल्प देता है, इसे ग्रीन शू (greenshoe) या अधिक आवंटन विकल्प कहते हैं।

व्यापार चक्र[संपादित करें]

संयुक्त राज्य अमेरिका में 1990 के दशक के अंत में डॉट कॉम bubble (dot-com bubble) के दौरान कई उद्यम पूंजी (venture capital) द्वारा चालित कंपनियां शुरू हुईं जिन्होंने तेजड़िया बाज़ार (bull market) में पूनी के लिए आईपीओ पेश किए. आमतौर पर कंपनी के सार्वजनिक होते ही उसके शरेस का भाव ऊपर चढ़ जाता है अगले संभाव्य माइक्रोसॉफ्ट और नेटस्केप (Netscape) की तलाश में निवेशक आधार स्तर पर ही निवेश करने लगे.

उदार स्टॉक (stock option) से प्रारंभिक संस्थापक रातोंरात करोड़पति (millionaire) बन सकते हैं, कर्मचारी भी काफी पैसे बना सकते हैं अधिकांश आईपीओ नैस्डैक (Nasdaq) शेयर बाजार, जो कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधित कंपनियों को सूचीबद्ध करता है, पर पाये जा सकते हैं लेकिन, अपेक्षाकृत नई और untested फर्मों को (कई दौर के वित्तपोषण के बाद) बड़ी मात्रा में वित्तीय संसाधन उबलब्ध होने के बावजूद बड़ी मात्रा में फर्म्स नगदी संकट में फसने लगी. संकट विशेषकर उन मामलों में था जहाँ संस्थापक दल ने आईपीओ जरी होते हे athav उसके तुंरत बाद ही अपनी हिस्सेदारी के एक महत्वपूर्ण भाग बेच दिया था (मुदाम्बी और त्रेइचेल, 2005)

यह घटना थी संयुक्त राज्य तक सीमित नहीं थी। उदाहरण के लिए, जापान में, इसी तरह की स्थिति प्रस्तुत हुई थी। कुछ कंपनियों इस तरह हो रहा था जैसे आईपीओ जरी करना ही उनका एकमात्र लक्ष्य हो कुछ शेयर बाज़ार ऐसी ही कंपनियों के लिए स्थापित किए गए थे, जैसे की नैस्डैक जापान (Nasdaq Japan).

शायद गर्म आईपीओ बाजार के इतिहास में सबसे स्पष्ट बुलबुले १९२९ और १९८९ में थे, जब सीमित अवधि निधि के आईपीओ अत्यन्त बड़े प्रीमियम पर बेचे गये अगर हम सीमित अवधि नीधियों के बाज़ार मूल्य की तुलना निधि में शामिल शेयरों के मान से करें तो यह बुलबुले स्पष्ट दिखते हैं जब बाज़ार मूल्य अन्तर्निहित मान के गुणजों में हो तब बुलबुले बन रहे होते हैं

नीलामी[संपादित करें]

बिल हम्ब्रेच्त (Bill Hambrecht) नामक एक उद्यम पूँजीदार ने इस अक्षम प्रक्रिया को कम करने के लिए एक युक्ति निकलने का प्रयास किया है। उसने हामिदारों द्वारा बढ़ावा दिए जा रहे अत्यधिक अवमूल्यन को कम करने के लिए शेयरों को डच नीलामी (Dutch auction) के द्वारा जारी करने का तरीका निकला बहरहाल, हामीदार इस नीति से प्रसन्न नही हुए गूगल एक ऐसे स्थापित कंपनी है जिसने सार्वजनिक होने के लिए डच नीलामी के तरीके का उपयोग किया हालांकि वह ऐसा करने वाली पहली कंपनी नही थी डच नीलामी तरीका अपनाने के बावजूद गूगल का शेयर मूल्य पहले दिन के कारोबार में ही १७% चढ़ गया आईपीओ के बारे में लोगों की धारणा विवादास्पद हो सकती है आईपीओ उन लोगों के लिए पूरी तरह से विफल था जो उसे ज्यादा से ज्यादा पूँजी एकत्रित करने का जरिया मान रहे थे आईपीओ उन लोगों के लिए पूरी तरह से सफल थे जो आईपीओ को निवेशकर्ताओं को अवमूल्यन से हुए फायदे से माप रहे थे यह नोट करना महत्वपूर्ण है की एक नीलामी और खुले बाज़ार में अलग तरह के निवेशक होते हैं-नीलामी में संसथाएं बोली लगाती हैं और खुले बाज़ार में व्यक्तिगत निवेशक गूगल एक विशेष मामला हो सकता है पर क्योंकि कई व्यक्तिगत निवेशक हाल में ही जारी आईपीओ को स्टॉक की लम्बी अवधि ke मान को ध्यान में रख कर खरीदते हैं, इस वजह से वह आईपीओ का मान सन्सथागत मान से ऊपर पहुँचा देते हैं

मूल्य निर्धारण[संपादित करें]

ऐतिहासिक तौर पर देखें तो अमेरिका और वैश्विक दोनों ही स्टारों पर आईपीओ अवमूल्यित रहे हैं आईपीओ का प्रारंभिक अवमूल्यन (initial underpricing), स्टॉक के पहली बार कारोबार में आते समय उसमे अतिरिक्त रूचि पैदा करने का काम करता है यह उन निवेशकों के लिए उल्लेखनीय लाभ का स्रोत हो सकता है जिन्हें 'मांगी कीमत' पर शेयर मिले हों (significant gains for investors who have been allocated shares of the IPO at the offering price) हालांकि, आईपीओ का अवमूल्यन करने पर कंपनी को उस पूँजी को त्यागना होता है जिसे वह स्टॉक को ऊँचे मूल्य पर विक्रय कर प्राप्त कर सकती थी

अधिमूल्यन का खतरा भी एक महत्वपूर्ण विचार है। जब एक स्टॉक जनता को बाज़ार मूल्य से ऊँचे दाम पर प्रस्तुत किया जाता है तब हामिदारों को शेयर बेचने की अपनी प्रतिबद्धता को निभाएं में मुश्किल हो सकती है अगर वह सारे शेयर बेच भी लेते हैं तब भी अगर पहले दिन के कारोबार में स्टॉक गिरता है तो वह विक्रय क्षमता और मान खो सकता है

इसीकारण निवेश बैंक बहुत सारे कारकों को ध्यान में रख कर एक आईपीओ का मूल्य निर्धारण करते हैं और एक ऐसे प्रस्ताव मूल्य तक पहुंचना चाहते है जो स्टॉक में दिलचस्पी जगाने के लिए पर्याप्त रूप से नीचा हो पर कंपनी के लिए पर्याप्त पूँजी इकठ्ठा करने के लिए पर्याप्त रूप से ऊँचा भी हो सामान्यतः इष्टतम मूल्य निर्धारित करने की प्रक्रिया में हामिदार (underwriters) (व्यवसाय-संघ) प्रमुख सन्सथागत निवेशकों से shayaron को खरीदने की प्रतिबद्धता की व्यवस्था करते हैं

निर्गम मूल्य[संपादित करें]

आईपीओ नियुक्ति की योजना बनने वाली कंपनी प्रमुख प्रबंधकों को नियुक्त करती है जो उसे shayaron का उचित मूल्य निर्धारित करने में मदद करते हैं आईपीओ के मूल्य निर्धारण के दो तरीके हो सकते हैं: या तो कम्पनी प्रमुख प्रबंधकों की मदद से मूल्य निर्धारित करती है अथवा बुक बिल्डिंग द्वारा मूल्य निर्धारण होता है

नोट: सभी आईपीओ डिलीवरी निपटान के लिए डीटीसी प्रणाली (DTC system) के माध्यम के पात्र नही होते हैं, जिसमें या तो स्टॉक प्रमाण पत्र समाशोधन बैंक के अभिरक्षक को सौपा जाना होता है अथवा विक्रयकर्ता समूह दलाली फर्म के साथ सुपुर्दगी बनाम भुगतान (delivery versus payment) ("DVP") का तरीका अपनाना होता है यह जानकारी पर्याप्त नहीं है।

शांत अवधि[संपादित करें]

IPO के इतिहास के दौरान दो सामान्य समय गवाह हैं जिन्हें "शांत अवधियाँ"कहा गया है। पहली और ऊपर लिंक किया हुई अवधि, कंपनी द्वारा S-1 (S-1) दाखिल करने पर SEC स्टाफ के द्वारा पंजीकरण विवरण प्रभावी होने की घोषणा के पहले की होती है इस दौरान, निर्गमकर्ता, कंपनी के अंदरूनी स्रोत, विश्लेषक और अन्य पार्टियाँ को आने वाले आईपीओ के बारे में चर्चा करने और उसे बढावा देने पर कानूनी रूप से रोक होती है।[1]

दूसरी "शांत अवधि " एक आईपीओ के पहले दिन के सार्वजनिक व्यापार के 40 कैलेंडर दिनों बाद की अवधि को संदर्भित करता है। इस अवधि के दौरान आईपीओ में शामिल अंदरूनी सूत्रों और हामिदारों द्वारा आय के पूर्वानुमान या अनुसंधान रिपोर्ट जारी करने पर प्रतिबन्ध होता है SEC (SEC) द्वारा लागु किए गए विनियामक परिवर्तनों ने, जो वैश्विक निपटान (Global Settlement) का हिस्सा थे, के कारण 9 जुलाई (July 9), 2002 से "शांत अवधि " २५ से ४० दिनों की कर दी गई शांत अवधि समाप्त होते पर आमतौर पर प्रमुख हामिदार अनुसन्धान व्याप्ति आरम्भ करते हैं इसके अलावा, NASD और NYSE द्वारा जारी किए एक नियम ke अनुसार द्वितीयक प्रस्ताव ke लिए १० दिन की "शांत अवधि" तथा प्रतिभूति प्रस्ताव की निश्चित अवरुद्धता अवधि ke समाप्त होने ke पहले और बाद १५ दिन की "शांत अवधि" निर्धारित की गई है

सबसे बड़ा[संपादित करें]

इसे भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

आगे के अध्ययन के लिए[संपादित करें]

  • [1]गोएर्गें, एम.

खुरशेद, ए और मुदाम्बी, आर२००७ब्रितानी आईपीओ का लम्बी अवधि प्रदर्शन: क्या इनका अनुमान लगाया जा सकता है ? वित्त प्रबंध, 33(6) : 401-419 .

  • [2]लोगरन, बी डी और रिटर, जे आर२००४आईपीओ का अवमूल्यन समय के साथ क्यों बदल गया है?वित्तीय प्रबन्धन, 33(3) : 5-37 .
  • [3]लौघ्रण, टी. और रिटर, जे आर २००२निर्गमकर्ता आईपीओ में पैसे की पूरी वसूली न होने पर भी उदास क्यों नही होते? वित्तीय अध्ययनों की समीक्षा, 15(2) : 413-443 .
  • [4]खुरशेद, ए और मुदाम्बी, आर २००२निवेश न्यास का ब्रिटेन के मुख्य बाजार में लघु अवधि मूल्य प्रदर्शन व्यावहारिक वित्तीय अर्थशास्त्र, 12(10) : 697-706 .
  • [5]Minterest.com
  • [6]ब्रेडले, डीजे, जोर्डन, बी डी और रिटर, जे आर२००३शांत अवधि एक धमाके के साथ ख़त्म हो जाती है वित्तीय जर्नल , 58(1) : 1-36 .
  • [7]एम. गोएर्गें, एम., खुरशेद, ए और मुदाम्बी, आर २००६सार्वजनिक होने की राजनीति: ब्रितानी फेर्में
    अपने सूचीकरण संविदा कैसे चुने. व्यापार वित्त और लेखांकन जर्नल , 33(1 और 2) : 306-328 .
  • [8]मुदाम्बी और आर त्रेइचेल, म ज २००५नई सार्वजनिक इंटरनेट-आधारित फर्म्स में नगदी संकट: एक अनुभवजन्य विश्लेषण.व्यवसायिक उद्यम जर्नल'''

बाहरी सम्बन्ध[संपादित करें]


सन्दर्भ[संपादित करें]